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नैनीताल । यूकेएसएसएससी द्वारा 2016 में कराई गई ग्राम विकास अधिकारी परीक्षा की ओ एम आर सीट में गड़बड़ी के आरोपी आयोग के तत्कालीन अध्यक्ष आर बी एस रावत,सचिव मनोहर सिंह कन्याल व परीक्षा नियंत्रक राजेन्द्र सिंह पोखरिया की जमानत हाईकोर्ट ने खारिज कर दी है । मामले की सुनवाई न्यायमूर्ति आलोक कुमार वर्मा की एकलपीठ में हुई ।
  मामले के अनुसार उत्तराखण्ड अधीनस्थ सेवा चयन आयोग द्वारा वर्ष 2016 में आयोजित की गयी ग्राम पंचायत विकास अधिकारी की परीक्षा में धांधली के सम्बन्ध में सतर्कता सेक्टर देहरादून में धोखाधड़ी व भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम 1968 का अभियोग पंजीकृत किया गया था। इस मुकदमें कि विवेचना सितम्बर 2022 में उत्तराखण्ड शासन द्वारा एस0टी0एफ0 को स्थान्तरित की गयी थी। एस0टी0एफ0 द्वारा मुकदमे  की विवेचना में साक्ष्य एकत्र करते हुए उत्तराखण्ड अधीनस्थ सेवा चयन आयोग के तत्तकालीन अध्यक्ष रघुबीर सिंह रावत, तत्कालीन सचिव मनोहर सिंह कन्याल एवं तत्तकालीन परीक्षा नियंत्रक राजेन्द्र सिंह पोखरिया को गिरफ्तार किया गया था तथा ये तीनों ही अधिकारी पिछले एक वर्ष से अधिक समय से जेल में निरुध्द हैं । इन तीनों अधिकारियों की पूर्व में विजिलेंस कोर्ट देहरादून द्वारा जमानत प्रार्थना पत्र खारिज किया गया था । जिसके पश्चात उपरोक्त तीनों अधिकारियों द्वारा म उच्च न्यायालय नैनीताल में जमानत याचिका लगाई गयी थी। जिनकी जमानत याचिका का विरोध में  एसटीएफ द्वारा मुकदमे के विवेचना  में अभियुक्तों के विरुद्ध एकत्रित किए गए साक्ष्यों को  उच्च न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत कर तीनों अभियुक्त की जमानत याचिका का पुरजोर विरोध किया गया था । जिस पर  उच्च न्यायालय द्वारा एस0टी0एफ0 के द्वारा प्रस्तुत किए गए साक्ष्यों का अवलोकन करने के पश्चात   तीनों अधिकारियों की जमानत याचिका को खारिज कर दिया गया है।
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