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नैनीताल से हाईकोर्ट शिफ्ट करने के हाईकोर्ट के आदेश में क्या क्या निर्देश थे, ऋषिकेश क्यों आया चर्चा में, कैसे शुरू हुआ हाईकोर्ट शिफ्टिंग का मुद्दा, पढ़े यह संक्षिप्त विवरण । नैनीताल पुलिस की फिर हुई किरकिरी -: नैनीताल पॉक्सो कोर्ट ने दी दुष्कर्म के षड्यंत्र में शामिल होने के आरोप में गिरफ्तार युवती को जमानत; हड़बड़ी में गिरफ्तारी और साक्ष्यों की कमी पर उठाये सवाल भाजपा नेता डॉ. भुवन चंद्र आर्य ने नैनीताल विधानसभा के विभिन्न क्षेत्रों में किया सघन जनसंपर्क, ग्रामीणों और शिक्षकों से की मुलाकात, नैनीताल से हाईकोर्ट शिफ्टिंग का मामला -: सुप्रीम कोर्ट ने उत्तराखण्ड हाईकोर्ट का आदेश रद्द किया, हल्द्वानी में चिन्हित भूमि के संबंध में भी दिए दिशा निर्देश । अखिल भारतीय नौ सैनिक शिविर में डीएसबी परिसर के कैडेटों का राष्ट्रीय स्तर पर उत्कृष्ट प्रदर्शन, दो स्वर्ण, एक रजत एवं एक कांस्य पदक पर कब्जा किया,

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  • नैनीताल से हाईकोर्ट शिफ्ट करने के हाईकोर्ट के आदेश में क्या क्या निर्देश थे, ऋषिकेश क्यों आया चर्चा में, कैसे शुरू हुआ हाईकोर्ट शिफ्टिंग का मुद्दा, पढ़े यह संक्षिप्त विवरण ।
    नैनीताल से हाईकोर्ट शिफ्ट करने के हाईकोर्ट के आदेश में क्या क्या निर्देश थे, ऋषिकेश क्यों आया चर्चा में, कैसे शुरू हुआ हाईकोर्ट शिफ्टिंग का मुद्दा, पढ़े यह संक्षिप्त विवरण ।
    नैनीताल । सुप्रीम कोर्ट ने उत्तराखंड हाईकोर्ट के जिस आदेश को  आज रद्द किया है उसमें  8 मई 2024 को उत्तराखंड हाईकोर्ट के तत्कालीन मुख्य न्यायाधीश रितु बाहरी और न्यायमूर्ति राकेश थपलियाल की खंडपीठ ने हल्द्वानी के गोलापार में प्रस्तावित 26 हेक्टेयर भूमि पर नया हाई कोर्ट बनाने से साफ इनकार कर दिया था।
    अदालत ने स्पष्ट किया कि चूंकि चिन्हित की गई भूमि का 75 प्रतिशत हिस्सा घने जंगलों से घिरा हुआ है और देश की सर्वोच्च अदालत सुप्रीम कोर्ट भी उत्तराखंड के जंगलों की आग और पर्यावरण संरक्षण को लेकर गंभीर है, इसलिए हाई कोर्ट निर्माण के लिए एक भी पेड़ को उखाड़ा या काटा नहीं जाएगा।
    हाईकोर्ट की मंशा तब एक पीठ ऋषिकेश में स्थापित करने की भी थी । देहरादून जिला बार एसोसिएशन सहित अन्य अधिवक्ताओं ने इस बेंच की मांग की थी । देहरादून बार ने इस मामले में सुप्रीम कोर्ट में भी पैरवी की थी । लेकिन उत्तराखंड हाईकोर्ट बार एसोसिएशन हाईकोर्ट की बैंच ऋषिकेश में बनाने के सख्त खिलाफ थी ।
    ​हाईकोर्ट को स्थानांतरित करने के पीछे कोर्ट ने तब कई व्यावहारिक कठिनाइयों और जनहित से जुड़े मुद्दों को रेखांकित किया था। जिनमें पर्यटक सीजन में लगने वाला जाम,मूलभूत स्वास्थ्य सेवाओं का अभाव,दूर दराज के क्षेत्रों से आने वाले वादकारियों की समस्या आदि मुख्य थी ।
     कोर्ट ने यह भी कहा कि अगले 50 वर्षों के दीर्घकालिक दृष्टिकोण को देखते हुए, जहां न्यायाधीशों की संख्या बढ़कर 80 तक हो सकती है, एक बड़े और सुलभ बुनियादी ढांचे की तत्काल आवश्यकता है।
    ​इन सभी परिस्थितियों को देखते हुए कोर्ट ने राज्य की मुख्य सचिव निर्देश दिया था कि वे एक महीने के भीतर 7 जून 2024 तक  हाईकोर्ट, न्यायाधीशों के आवास और कम से कम 7,000 वकीलों के चैंबर, पार्किंग व कैंटीन के लिए बेहतरीन कनेक्टिविटी और चिकित्सा सुविधाओं वाली उपयुक्त भूमि तलाश कर रिपोर्ट सौंपें।
    इसके साथ ही, अदालत ने वकीलों और आम जनता की लोकतांत्रिक राय जानने के लिए रजिस्ट्रार जनरल को 14 मई 2024 तक हाई कोर्ट की वेबसाइट पर एक ऑनलाइन पोर्टल खोलने का निर्देश दिया था। इस पोर्टल पर वकील अपने नामांकन नंबर और आम जनता अपने आधार नंबर के विवरण के साथ 31 मई 2024 तक हाई कोर्ट शिफ्टिंग के पक्ष में ‘हाँ’  या विपक्ष में ‘ना’  के रूप में अपना विकल्प दर्ज कराने को कहा था ।
    इसी आदेश को हाईकोर्ट बार एसोसिएशन ने सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी थी और सुप्रीम कोर्ट ने यह आदेश रद्द कर दिया ।
      इससे पूर्व हाईकोर्ट के वरिष्ठ अधिवक्ता एम सी कांडपाल ने हाईकोर्ट के कई अधिवक्ताओं के हस्ताक्षरों से एक ज्ञापन जनवरी 2017 में मुख्य न्यायधीश को देकर नैनीताल से हाईकोर्ट शिफ्ट करने की मांग की थी । 2019 में उन्होंने इस मामले में पुनः मुख्य न्यायधीश को प्रत्यावेदन दिया ।  जिसे हाईकोर्ट ने सरकार को विचार के लिए भेज दिया । साथ ही हल्द्वानी सहित कई स्थानों पर हाईकोर्ट के लिए जगह की तलाश की जाने लगी । 2022 में राज्य कैबिनेट ने इस संबंध में प्रस्ताव पास किया और गौलापार में जगह चिन्हित की गई । लेकिन गौलापार की भूमि में बड़ी संख्या में पेड़ होने व अन्य कारणों से यह प्रस्ताव अटक गया ।
     इसी बीच अप्रैल 2024 में बंद हो चुकी ए डी पी एल ऋषिकेश  की  कर्मचारियों के आवास खाली करने के संबंध में एक याचिका की हाईकोर्ट में सुनवाई के दौरान कोर्ट के संज्ञान में लाया गया कि यह स्थान हाईकोर्ट की एक बैंच स्थापित करने के लिए उपयुक्त है ।
    हाईकोर्ट ने इसका संज्ञान लेते हुए सरकार से जबाव मांगा । लेकिन कई अधिवक्ता एक बैंच ले जाने के विरोध में थे । क्योंकि छोटे राज्य में दो हाईकोर्ट को लेकर सवाल उठाए गए ।
    इसी मामले की सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने 8 मई 2024 को यह आदेश पारित किया था । जो अब निरस्त हो गया है ।

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  • नैनीताल से हाईकोर्ट शिफ्ट करने के हाईकोर्ट के आदेश में क्या क्या निर्देश थे, ऋषिकेश क्यों आया चर्चा में, कैसे शुरू हुआ हाईकोर्ट शिफ्टिंग का मुद्दा, पढ़े यह संक्षिप्त विवरण ।
    नैनीताल से हाईकोर्ट शिफ्ट करने के हाईकोर्ट के आदेश में क्या क्या निर्देश थे, ऋषिकेश क्यों आया चर्चा में, कैसे शुरू हुआ हाईकोर्ट शिफ्टिंग का मुद्दा, पढ़े यह संक्षिप्त विवरण ।
    नैनीताल । सुप्रीम कोर्ट ने उत्तराखंड हाईकोर्ट के जिस आदेश को  आज रद्द किया है उसमें  8 मई 2024 को उत्तराखंड हाईकोर्ट के तत्कालीन मुख्य न्यायाधीश रितु बाहरी और न्यायमूर्ति राकेश थपलियाल की खंडपीठ ने हल्द्वानी के गोलापार में प्रस्तावित 26 हेक्टेयर भूमि पर नया हाई कोर्ट बनाने से साफ इनकार कर दिया था।
    अदालत ने स्पष्ट किया कि चूंकि चिन्हित की गई भूमि का 75 प्रतिशत हिस्सा घने जंगलों से घिरा हुआ है और देश की सर्वोच्च अदालत सुप्रीम कोर्ट भी उत्तराखंड के जंगलों की आग और पर्यावरण संरक्षण को लेकर गंभीर है, इसलिए हाई कोर्ट निर्माण के लिए एक भी पेड़ को उखाड़ा या काटा नहीं जाएगा।
    हाईकोर्ट की मंशा तब एक पीठ ऋषिकेश में स्थापित करने की भी थी । देहरादून जिला बार एसोसिएशन सहित अन्य अधिवक्ताओं ने इस बेंच की मांग की थी । देहरादून बार ने इस मामले में सुप्रीम कोर्ट में भी पैरवी की थी । लेकिन उत्तराखंड हाईकोर्ट बार एसोसिएशन हाईकोर्ट की बैंच ऋषिकेश में बनाने के सख्त खिलाफ थी ।
    ​हाईकोर्ट को स्थानांतरित करने के पीछे कोर्ट ने तब कई व्यावहारिक कठिनाइयों और जनहित से जुड़े मुद्दों को रेखांकित किया था। जिनमें पर्यटक सीजन में लगने वाला जाम,मूलभूत स्वास्थ्य सेवाओं का अभाव,दूर दराज के क्षेत्रों से आने वाले वादकारियों की समस्या आदि मुख्य थी ।
     कोर्ट ने यह भी कहा कि अगले 50 वर्षों के दीर्घकालिक दृष्टिकोण को देखते हुए, जहां न्यायाधीशों की संख्या बढ़कर 80 तक हो सकती है, एक बड़े और सुलभ बुनियादी ढांचे की तत्काल आवश्यकता है।
    ​इन सभी परिस्थितियों को देखते हुए कोर्ट ने राज्य की मुख्य सचिव निर्देश दिया था कि वे एक महीने के भीतर 7 जून 2024 तक  हाईकोर्ट, न्यायाधीशों के आवास और कम से कम 7,000 वकीलों के चैंबर, पार्किंग व कैंटीन के लिए बेहतरीन कनेक्टिविटी और चिकित्सा सुविधाओं वाली उपयुक्त भूमि तलाश कर रिपोर्ट सौंपें।
    इसके साथ ही, अदालत ने वकीलों और आम जनता की लोकतांत्रिक राय जानने के लिए रजिस्ट्रार जनरल को 14 मई 2024 तक हाई कोर्ट की वेबसाइट पर एक ऑनलाइन पोर्टल खोलने का निर्देश दिया था। इस पोर्टल पर वकील अपने नामांकन नंबर और आम जनता अपने आधार नंबर के विवरण के साथ 31 मई 2024 तक हाई कोर्ट शिफ्टिंग के पक्ष में ‘हाँ’  या विपक्ष में ‘ना’  के रूप में अपना विकल्प दर्ज कराने को कहा था ।
    इसी आदेश को हाईकोर्ट बार एसोसिएशन ने सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी थी और सुप्रीम कोर्ट ने यह आदेश रद्द कर दिया ।
      इससे पूर्व हाईकोर्ट के वरिष्ठ अधिवक्ता एम सी कांडपाल ने हाईकोर्ट के कई अधिवक्ताओं के हस्ताक्षरों से एक ज्ञापन जनवरी 2017 में मुख्य न्यायधीश को देकर नैनीताल से हाईकोर्ट शिफ्ट करने की मांग की थी । 2019 में उन्होंने इस मामले में पुनः मुख्य न्यायधीश को प्रत्यावेदन दिया ।  जिसे हाईकोर्ट ने सरकार को विचार के लिए भेज दिया । साथ ही हल्द्वानी सहित कई स्थानों पर हाईकोर्ट के लिए जगह की तलाश की जाने लगी । 2022 में राज्य कैबिनेट ने इस संबंध में प्रस्ताव पास किया और गौलापार में जगह चिन्हित की गई । लेकिन गौलापार की भूमि में बड़ी संख्या में पेड़ होने व अन्य कारणों से यह प्रस्ताव अटक गया ।
     इसी बीच अप्रैल 2024 में बंद हो चुकी ए डी पी एल ऋषिकेश  की  कर्मचारियों के आवास खाली करने के संबंध में एक याचिका की हाईकोर्ट में सुनवाई के दौरान कोर्ट के संज्ञान में लाया गया कि यह स्थान हाईकोर्ट की एक बैंच स्थापित करने के लिए उपयुक्त है ।
    हाईकोर्ट ने इसका संज्ञान लेते हुए सरकार से जबाव मांगा । लेकिन कई अधिवक्ता एक बैंच ले जाने के विरोध में थे । क्योंकि छोटे राज्य में दो हाईकोर्ट को लेकर सवाल उठाए गए ।
    इसी मामले की सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने 8 मई 2024 को यह आदेश पारित किया था । जो अब निरस्त हो गया है ।

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