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नैना पीक की वन चौकी में व्यवसायिक गतिविधियां मिली, सालसा के सदस्य सचिव प्रदीप मणि ने डी एफ ओ नैनीताल को पत्र लिखकर मामले की जांचकर कार्रवाई करने को कहा, लेखिका अपराजिता कोटलिया की प्रथम पुस्तक “द मैन बिहाइंड माई फादर” का विमोचन कुमाऊं विश्व विद्यालय के कुलपति प्रो.दीवान सिंह रावत ने किया, ट्रेडर्स कप हॉकी: गोण्डा, शाहबाद और भोपाल ने जीतकर सेमी लीग में बनाई जगह, कल बुधवार को रोमांचक मुकाबलों की संभावना । श्रमिक संयुक्त मोर्चा उधमसिंह नगर के कार्यकारी अध्यक्ष दलजीत सिंह पर गुंडा एक्ट की कार्यवाही के खिलाफ कई संगठनों ने पुलिस महानिरीक्षक कुमांऊ को ज्ञापन सौंपा,कुमाऊं आयुक्त के समक्ष भी रखा पक्ष । सरकारी नौकरी का सुनहरा मौका -: यू के एस एस एस सी, ने जारी की 398 पदों के लिए विज्ञप्ति ।

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  • नैना पीक की वन चौकी में व्यवसायिक गतिविधियां मिली, सालसा के सदस्य सचिव प्रदीप मणि ने डी एफ ओ नैनीताल को पत्र लिखकर मामले की जांचकर कार्रवाई करने को कहा,
    नैनीताल । उत्तराखण्ड राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण (सालसा) के सदस्य-सचिव प्रदीप कुमार मणि (एच.जे.एस) ने नैनीताल के प्रसिद्ध और पारिस्थितिक रूप से बेहद संवेदनशील क्षेत्र चाइना  नैना पीक पर स्थित वन चौकी के भीतर चल रही अवैध व्यावसायिक गतिविधियों पर गहरी चिंता व्यक्त की है। उन्होंने डी एफ ओ नैनीताल को पत्र लिखकर इस मामले की तत्काल जांच कर  आवश्यक कार्यवाई करने को कहा है ।
     डीएफओ नैनीताल को भेजे गए एक आधिकारिक पत्र में सदस्य-सचिव ने बताया कि 14 जून 2026 को ट्रैकिंग के दौरान उन्होंने खुद देखा कि वन चौकी पर तैनात एक वन रक्षक वहां मैगी, प्लास्टिक की बोतलों में बंद पानी, कोल्ड ड्रिंक्स और बिस्कुट जैसी चीजें बेच रहा था। पूछताछ करने पर वन रक्षक ने दावा किया कि उसके पास इसकी आधिकारिक अनुमति है, जिसके बाद प्राधिकरण ने मामले की कानूनी और विभागीय जांच के आदेश दिए हैं।
    ​इस मामले पर कड़ा रुख अपनाते हुए प्राधिकरण ने स्पष्ट किया है कि ऐसे संवेदनशील वन क्षेत्रों में पैकेज्ड उत्पादों की बिक्री से भारी मात्रा में प्लास्टिक और गैर-बायोडिग्रेडेबल (नष्ट न होने वाला) कचरा जमा हो रहा है। इससे पर्यावरण को नुकसान पहुंच रहा है और यहां के नाजुक पारिस्थितिकी तंत्र के बिगड़ने का खतरा बढ़ गया है। पत्र में जोर देकर कहा गया है कि वन विभाग की प्राथमिक जिम्मेदारी वनों की रक्षा करना, जैव विविधता का संरक्षण करना और पर्यावरण को किसी भी प्रकार के नुकसान से बचाना है। ऐसे में वन चौकी के भीतर बिना किसी ठोस कानूनी आधार और उचित नियमों के इस तरह की व्यावसायिक गतिविधियां चलना बेहद गंभीर विषय है।
    ​उत्तराखण्ड राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण ने डीएफओ से इस पूरे मामले की तत्काल और निष्पक्ष जांच करने की मांग की है। सदस्य-सचिव प्रदीप कुमार मणि ने पत्र में कहा है कि यदि वन रक्षक को ऐसी कोई अनुमति दी गई है, तो उसके कानूनी आधार और वन नियमों के साथ उसकी अनुकूलता की जांच की जाए; और यदि कोई अनुमति नहीं है, तो दोषी के खिलाफ सख्त अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाए। प्राधिकरण ने नैनीताल के इन संवेदनशील वन क्षेत्रों को प्रदूषण और कचरे से मुक्त रखने के लिए निगरानी तंत्र को मजबूत करने के निर्देश दिए हैं। इस आदेश की प्रतियां उचित कार्रवाई के लिए उत्तराखंड के प्रमुख वन संरक्षक और मुख्य वन्यजीव प्रतिपालक को भी भेजी गई हैं।

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    नैनीताल । उत्तराखण्ड राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण (सालसा) के सदस्य-सचिव प्रदीप कुमार मणि (एच.जे.एस) ने नैनीताल के प्रसिद्ध और पारिस्थितिक रूप से बेहद संवेदनशील क्षेत्र चाइना  नैना पीक पर स्थित वन चौकी के भीतर चल रही अवैध व्यावसायिक गतिविधियों पर गहरी चिंता व्यक्त की है। उन्होंने डी एफ ओ नैनीताल को पत्र लिखकर इस मामले की तत्काल जांच कर  आवश्यक कार्यवाई करने को कहा है ।
     डीएफओ नैनीताल को भेजे गए एक आधिकारिक पत्र में सदस्य-सचिव ने बताया कि 14 जून 2026 को ट्रैकिंग के दौरान उन्होंने खुद देखा कि वन चौकी पर तैनात एक वन रक्षक वहां मैगी, प्लास्टिक की बोतलों में बंद पानी, कोल्ड ड्रिंक्स और बिस्कुट जैसी चीजें बेच रहा था। पूछताछ करने पर वन रक्षक ने दावा किया कि उसके पास इसकी आधिकारिक अनुमति है, जिसके बाद प्राधिकरण ने मामले की कानूनी और विभागीय जांच के आदेश दिए हैं।
    ​इस मामले पर कड़ा रुख अपनाते हुए प्राधिकरण ने स्पष्ट किया है कि ऐसे संवेदनशील वन क्षेत्रों में पैकेज्ड उत्पादों की बिक्री से भारी मात्रा में प्लास्टिक और गैर-बायोडिग्रेडेबल (नष्ट न होने वाला) कचरा जमा हो रहा है। इससे पर्यावरण को नुकसान पहुंच रहा है और यहां के नाजुक पारिस्थितिकी तंत्र के बिगड़ने का खतरा बढ़ गया है। पत्र में जोर देकर कहा गया है कि वन विभाग की प्राथमिक जिम्मेदारी वनों की रक्षा करना, जैव विविधता का संरक्षण करना और पर्यावरण को किसी भी प्रकार के नुकसान से बचाना है। ऐसे में वन चौकी के भीतर बिना किसी ठोस कानूनी आधार और उचित नियमों के इस तरह की व्यावसायिक गतिविधियां चलना बेहद गंभीर विषय है।
    ​उत्तराखण्ड राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण ने डीएफओ से इस पूरे मामले की तत्काल और निष्पक्ष जांच करने की मांग की है। सदस्य-सचिव प्रदीप कुमार मणि ने पत्र में कहा है कि यदि वन रक्षक को ऐसी कोई अनुमति दी गई है, तो उसके कानूनी आधार और वन नियमों के साथ उसकी अनुकूलता की जांच की जाए; और यदि कोई अनुमति नहीं है, तो दोषी के खिलाफ सख्त अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाए। प्राधिकरण ने नैनीताल के इन संवेदनशील वन क्षेत्रों को प्रदूषण और कचरे से मुक्त रखने के लिए निगरानी तंत्र को मजबूत करने के निर्देश दिए हैं। इस आदेश की प्रतियां उचित कार्रवाई के लिए उत्तराखंड के प्रमुख वन संरक्षक और मुख्य वन्यजीव प्रतिपालक को भी भेजी गई हैं।

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