नैनीताल। शहर के ब्रिटिश कालीन रैमजे  अस्पताल में अप्रैल माह से डायलिसिस यूनिट शुरू होने जा रही है। इसके लिए रैमजे अस्पताल में डायलिसिस सेंटर तैयार किया जा रहा है, जिससे स्थानीय मरीजों को हल्द्वानी और अन्य शहरों मैं इलाज के लिए नहीं जाना पड़ेगा उनका इलाज यही हो पाएगा
रैमजे अस्पताल में बनने वाला यह नैनीताल का पहला डायलिसिस सेंटर है, जिसे सामाजिक संस्था हंस फाउंडेशन के सहयोग से स्थापित किया जा रहा है। इससे नैनीताल शहर समेत आसपास के दुर्गम इलाकों के मरीजों को भी राहत मिलेगी और उन्हें जांच के लिए निजी अस्पतालों का रुख नहीं करना पड़ेगा रैमजे अस्पताल में इसके लिए तीन डायलिसिस मशीन आ चुकी हैं। जिनका इंस्टालेशन किया जाना है। इसके लिए ऑपरेटर भी नियुक्त किये जा रहे हैं। आपको बता दे इसे सामाजिक संस्था हंस फाउंडेशन के सहयोग से स्थापित किया जा रहा है। मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉक्टर भागीरथी जोशी ने बताया कि हंस फाउंडेशन उत्तराखंड के सभी 13 जिलों में ऐसी डायलिसिस यूनिट बना रहा है जिसका मकसद दुर्गम इलाकों के मरीजों को राहत पहुंचाना है जिससे उन्हें लाभ मिले। बताया कि अभी नैनीताल शहर में डायलिसिस की सुविधा न होने के कारण किडनी के रोगियों को काफी परेशानियों का सामना करना पड़ता है। उन्हें उपचार के लिए हल्द्वानी जाना पड़ता है। डायलिसिस की सुविधा यहीं होने से स्थानी मरीजों को राहत मिलेगी।
इसके लिए अंतिम तैयारियां चल रही हैं। एक डॉक्टर और टेक्नीशियन की भी नियुक्ति की जा चुकी है। साथ ही अन्य स्टाफ की भी नियुक्ति जल्द की जाएगी। बताया कि अप्रैल माह से डायलिसिस यूनिट  शुरू करने की उम्मीद है।

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