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देहरादून । उत्तराखण्ड विश्वविद्यालय महाविद्यालय प्रयोगशाला कर्मी संघ ने प्रदेश के 46 महाविद्यालयों में एन०ई०पी०-2020 के तहत प्रयोगशालाओं के लिए नवीन आधुनिक उपकरणों के लिए रू0 5.30 करोड की धनराशि की स्वीकृति पर सरकार का आभार जताया। साथ ही सवाल उठाया कि इन अत्याधुनिक उपकरणों का संचालन, रख-रखाव तथा प्रायोगिक कार्यों हेतु इनका स्थापना आदि का कार्य कौन करेगा। क्योकि प्रदेश सरकार प्रयोगशालाओं में कार्यरत प्रयोगशाला सहायक संवर्ग कार्मिकों की उपयोगिता को सरासर नकार रही है।
संघ के अध्यक्ष गजेन्द्र कुमार सिंह ने जानकारी दी कि प्रयोगशाला सहायक संवर्ग कार्मिक पिछले कई वर्षों से चार सोपान का पदोन्नति ढाँचा पुर्नगठित करने की मांग कर रहे हैं लेकिन सरकार द्वारा उनके कार्य दायित्व तथा उपयोगिता को दर किनार करते हुए उन्हें केवल एक पद का पदोन्नति सोपान देने पर अड़ी हुई है। उनका कहना है कि प्रयोगशाला सहायक संवर्ग के कार्मिकों का प्रयोगशालाओं में इतर कार्य भी लिए जाते हैं, जिससे इनका सही मूल्यांकन नहीं हो रहा है।
श्री सिंह का कहना है कि प्रयोगशालाओं में अगर प्रयोगशाला सहायक अपना दायित्व सही तरीके से नहीं निभाते हैं तो उसके लिए कौन जिम्मेदार है। प्रयोगशालाओं का कार्य संचालन सुचारू रूप से हो उसकी व्यवस्था का उत्तरदायित्व अधिकारियों का है। क्यों नहीं वे प्रयोगशाला सहायक संवर्ग कार्मिकों का कार्य दायित्व निर्धारित करते हैं। जब तक प्रयोगशाला सहायक संवर्ग कार्मिकों का उत्तरदायित्वों का सही निर्धारण नहीं किया जाता तथा उसी अनुरूप प्रयोगशाला सहायक संवर्ग कार्मिकों को पदोन्नति सोपान का लाभ स्वीकृत नहीं किया जाता तब तक प्रयोगशालाओं के नवीनीकरण का कोई औचित्य नहीं है।
संघ ने यह भी अवगत कराया कि प्रयोगशाला सहायक संवर्ग कार्मिकों को इन प्रयोगशालाओं में यंत्रों का संचालन, रख-रखाव के साथ प्रायोगिक कार्यों में शिक्षक के साथ छात्रों का सहयोग करना है। नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति के तहत इन प्रयोगशालाओं का आधुनिकीकरण हो रहा है। इससे इनके कार्य दायित्व में वृद्धि हो रही है ऐसे में इनकी उपयोगिता को नकराना न्यायसंगत नहीं है इसलिये प्रयोगशाला सहायक संवर्ग कार्मिकों को पदोन्नति के चार सोपान भी अनुमन्य किये जायें तभी प्रयोगशालाओं में स्थापित नये उपकरणों की उपयोगिता सिद्ध हो सकती है।

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