मार्गशीर्ष मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी को मोक्षदा एकादशी के नाम से जाना जाता है। इस दिन गीता जयंती भी मनाई जाती है। इस बार दिनांक 1 दिसंबर 2025 दिन सोमवार को गीता जयंती या मोक्षदा एकादशी व्रत मनाया जाएगा।

*शुभ मुहूर्त-:*
इस दिन यदि एकादशी तिथि की बात करें तो 30 घड़ी 20 पल अर्थात शाम 7:01 बजे तक एकादशी तिथि रहेगी। यदि नक्षत्र की बात करें तो रेवती नक्षत्र 41 घड़ी दो पल अर्थात मध्य रात्रि 11:18 बजे तक यह नक्षत्र रहेगा। इस दिन वणिज नामक करण तीन घड़ी 37 पल अर्थात प्रातः 8:20 बजे तक है। सबसे महत्वपूर्ण यदि इस दिन के चंद्रमा की स्थिति को जानें तो इस दिन चंद्र देव मध्य रात्रि 11:18 बजे तक मीन राशि में विराजमान रहेंगे।

*महत्व -:*
श्रीमद्भगवत गीता में जीवन को किस प्रकार से सफल बनाया जाए इस संबंध में कई श्लोक लिखे हैं। उदाहरण अर्थ द्वितीय अध्याय के 47वें श्लोक में कहा गया है-
*कर्मण्येवाधिकारस्ते मा फलेषु कदाचन्।*
*मा कर्मफलहेतुर्भूमार्ते संगोअ्स्त्वकर्मणि।।*
अर्थात श्री कृष्ण कहते हैं तेरा कर्म करने में ही अधिकार है उसके फलों में कभी नहीं। इसलिए तू कर्मों के फल का हेतु मत हो तथा तेरी कर्म न करने में भी आसक्ति ना हो।
इसके अतिरिक्त दूसरे अध्याय के 63वें श्लोक में क्रोध के संबंध में लिखा है-
*क्रोधाद्भवति सम्मोह:सम्मोहात्स्मृतिविभ्रम:।*
*स्मृतिभ्रंशाद् बुद्धिनाशो बुद्धिनाशात्प्रणश्ति।।*
अर्थात क्रोध से अत्यंत मूंढभाव उत्पन्न हो जाता है मूढभाव से स्मृति में भ्रम हो जाता है भ्रम हो जाने से बुद्धि अर्थात ज्ञान शक्ति का नाश हो जाता है और बुद्धि का नाश हो जाने से जीव स्वत: ही नष्ट हो जाता है।

 

पुराण, महाभारत, रामायण या स्मृतियां नहीं बल्कि हिन्दू धर्म के प्रमुख धर्मग्रंथ चार वेद हैं। वेदों का सार उपनिषद हैं, अर्थात वेदांत । उपनिषदों का सार गीता है। महाभारत में श्रीकृष्ण ने जो गीता का उपदेश दिया था वह वेदों पर ही आधारित है। महाभारत को पंचम वेद भी कहा गया है। आइए जानते हैं श्रीमद्भागवत गीता के बारे में सबकुछ।
*उपनिषदों का सार है गीता:-* गीता की गणना
उपनिषदों में की जाती है। इसीलिये इसे गीतोपनिषद् भी कहा जाता है। दरअसल, यह महाभारत के भीष्म पर्व का हिस्सा है। महाभारत में ही कुछ स्थानों पर उसका हरिगीता नाम से उल्लेख हुआ है। (शान्ति पर्व के अध्याय 346.10, और अध्याय 348.8 व 53)। वेदों का सार अर्थात संक्षिप्त रूप है उपनिषद्ध और उपनिषदों का सार है गीता। गीता सभी हिन्दू ग्रंथों का निचोड़ और सारतत्व है इसीलिए यह सर्वमान्य हिन्दू धर्मग्रंथ है। सीधे शब्दों में इसे वेद और उपनिषदों का पॉकेट संस्करण भी कह सकते हैं। उल्लेखनीय है कि पुराण, स्मृतियां, महाभारत और रामायण हिन्दुओं के इतिहास और नीति ग्रंथ है धर्मग्रंथ नहीं।

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*कब हुए थे श्रीकृष्ण? -:* 3112 ईसा पूर्व
भगवान श्रीकृष्ण का जन्म हुआ था। कलियुग का आरंभ शक संवत से 3176 वर्ष पूर्व की चैत्र शुक्ल एकम (प्रतिपदा) को हुआ था। वर्तमान में 1947 शक संवत है।
*कब हुआ था महाभारत का युद्ध?-:*
आर्यभट्ट के अनुसार महाभारत युद्ध द्वापरयुग में 3137 ईशा पूर्व में हुआ। इस युद्ध के 35 वर्ष पश्चात भगवान कृष्ण ने देह छोड़ दी थी तभी से कलियुग का आरंभ माना जाता है। उनकी मृत्यु एक बहेलिए का तीर लगने से हुई थी। तब उनकी उम्र 119 वर्ष थी। इसका मतलब यह हुआ की आर्यभट्ट की गणना अनुसार गीता का ज्ञान 5165 वर्ष पूर्व श्रीकृष्ण ने अर्जुन को दिया था। गीता के ज्ञान की इस वर्ष 5165वीं वर्षगांठ मनाई जाएगी।
*धर्मक्षेत्रे कुरुक्षेत्रे समवेता युयुत्सव:।*
*मामका:पाण्डवाश्चैव किमकुर्वत संजय।।*
धृतराष्ट्र संजय से बोलते हैं धर्म भूमि कुरुक्षेत्र में एकत्रित युद्ध की इच्छा वाले मेरे और पांडु के पुत्रों ने क्या किया?
श्रीमद्भगवत गीता का यह पहले अध्याय का पहला श्लोक है। संपूर्ण भागवत गीता में यही एक श्लोक धृतराष्ट्र ने संजय से बोला।

*कहां प्रकट हुआ था गीता का ज्ञान?- :*
हरियाणा के कुरुक्षेत्र में जब यह ज्ञान दिया गया तब तिथि एकादशी थी। संभवतः उस दिन रविवार था। उन्होंने यह ज्ञान लगभग 45 मिनट तक दिया था। परंपरा से यह ज्ञान सबसे पहले विवस्वान् (सूर्य) को मिला था। जिसके पुत्र वैवस्वत मनु थे।

*क्यों दिया था ज्ञान? :-*
श्रीकृष्ण ने गीता का ज्ञान अर्जुन को इसलिये दिया क्योंकि वह कर्त्तव्य पथ से भटककर संन्यासी और वैरागी जैसा आचरण करके युद्ध छोड़ने को आतुर हो गया था वह भी ऐसे समय जब की सेना मैदान में डटी थी। ऐसे में श्रीकृष्ण को उन्हें उनका कर्तव्य निभाने के लिए यह ज्ञान दिया।
*गीता ज्ञान को ओर किस किस ने सुना?- :*
गीता को अर्जुन के अलावा और संजय ने सुना और उन्होंने धृतराष्ट्र को सुनाया। यह ज्ञान हनुमानजी सहित आकाश में स्थित ब्रह्मा, विष्णु, महेश और इंद्रादि अन्य देवताओं ने भी सुना था।

*गीता के श्लोक :-*
गीता में श्रीकृष्ण ने- 574,अर्जुन ने- 85, संजय ने 40 और धृतराष्ट्र ने- 1 श्लोक कहा है। महाभारत के 18 अध्यायों में से 1 भीष्म पर्व का हिस्सा है गीता। गीता में भी कुल 18 अध्याय हैं। 18 अध्यायों की कुल श्लोक संख्या 700 है।
*गीता पर भाष्य :-* गीता एकमात्र ऐसा ग्रंथ है
जिस पर दुनियाभर की भाषा में सबसे ज्यादा भाष्य, टीका, व्याख्या, टिप्पणी, निबंध, शोधग्रंथ आदि लिखे गए हैं। आदि शंकराचार्य,रामानुज, रामानुजाचार्य, मध्वाचार्य, निम्बार्क, भास्कर, वल्लभ, श्रीधर स्वामी, आनन्द गिरि, मधुसूदन सरस्वती, संत ज्ञानेश्वर, बालगंगाधर तिलक, परमहंस योगानंद, महात्मा गांधी, सर्वपल्ली डॉ. राधाकृष्णन, महर्षि अरविन्द घोष, एनी बेसेन्ट, गुरुदत्त, विनोबा भावे, स्वामी चिन्मयानन्द, चैतन्य महाप्रभु, स्वामी नारायण, जयदयाल गोयन्दका, ओशो रजनीश, स्वामी क्रियानन्द, स्वामी रामसुखदास, श्रीराम शर्मा आचार्य आदि सैंकड़ों विद्वानों ने गीता पर भाष्य लिखे या प्रवचन दिए हैं। लेकिन कहते हैं कि ओशो रजनीश ने जो गीता पर प्रवचन दिए हैं वह दुनिया के सर्वश्रेष्ठ प्रवचन हैं।

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गीता में क्या है:- गीता में भक्ति, ज्ञान और कर्म मार्ग की चर्चा की गई है। उसमें यम-नियम और धर्म-कर्म के बारे में भी बताया गया है। गीता ही कहती है कि ब्रह्म (ईश्वर) एक ही है। गीता को बार-बार पढ़ेंगे तो आपके समक्ष इसके ज्ञान का रहस्य खुलता जाएगा। गीता के प्रत्येक शब्द पर एक अलग ग्रंथ लिखा जा सकता है। गीता में सृष्टि उत्पत्ति, जीव विकासक्रम, हिन्दू संदेवाहक क्रम, मानव उत्पत्ति, योग, धर्म, कर्म, ईश्वर, भगवान, देवी, देवता, उपासना, प्रार्थना, यम, नियम, राजनीति, युद्ध, मोक्ष, अंतरिक्ष, आकाश, धरती, संस्कार, वंश, कुल, नीति, अर्थ, पूर्वजन्म, जीवन प्रबंधन, राष्ट्र निर्माण, आत्मा, कर्मसिद्धांत, त्रिगुण की संकल्पना, सभी प्राणियों में मैत्रीभाव आदि सभी की जानकारी है।
गीता के चौथे अध्याय में कृष्णजी कहते हैं कि पूर्व काल में यह योग मैंने विवस्वान को बताया था। विवस्वान ने मनु से कहा। मनु ने इक्ष्वाकु को बताया। यूं पीढ़ी दर पीढ़ी परम्परा से प्राप्त इस ज्ञान को राजर्षियों ने जाना पर कालान्तर में यह योग लुप्त हो गया। और अब उस पुराने योग को ही तुम्हें पुनः बता रहा हूं। परंपरा से यह ज्ञान सबसे पहले विवस्वान् (सूर्य) को मिला था। जिसके पुत्र वैवस्वत मनु थे। वैसे तो गीता श्रीकृष्ण और अर्जुन के बीच हुआ एक संवाद है, लेकिन कहते हैं कि भगवान श्रीकृष्ण के माध्यम से उस कालरूप परम परमेश्वर ने गीता का ज्ञान विश्व को दिया। श्रीकृष्ण उस समय योगारूढ़ थे।
*गीता के 18 अध्याय :-* अर्जुन-विषाद, सांख्य-योग, कर्मयोग, ज्ञान कर्म संन्यास योग, कर्म संन्यास योग, आत्मसंयम योग, ज्ञानविज्ञान योग, अक्षरब्रह्मयोग, राजविद्याराजगुह्य योग, विभूति योग, विश्वरूपदर्शन योग, भक्ति योग, क्षेत्रक्षत्रज्ञविभाग, गुणत्रयविभाग, पुरुषोत्तम योग, दैवासुरसंपद्विभाग योग, श्रद्धात्रयविभाग योग और मोक्ष-संन्यास योग नाम से 18 अध्याय है।

*आलेख -:आचार्य पंडित प्रकाश जोशी गेठिया नैनीताल।*

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