नैनीताल । जिला जज प्रशांत जोशी की अदालत ने हल्द्वानी-काठगोदाम नगर निगम के वार्ड संख्या 9 (तल्ली बमौरी) से पार्षद पद पर निर्वाचित राजेंद्र सिंह जीना के निर्वाचन को तत्काल प्रभाव से शून्य घोषित कर दिया है।
न्यायालय ने यह फैसला उपविजेता प्रत्याशी गिरीश नैनवाल द्वारा दायर चुनाव याचिका (5/2025) पर सुनवाई करते हुए 19 जून 2026 को सुनाया। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि राजेंद्र सिंह जीना ने वर्ष 2024 के स्थानीय निकाय चुनाव के दौरान अपने नामांकन व शपथ पत्र में आपराधिक मामलों की जानकारी जानबूझकर छिपाई थी, जो मतदाताओं के साथ प्रत्यक्ष छल और ‘भ्रष्ट आचरण’ की श्रेणी में आता है।
मामले के अनुसार, भारतीय जनता पार्टी के उम्मीदवार गिरीश नैनवाल ने अदालत में याचिका दायर कर बताया था कि चुनाव के दौरान वह राजेंद्र सिंह जीना से मात्र 65 वोटों के अंतर से हार गए थे। नामांकन के समय जीना के खिलाफ कई आपराधिक मामले लंबित थे और उन्हें आपदा प्रबंधन अधिनियम के तहत एक मामले में कोर्ट से अर्थदंड की सजा भी मिल चुकी थी, लेकिन उन्होंने शपथ पत्र के कॉलम में “नहीं” लिखकर इस सत्य को पूरी तरह से छुपाया। हालांकि, प्रतिवादी पक्ष और राज्य सरकार ने तर्क दिया था कि केवल मुकदमे लंबित होना अयोग्यता का आधार नहीं है, लेकिन कोर्ट ने सर्वोच्च न्यायालय के विभिन्न मार्गदर्शक सिद्धांतों का हवाला देते हुए कहा कि मतदाताओं को अपने उम्मीदवार की पूरी पृष्ठभूमि और आपराधिक इतिहास जानने का मौलिक अधिकार है, जिससे उन्हें वंचित किया गया।
अदालत ने अपने फैसले में जहां एक ओर राजेंद्र सिंह जीना का निर्वाचन रद्द कर दिया, वहीं दूसरी ओर याची गिरीश नैनवाल को सीधे विजयी घोषित करने की मांग को खारिज कर दिया। जिला जज ने अपने आदेश में कहा कि अगर मतदाताओं को सही जानकारी होती, तो वे किसी तीसरे विकल्प को भी चुन सकते थे, इसलिए सीधे किसी को विजयी घोषित करना लोकतांत्रिक नहीं होगा। अदालत ने राज्य निर्वाचन आयोग और जिला प्रशासन को निर्देशित किया है कि आगामी तीन माह के भीतर इस वार्ड में दोबारा चुनाव (उपचुनाव) कराए जाएं। साथ ही कोर्ट ने सख्त रुख अपनाते हुए आदेश दिया है कि भ्रष्ट आचरण के दोषी पाए गए राजेंद्र सिंह जीना इस नए चुनाव में प्रतिभाग नहीं कर सकेंगे।


