नैनीताल । कुमाऊँ विश्वविद्यालय के हिन्दी एवं अन्य भारतीय भाषा विभाग डी. एस. बी.परिसर तथा आई. क्यू.ए.सी. के संयुक्त तत्वावधान में “कुमाउनी का बोलता शब्दकोश विषयक त्रिदिवसीय राष्ट्रीय कार्यशाला यूजीसी. एम एम. टीटीसी बुरांश सभागार में शुरू हो गई है।

कार्यशाला का शुभारंभ एस ई एल लखनऊ की अध्यक्ष प्रो.कविता रस्तोगी, उत्तराखंड मुक्त विश्व विद्यालय के कुलपति प्रो.नवीन चन्द्र लोहनी,कुमाऊं विश्व विद्यालय के कुलपति प्रो.दीवान सिंह रावत ने दीप प्रज्ज्वलन के साथ किया ।
कार्यशाला की संयोजक प्रो० चंद्रकला रावत द्वारा अतिथियों का स्वागत करते हुए कार्यशाला की आवश्यकता और उद्देश्य को स्पष्ट किया गया। उन्होंने कहा इस कार्यशाला में लगभग 1956 शब्दों का ध्वनि – अभिलेखन, अंतरराष्ट्रीय ध्वन्यात्मक वर्णमाला के अनुसार लिप्यंतरण तथा डिजिटल अभिलेखीकरण किया जाएगा, जिससे भावी पीढ़ियों के लिए एक प्रामाणिक बोलता शब्दकोश तैयार किया जा सके। विशिष्ट अतिथि प्रो० नवीन चंद्र लोहनी, कुलपति,उत्तराखण्ड मुक्त विश्वविद्यालय ने कहा कि किसी भी भाषा का संरक्षण तभी सार्थक होगा जब नई पीढ़ी उससे व्यावहारिक रूप से जुड़ सके। मुख्य वक्ता एवं एस ई एल लखनऊ की अध्यक्ष प्रो० कविता रस्तोगी ने संस्था का परिचय देते हुए बताया कि कार्यशाला के दौरान शब्दों की रिकॉर्डिंग, आईपीए के अनुरूप लिप्यंतरण, मेटाडाटा निर्माण और डिजिटल आर्काइविंग की वैज्ञानिक प्रक्रिया अपनाई जाएगी।
परिसर निदेशक प्रो. नीता बोरा शर्मा ने कहा कि कुमाउनी शब्दकोश केवल शब्दों का संग्रह नहीं, बल्कि लोक संस्कृति, लोकज्ञान और जीवन पद्धति का जीवंत दस्तावेज है।
अध्यक्षीय उद्बोधन में कुलपति प्रो.(कर्नल) दीवान एस. रावत ने कहा कि किसी भी भाषा का वैज्ञानिक दस्तावेजीकरण अत्यंत श्रमसाध्य कार्य है। उन्होंने इसे कुमाउनी भाषा के संरक्षण की दिशा में एक ऐतिहासिक पहल बताते हुए आयोजन समिति और एस ई एल की टीम के प्रयासों की सराहना की। उद्घाटन सत्र के अंत में कार्यक्रम का संचालन कर रहीं प्रो. प्रीति आर्या ने सभी अतिथियों, प्रतिभागियों एवं सहयोगियों का आभार व्यक्त किया। द्वितीय व तृतीय सत्र तकनीकी सत्र रहे जिसमें तय रूपरेखा के अनुसार कुमाउनी शब्दावली का आई. पी. ए. में लिप्यंतरण का कार्य प्रारंभ किया गया।
इस अवसर पर प्रो.उमा भट्ट,प्रो. डी एस पोखरिया,प्रो. डी एस बिष्ट सहित कई अन्य प्राध्यापक,स्कूली बच्चे आदि मौजूद रहे ।


