नैनीताल । उत्तराखंड उच्च न्यायालय के न्यायमूर्ति रवींद्र मैथानी और न्यायमूर्ति सिद्धार्थ साह की खंडपीठ ने प्रभात ध्यानी की कथित अवैध हिरासत को लेकर दायर बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका पर सुनवाई करते हुए राज्य सरकार और पुलिस से कड़ा जवाब तलब किया है। बताया गया है कि प्रभात ध्यानी 19 जुलाई को दिल्ली प्रदर्शन में भाग लेने दिल्ली जा रहे थे । तभी उन्हें ऋषिकेश से हिरासत में लिया गया और उनके मोबाइल फोन भी जब्त कर लिए गए ।
याचिकाकर्ता लाल मणि की ओर से अधिवक्ता स्निग्धा तिवारी ने अदालत को बताया कि प्रभात ध्यानी को पहले रेलवे पुलिस और ऋषिकेश पुलिस, और उसके बाद रामनगर पुलिस द्वारा अवैध रूप से हिरासत में रखा गया था। सुनवाई के दौरान ही यह बात सामने आई कि पुलिस ने आनन-फानन में युवक को उसकी मां श्रीमती उमा ध्यानी की सुपुर्दगी में सौंप दिया है।
इस मामले पर कड़ा रुख अपनाते हुए हाईकोर्ट ने सरकारी वकील (ए.जी.ए.) पंकज जोशी को आदेश दिया है कि वे युवक की गिरफ्तारी (हिरासत) और फिर अचानक की गई रिहाई से जुड़े सभी दस्तावेज अदालत के समक्ष रिकॉर्ड पर रखें। अदालत ने बेहद महत्वपूर्ण सवाल उठाते हुए पूछा कि जब प्रभात ध्यानी एक बालिग (वयस्क) व्यक्ति है, तो उसे सीधे स्वतंत्र करने के बजाय उसकी मां की कस्टडी में क्यों दिया गया? अदालत ने यह भी साफ करने को कहा है कि किस कानून के तहत और किन परिस्थितियों में युवक को हिरासत में लिया गया था। इस मामले की अगली सुनवाई कल यानी 21 जुलाई 2026 को होगी।


