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नैनीताल ।  उत्तराखंड हाईकोर्ट ने भीमताल क्षेत्र में दो महिलाओं व एक युवती को मारने वाले बाघ या गुलदार की पहचान करने के लिये विशेषज्ञ कमेटी गठित करने व भारतीय वन्य जीव संस्थान देहरादून के वैज्ञानिक डॉ. पराग निगम की मदद लेने का निर्देश दिया है। हाईकोर्ट ने साफ किया है कि आदमखोर जानवर की पहचान वैज्ञानिक उपायों से होने व मुख्य वन्य जीव प्रतिपालक की संतुष्टि के बाद उसे आदमखोर घोषित किया जाय । इस मामले में मुख्य वन्य जीव प्रतिपालक व प्रभागीय वनाधिकारी नैनीताल द्वारा गठित टीम द्वारा वन्यजीव (संरक्षण) अधिनियम, 1972 की धारा 11 के तहत कार्रवाई की जाएगी। इस मामले की अगली सुनवाई 28 दिसम्बर को होगी । मामले की सुनवाई न्यायमूर्ति शरद कुमार शर्मा व न्यायमूर्ति पंकज पुरोहित की खण्डपीठ में हुई ।
  मामले के अनुसार पिनरौ व मलुवाताल में दो महिलाओं को आदमखोर जानवर द्वारा मारने के बाद उसे वन विभाग द्वारा आदमखोर घोषित करने का हाईकोर्ट ने स्वतः संज्ञान लिया था । हाईकोर्ट ने इसे जनहित याचिका के रूप में सुनवाई के लिये पंजीकृत करते हुए पिछली सुनवाई में इस जानवर को नरभक्षी घोषित कर उसे मारने के निर्णय पर सवाल उठाए थे । कोर्ट ने कहा था कि अभी तक यह पता नहीं है कि नरभक्षी बाघ है या गुलदार, तब किस जानवर को नरभक्षी घोषित किया गया है।  इसके अलावा यदि उसकी पहचान हो जाती है तो उसे पहले क्षेत्र से भगाया जाए, दूसरा उसे ट्रेंकुलाइज कर रेस्क्यू किया जाए । जबकि उसे मारना अंतिम विकल्प हो ।
इस मामले की सुनवाई के दौरान गुरुवार को मुख्य वन्य जीव प्रतिपालक डॉ. धनन्जय मोहन कोर्ट में पेश हुए थे । लेकिन कोर्ट उनके द्वारा पेश किए गए शपथ पत्र से संतुष्ट नहीं थी ।

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