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(माधव पालीवाल)नैनीताल । उत्तराखण्ड हाईकोर्ट के न्यायधीश न्यायमूर्ति नारायण सिंह धानिक आज 35 साल की  न्यायिक सेवा करने के बाद सेवानिवृत्त हो गए। उनकी सेवानिवृत्ति पर गुरुवार को मुख्य न्यायधीश की कोर्ट  में फुल कोर्ट रिफरेंस का आयोजन कर न्यायमूर्ति धानिक की कार्यप्रणाली व व्यवहार की जमकर सराहना की गई तथा कहा गया कि उत्तराखण्ड हाईकोर्ट में उनके व्यवहार की हमेशा सराहना की जाएगी ।

    इस अवसर पर हाईकोर्ट के कार्यवाहक मुख्य न्यायधीश सजंय कुमार मिश्रा, महाधिवक्ता एसएन बाबुलकर, हाई कोर्ट बार एसोसिएशन के निवर्तमान अध्यक्ष अवतार सिंह रावत ने उनके सम्मान में वक्तव्य दिया। रिफरेंस में वरिष्ठ न्यायमूर्ति मनोज कुमार तिवारी, न्यायमूर्ति सरद कुमार शर्मा, न्यायमूर्ति आरसी खुल्बे, न्यायमूर्ति आलोक कुमार वर्मा , रजिस्ट्रार जनरल, मुख्य स्थायी अधिवक्ता चन्द्र शेखर रावत, जीएस संधू, असिस्टेन्ट सॉलिसिटर जनरल राकेश थपलिया सहित अन्य अधिवक्तागण मौजूद रहे। न्यायमूर्ति एनएस धानिक अब पुलिस प्राधिकरण के अध्यक्ष बनाये गए हैं और जल्द ही वे यह कार्यभार ग्रहण करेंगे।

  न्यामूर्ति नारायण सिंह धानिक का जन्म 20 मई 1960 को ग्राम पुभाऊं जैंती जिला अल्मोड़ा (उत्तराखंड) में हुआ । इंटरमीडिएट की शिक्षा सर्वोदय इंटर कॉलेज, जयंती, अल्मोड़ा से की और उसके बाद राजकीय महाविद्यालय, अल्मोड़ा से स्नातक की उपाधि प्राप्त ली। एलएलबी लखनऊ विश्वविद्यालय से किया और वर्ष 1985 में पीसीएस (जे) में शामिल हुए और पहली पोस्टिंग पीलीभीत (उत्तर प्रदेश) में मुंसिफ के रूप में हुई। 9 नवंबर 2000 को उत्तराखंड राज्य के अलग होने के बाद उन्होंने उत्तराखंड कैडर चुना और वे रुद्रप्रयाग, बागेश्वर, नैनीताल, हरिद्वार और देहरादून जिलों में जिला न्यायाधीश के रूप में तैनात रहे। वे लोकायुक्त के सचिव के साथ-साथ उत्तराखंड राज्य के राज्यपाल के कानूनी सलाहकार भी रहे। 3 दिसंबर, 2018 को वे उत्तराखंड उच्च न्यायालय के स्थायी न्यायाधीश नियुक्त हुए।

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