आतंकवादियों की तलाश में भारतीय सेना द्वारा चलाए जा रहे विशेष सर्च अभियान ‘ऑपरेशन शेरूवाली’ के दौरान अल्मोड़ा के युवा सैन्य अधिकारी लेफ्टिनेंट बीरेश्वर गोस्वामी वीरगति को प्राप्त हो गए। मात्र 24 वर्ष की आयु में मातृभूमि की रक्षा करते हुए उनका बलिदान पूरे प्रदेश के लिए गर्व और पीड़ा का विषय बन गया है।
सेना से मिली जानकारी के अनुसार राजौरी के दुर्गम और संवेदनशील पर्वतीय क्षेत्र में आतंकवादियों की तलाश के लिए विशेष अभियान चलाया जा रहा था। इसी दौरान अभियान का नेतृत्व कर रहे लेफ्टिनेंट बीरेश्वर गोस्वामी कठिन पहाड़ी इलाके में गहरी खाई में फिसल गए। हादसे में उन्हें गंभीर चोटें आईं। साथी जवानों ने उन्हें बचाने के लिए हरसंभव प्रयास किए, लेकिन वह देश की सेवा करते हुए वीरगति को प्राप्त हो गए।
लेफ्टिनेंट बीरेश्वर गोस्वामी मूल रूप से अल्मोड़ा जिले के बगवालीपोखर क्षेत्र के निवासी थे। उनका परिवार वर्तमान में पांडेखोला में रहता है। बचपन से ही मेधावी और अनुशासित रहे बीरेश्वर का सपना भारतीय सेना में अधिकारी बनकर देश सेवा करना था। अपनी मेहनत और लगन के बल पर उन्होंने यह सपना पूरा किया और कम उम्र में ही भारतीय सेना में अधिकारी बने।
परिजनों और परिचितों के अनुसार बीरेश्वर हमेशा राष्ट्र सेवा को सर्वोच्च प्राथमिकता देते थे। उनके व्यक्तित्व में विनम्रता, साहस और नेतृत्व क्षमता का अद्भुत समन्वय था। यही कारण था कि वह अपने साथियों और वरिष्ठ अधिकारियों के बीच भी बेहद लोकप्रिय थे।
जैसे ही उनके बलिदान की सूचना अल्मोड़ा पहुंची, परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा। माता-पिता, रिश्तेदारों और शुभचिंतकों का रो-रोकर बुरा हाल है। वहीं बगवालीपोखर, पांडेखोला और आसपास के क्षेत्रों में शोक की लहरज दौड़ गई। स्थानीय लोगों ने इसे पूरे उत्तराखंड के लिए अपूरणीय क्षति बताया है।


