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अल्मोड़ा। आगामी विधानसभा चुनाव 2027 को ध्यान में रखते हुए राज्य की वैकल्पिक राजनीतिक शक्तियों को एकजुट करने के उद्देश्य से “मिशन 2027” के अंतर्गत एक महत्वपूर्ण बैठक का आयोजन किया गया। यह बैठक होटल शिखर में आयोजित हुई, जो लगभग पाँच घंटे तक चली। बैठक में विभिन्न राजनीतिक दलों, सामाजिक संगठनों और जनपक्षीय आंदोलनों से जुड़े प्रतिनिधियों ने भाग लिया।

बैठक में वक्ताओं ने एक स्वर में कहा कि राज्य गठन के 25 वर्षों बाद भी उत्तराखंड अपने मूल उद्देश्यों और शहीदों के सपनों को पूरा करने में असफल रहा है। इस स्थिति के लिए अब तक सत्ता में रही भाजपा, कांग्रेस और अन्य दल जिम्मेदार हैं, जिन्होंने राज्य के संसाधनों और जनभावनाओं के साथ न्याय नहीं किया। वक्ताओं ने स्पष्ट किया कि अब जनता के भीतर गहरी हताशा, निराशा और आक्रोश है, और वह एक मजबूत, ईमानदार और जनपक्षीय विकल्प की तलाश में है।

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बैठक में यह निर्णय लिया गया कि राज्य की जनपक्षीय, लोकतांत्रिक और क्षेत्रीय शक्तियों को एक साझा मंच पर लाकर एक सशक्त विकल्प तैयार किया जाएगा, जो उत्तराखंड की मूल अवधारणा—रोजगार, पलायन रोकने, जल-जंगल-जमीन की रक्षा और क्षेत्रीय अस्मिता—को केंद्र में रखकर आगे बढ़ेगा।

इस दौरान उत्तराखंड परिवर्तन पार्टी, उत्तराखंड स्वाभिमान मोर्चा, हिमालय क्रांति पार्टी, लोक जिम्मेदार पार्टी, उत्तराखंड लोक वाहिनी तथा विभिन्न सामाजिक संगठनों और प्रबुद्ध नागरिकों के प्रतिनिधियों ने अपने विचार रखे और एकजुट होकर आगे बढ़ने की प्रतिबद्धता जताई। बैठक का संयोजन प्रभात ध्यानी (उपपा) व संचालन चारु तिवारी द्वारा किया गया।

 

बैठक में प्रमुख रूप से राजीव लोचन साह (उत्तराखंड लोक वाहिनी), पी.सी. तिवारी (अध्यक्ष, उत्तराखंड परिवर्तन पार्टी), भूपेन्द्र कोरंगा (उत्तराखण्ड स्वाभिमान मोर्चा) प्रकाश जोशी, नरेश नौटियाल, दिनेश उपाध्याय, मोहन कांडपाल (पानी बोओ, पानी बचाओ), जे.सी. उप्रेती (लोक जिम्मेदार पार्टी), सुरेश नौटियाल (इंडिया ग्रीन्स पार्टी), आर.पी. सिंह, जगदीश चंद्र मैनानी (पूर्व नौसेना), हेम चंद्र जोशी (पूर्व नौसेना), गोपाल राम, किरन आर्या, पूजा थापा, शिव दत्त पांडे, कौस्तुबानंद भट्ट, रमेश पांडे (कृषक), उमेद सिंह भंडारी, किशोर सिंह, प्रेम, हिमेश भंडारी, नारायण राम, मुहम्मद साकिब, अमन बुधानी, मनोज कुमार पंत, त्रिभुवन सिंह, किशन जोशी (पत्रकार), गोविन्द पंत ‘राजू’ (पत्रकार), शंभू राणा सहित अनेक साथियों की उपस्थिति रही।

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बैठक में यह भी तय किया गया कि आने वाले समय में इस पहल को गांव-गांव और जन-जन तक ले जाया जाएगा, ताकि एक व्यापक जनआधारित राजनीतिक विकल्प खड़ा किया जा सके। सभी संगठनों ने साझा रूप से यह संकल्प लिया कि वे उत्तराखंड के भविष्य के लिए एक ईमानदार, पारदर्शी और जवाबदेह राजनीतिक संस्कृति का निर्माण करेंगे।

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