नैनीताल। भवाली व्यापार मंडल के अध्यक्ष नरेश पांडे के खिलाफ दर्ज यौन शोषण के मामले में मल्लीताल पुलिस ने शिकायतकर्ता और पीड़िता युवती को ही आरोपी बनाते हुए रिमांड पर लेने के लिए शुक्रवार को अपर मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट की अदालत में ले गई जिसे अदालत ने नामंजूर कर दिया। पुलिस ने इस युवती पर भी बी.एन.एस. की धारा 63 लगाई थी, जो पुरुष द्वारा किए जाने वाले दुराचार से संबंधी है । जिस पर अदालत ने युवती की रिमांड नामंजूर करते हुए उसे निजी मुचलके पर रिहा कर दिया । इस प्रकरण से पुलिस की जमकर किरकिरी हुई है ।
पुलिस का आरोप है कि युवती ने मुख्य आरोपी नरेश पांडे के साथ मिलकर अन्य महिलाओं को उसके संपर्क में लाने और शारीरिक संबंध स्थापित कराने में भूमिका निभाई। हालांकि, अदालत ने पुलिस की इस दलील को खारिज करते हुए युवती की रिमांड अर्जी नामंजूर कर दी और उसे जमानत पर रिहा करने के आदेश जारी कर दिए।
सुनवाई के दौरान अदालत ने मामले के कानूनी पहलुओं और भारतीय न्याय संहिता की धारा 63 की परिभाषा का विशेष संज्ञान लिया। कोर्ट ने प्रथम दृष्टया माना कि इस धारा के तहत केवल एक महिला द्वारा ऐसा अपराध कारित होना संभव नहीं है, क्योंकि इसमें अपराध की व्याख्या पुरुष द्वारा किए गए कृत्य के संदर्भ में की गई है। इसके साथ ही, अदालत ने सुप्रीम कोर्ट के ‘सत्येंद्र कुमार अंतिल’ फैसले का हवाला देते हुए स्पष्ट किया कि सात वर्ष तक की सजा वाले मामलों में गिरफ्तारी अंतिम विकल्प होनी चाहिए। चूंकि युवती स्थानीय निवासी है और पुलिस रिमांड के समर्थन में कोई ठोस साक्ष्य पेश नहीं कर सकी, इसलिए उसे राहत दी गई।
गौरतलब है कि यह पूरा मामला नैनीताल के एक शिक्षण संस्थान की छात्रा द्वारा भवाली व्यापार मंडल के अध्यक्ष नरेश पांडे पर यौन शोषण करने, जबरन गर्भपात कराने और धमकी देने के गंभीर आरोपों के बाद शुरू हुआ था। बाद में यह युवती अपने आरोपों से मुकर गई । लेकिन मुकदमा अभी भी मल्लीताल कोतवाली में पंजीकृत है । इस मामले में
जिला न्यायालय और उत्तराखंड हाईकोर्ट से अग्रिम जमानत याचिका खारिज होने के बाद भी नरेश पांडे को गिरफ्तार नहीं किया जा सका था। इसी बीच एक अन्य युवती की शिकायत पर कार्रवाई करते हुए पुलिस ने मंगलवार देर रात नरेश पांडे को गिरफ्तार कर लिया, जिसके बाद अदालत ने उसे 14 दिन की न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया है।


