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भीमताल। भीमताल ब्लॉक के सूर्यागांव में उस वक्त मातम और दहशत फैल गई, जब एक आदमखोर गुलदार ने घास काटने गई महिला को मौत के घाट उतार दिया। घटना की सूचना के बाद वन विभाग वी राजस्व विभाग की टीम गांव पहुंची है ।  साथ ही शव का पंचनामा भरकर पोस्टमार्टम की के लिए भेजा गया है साथ ही पीड़ित परिवार को मुआवजा देने की कार्रवाई की जा रही है ।

 

सूर्यागांव  निवासी लाल सिंह सूर्या की पत्नी हंसी देवी रोजमर्रा की तरह शुक्रवार की दोपहर को अपने घर के समीपवर्ती जंगलों में मवेशियों के लिए चारा लेने गई थीं। सूरज ढलने को था और आसमान में लालिमा छाने लगी थी, लेकिन सायं  तक घर नहीं पहुंचीं, तो परिजनों के मन में किसी अनहोनी की आशंका घर करने लगी। गाँव वालों और परिवार के सदस्यों ने टॉर्च की रोशनी में जंगल की खाक छानी । काफी खोजबीन और शोर-शराबे के बाद देर रात झाड़ियों के पीछे हंसी देवी का लहूलुहान क्षत-विक्षत अवस्था में पड़ा हुआ था, जो इस बात का गवाह था कि गुलदार ने घात लगाकर उन पर जानलेवा हमला किया था।

 

घटना की सूचना मिलते ही पूरे क्षेत्र में शोक की लहर दौड़ गई और स्थानीय जनप्रतिनिधि भी इस दुखद घड़ी में पीड़ित परिवार के साथ खड़े नजर आए।

 

ब्लॉक प्रमुख भीमताल डॉ. हरीश सिंह बिष्ट ने इस हृदयविदारक घटना पर अपना गहरा शोक प्रकट किया है और पीड़ित परिवार को सांत्वना देने के साथ-साथ सरकार और शासन से त्वरित न्याय की गुहार लगाई है। डॉ. हरीश सिंह बिष्ट ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि  महिला की जान चली जाना न केवल परिवार के लिए अपूरणीय क्षति है, बल्कि यह पूरे समाज के लिए सुरक्षा की विफलता है।

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उन्होंने मौके की गंभीरता को समझते हुए वन विभाग के उच्चाधिकारियों से संपर्क साधा और मृतक हंसी देवी के परिजनों को बिना किसी विलंब के उचित मुआवजा धनराशि उनके खाते में प्रदान किया जाए। उनका कहना था कि केवल मुआवजे से जिंदगी वापस नहीं आती, लेकिन इस संकट की घड़ी में परिवार को आर्थिक संबल देना शासन की पहली जिम्मेदारी है।

ग्रामीणों का गुस्सा सातवें आसमान पर है क्योंकि भीमताल क्षेत्र में गुलदार के हमले थमने का नाम नहीं ले रहे हैं। इससे पहले भी इसी साल तीन फरवरी को भीमताल के मुख्य इलाके के पास एक अन्य महिला को गुलदार ने अपना शिकार बनाया था, जिसने पूरे क्षेत्र को हिलाकर रख दिया था। उस घटना के बाद भी वन विभाग ने केवल कागजी खाना पूर्ति की और क्षेत्र में गश्त बढ़ाने के खोखले वादे किए थे, लेकिन धरातल पर सुरक्षा का कोई पुख्ता इंतजाम नजर नहीं आया। सूर्यागांव के निवासियों का आरोप है कि वन विभाग के कर्मचारी केवल घटनाओं के बाद औपचारिकता निभाने आते हैं, जबकि आदमखोर गुलदार खुलेआम बस्तियों के पास घूम रहे हैं ।

ग्रामीणों का कहना है कि यदि पिछली घटनाओं से सबक लेकर विभाग ने क्षेत्र में पिंजरा लगाया होता या प्रभावी गश्त की होती, तो आज हंसी देवी अपने परिवार के बीच जीवित होती।

वन विभाग के खिलाफ लोगों का यह आक्रोश अब एक बड़े आंदोलन की शक्ल लेता जा रहा है। सूर्यागांव और आसपास के गांवों के लोगों का कहना है कि वे अब विभाग की किसी भी बात में नहीं आने वाले हैं। ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि जब तक उस खूनी गुलदार को पकड़ने के लिए पुख्ता कार्रवाई नहीं की जाती और क्षेत्र को गुलदार मुक्त नहीं घोषित किया जाता, तब तक उनका संघर्ष जारी रहेगा।

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महिलाओं में विशेष रूप से भय का माहौल है क्योंकि घर के काम और मवेशियों की देखभाल के लिए उन्हें जंगलों पर निर्भर रहना पड़ता है। विभाग के पास न तो आधुनिक संसाधन हैं और न ही इच्छाशक्ति, जिसके कारण वन्यजीवों के हमले बढ़ते जा रहे हैं। लोगों का सवाल है कि क्या प्रशासन और विभाग किसी और बड़ी अनहोनी का इंतजार कर रहे हैं या फिर इंसानी जान की कीमत उनकी नजरों में कुछ भी नहीं है।

इस दुखद घटना ने भीमताल के पर्यटन और स्थानीय जनजीवन पर भी प्रतिकूल प्रभाव डाला है। डॉ. हरीश सिंह बिष्ट ने अपनी संवेदनाओं में यह भी जोड़ा कि वन विभाग को तत्काल प्रभाव से सूर्यागांव और आसपास के संवेदनशील इलाकों में शूटर तैनात करने चाहिए या फिर पिंजरे लगाकर इस खूंखार जानवर को कैद करना चाहिए। उन्होंने मुख्यमंत्री और वन मंत्री से भी इस मामले मे सख्त रुख अपनाने की अपील की है ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो। हंसी देवी की मौत ने एक बार फिर से मानव-वन्यजीव संघर्ष की उस कड़वी सच्चाई को उजागर किया है, जिसमें हमेशा गरीब पहाड़ी ग्रामीण ही पिसता है। पीड़ित पति लाल सिंह सूर्या और उनके बच्चों का रो-रोकर बुरा हाल है, उनकी दुनिया उजड़ चुकी है और उनके पास अब केवल यादें और न्याय की उम्मीद बची है।

डॉ. हरीश बिष्ट ने दोहराया कि वे इस न्याय की लड़ाई में ग्रामीणों के साथ हैं जब तक ठोस कार्रवाई नहीं होती।

 

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