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नैनीताल । दुराचार व पॉक्सो के लंबित वादों के शीघ्र निस्तारण के लिए उच्च न्यायालय, उत्तराखण्ड के आदेशों के क्रम में नैनीताल मुख्यालय में एक अतिरिक्त फास्ट ट्रैक स्पेशल कोर्ट  का गठन किया गया है। इस नए न्यायालय में अभियोजन पक्ष की ओर से प्रभावी पैरवी सुनिश्चित करने के लिए जिला मजिस्ट्रेट ललित मोहन रयाल द्वारा जिला शासकीय अधिवक्ता फौजदारी सुशील शर्मा को स्पेशल पोक्सो कोर्ट का विशेष लोक अभियोजक नियुक्त किया है ।
    जिलाधिकारी ने यह आदेश गृह अनुभाग-3, उत्तराखण्ड शासन की अधिसूचनाओं और व्यवस्थाओं के अंतर्गत जारी किया है । यह आदेश तत्काल प्रभाव से लागू कर दिया गया है। आदेश की प्रतियां जिला एवं सत्र न्यायाधीश, मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट, वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (एसएसपी) और संयुक्त निदेशक (विधि) समेत सभी संबंधित अधिकारियों को आवश्यक सूचना और कार्रवाई हेतु भेज दी गई हैं।
  डी जी सो सुशील ​शर्मा का लंबा कानूनी अनुभव, न्याय के प्रति उनकी अटूट निष्ठा और विधिक मामलों पर उनकी मजबूत पकड़ इस बात का प्रमाण है कि उन्हें जिलाधिकारी ने यह अत्यंत महत्वपूर्ण जिम्मेदारी सौंपी गई है। जिला बार के अधिवक्ताओं ने उनकी इस नियुक्ति पर खुशी व्यक्त करते हुए कहा कि बलात्कार व पोक्सो मामलों में बच्चों के अधिकारों की रक्षा और त्वरित न्याय सुनिश्चित करने में उनका यह कार्यकाल मील का पत्थर साबित होगा ।
​ बता दें कि उत्तराखंड सरकार ने मार्च 2026 में प्रदेश में दुष्कर्म और पोक्सो अधिनियम के तहत लंबित मामलों के त्वरित निस्तारण के लिए राज्य में 3 अतिरिक्त फास्ट ट्रैक स्पेशल कोर्ट की स्थापना का आदेश जारी किया है। ये नए कोर्ट जनपद देहरादून के बाह्य न्यायालय विकासनगर, उधमसिंह नगर के बाह्य न्यायालय काशीपुर और जनपद न्यायालय नैनीताल में स्थापित किए गये। वर्तमान में राज्य में पहले से ही 4 फास्ट ट्रैक कोर्ट (देहरादून, उधमसिंह नगर, हरिद्वार और रुड़की) संचालित हैं, और इन तीन नए कोर्ट के जुड़ने से कुल संख्या 7 हो गई ।
​इन नए स्थापित होने वाले न्यायालयों के सुचारू संचालन के लिए सरकार ने कुल 24 अस्थायी पदों के सृजन को भी मंजूरी दी है। प्रत्येक नए न्यायालय में अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश (एच.जे. एस .रैंक), स्टेनोग्राफर (ग्रेड-1), रीडर (पेशकार), मुंसरिम, सूट क्लर्क, कॉपियिस्ट, चपरासी और अर्दली सहित कुल 8 पद (कुल 24 पद) स्वीकृत किए गए हैं। केंद्र पोषित योजना (90:10 के अनुपात) के तहत सृजित ये पद पूर्णतः अस्थायी प्रकृति के होंगे, जो 28 फरवरी 2027 तक या भारत सरकार द्वारा योजना समाप्त किए जाने तक प्रभावी रहेंगे।
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