अधिवक्ता परिषद, देवभूमि (उत्तराखण्ड) के प्रथम प्रांत अधिवेशन का उद्घाटन सत्र आज एफ.टी.आई. परिसर में गरिमापूर्ण एवं राष्ट्रभक्ति से ओत-प्रोत वातावरण में हुआ।

अधिवेशन का मुख्य विषय “सुलभ न्याय, समाज की सुरक्षा, उत्तराखण्ड की विधिक चुनौतियाँ एवं अधिवक्ता के दायित्व” रखा गया। कार्यक्रम का शुभारम्भ केन्द्रीय विधि एवं न्याय राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) अर्जुन राम मेघवाल, उत्तर क्षेत्र संगठन मंत्री श्रीहरि बोरेकर, प्रदेश अध्यक्ष जानकी सूर्या एवं क्षेत्र संयोजक विपिन त्यागी सहित अन्य गणमान्य अतिथियों द्वारा दीप प्रज्ज्वलन एवं माँ भारती, भारत रत्न डॉ. भीमराव अम्बेडकर तथा राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के प्रख्यात विचारक दत्तोपंत ठेंगड़ी के चित्रों पर माल्यार्पण के साथ हुआ।

अधिवेशन को सम्बोधित करते हुए उत्तर क्षेत्र संगठन मंत्री श्रीहरि बोरेकर ने कहा कि अधिवक्ता परिषद 1992 में अपनी स्थापना के समय से ही उत्तराखण्ड सहित सम्पूर्ण भारत में विधिक क्षेत्र में सामाजिक दायित्व का निर्वहन कर रही है। उन्होंने कहा, “उत्तराखण्ड की कठिन भौगोलिक परिस्थितियों में अंतिम छोर पर बैठे व्यक्ति तक न्याय पहुँचाना एक चुनौतीपूर्ण कार्य है। उस अंतिम व्यक्ति को ढूँढ़कर उसे न्याय दिलाना ही अधिवक्ता समाज का परम कर्तव्य है।” उन्होंने अधिवक्ताओं से समाज में विधिक जागरण लाकर विधि के शासन को सुदृढ़ करने तथा भारतीय न्याय संहिता, भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता एवं भारतीय साक्ष्य अधिनियम जैसे तीनों नवीन कानूनों के माध्यम से त्वरित निर्णय सुनिश्चित करने में सहयोगी बनने का आह्वान किया।
मुख्य अतिथि केन्द्रीय विधि एवं न्याय राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) अर्जुन राम मेघवाल ने अपने सम्बोधन में स्पष्ट कहा कि भारतीय नागरिकों को त्वरित एवं सुलभ न्याय देना वर्तमान शासन का प्रमुख उद्देश्य है। उन्होंने कहा, “अंग्रेजों के समय में दण्ड देने की उद्देश्य से दण्ड संहिता बनाई गई थी, जबकि वर्तमान भारत सरकार ने न्याय देने की भावना से तीन नवीन कानून—भारतीय न्याय संहिता, भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता तथा भारतीय साक्ष्य अधिनियम—लागू किए हैं। इन कानूनों के माध्यम से त्वरित न्याय के साथ-साथ ई-कोर्ट, ई-पोर्टल, ई-एफआईआर, टेली-लॉ जैसी आधुनिक सुविधाओं से जनता को लाभ होगा।”
केन्द्रीय मंत्री ने आगे कहा कि आज लम्बित मुकदमों का शीघ्रता से निस्तारण कर न्याय में विलम्ब न हो, इस पर निर्णायक रूप से कार्य करने का समय आ गया है। उन्होंने बताया कि राष्ट्रहित को सर्वोपरि रखते हुए गौरक्षा, पर्यावरण संरक्षण जैसे विषयों पर विधि निर्माण प्रक्रिया में अधिवक्ताओं का सक्रिय योगदान, संविधान के विभिन्न पहलुओं पर सामाजिक जागरण, न्यायिक सुधार तथा त्वरित न्याय हेतु न्यायाधीशों की संख्या में वृद्धि पर भी बल दिया जा रहा है। उन्होंने यह भी कहा कि “नारी शक्ति वंदन” तथा आर्थिक-सामाजिक असमानता को समाप्त करने के लिए माननीय प्रधानमंत्री जी के विजन के अनुरूप योजनाएँ क्रियान्वित की जा रही हैं। इंडस्ट्री 4.0 के संदर्भ में उन्होंने स्पष्ट किया कि तकनीक बेरोज़गारी बढ़ाने के बजाय रोज़गार के स्वरूप और अवसरों को बदलेगी तथा कृत्रिम बुद्धिमत्ता कभी मनुष्य का स्थान नहीं ले सकती। उन्होंने “विकसित भारत” के लक्ष्य में त्वरित व सुलभ न्याय को सर्वाधिक महत्वपूर्ण बताते हुए परिवार प्रबोधन पर भी जोर दिया।
क्षेत्रीय संयोजक विपिन त्यागी ने अपने स्वागत भाषण में इस अधिवेशन को अधिवक्ता परिषद देवभूमि के इतिहास का एक निर्णायक पड़ाव करार दिया। उन्होंने सभी प्रदेशवासियों का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि यह अधिवेशन संगठन को नई ऊर्जा और प्रभावी कार्ययोजना देगा। सत्र में हल्द्वानी आयोजन समिति के अध्यक्ष पीयूष तिवारी, नैनीताल के सांसद अजय भट्ट, प्रदेश अध्यक्षा श्रीमती जानकी सूर्या, प्रदेश महामंत्री अनुज शर्मा, आर सी पांडे,हाईकोर्ट बार एसोसिएशन अध्यक्ष डी सी एस रावत, महासचिव सौरभ अधिकारी, मुख्य स्थाई अधिवक्ता पूरन सिंह बिष्ट तथा प्रदेशभर से पधारे सैकड़ों अधिवक्ता, पदाधिकारी एवं नगर के गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे।
उद्घाटन सत्र राष्ट्रसेवा एवं त्वरित न्याय के संकल्प के साथ सम्पन्न हुआ। अधिवेशन के आगामी सत्रों में उत्तराखण्ड की विधिक चुनौतियों, संगठनात्मक विषयों तथा राष्ट्र निर्माण में अधिवक्ता की भूमिका पर विस्तार से मंथन किया जाएगा।


