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नैनीताल। नैनीताल स्थित राजभवन केवल उत्तराखंड के राज्यपाल का ग्रीष्मकालीन आवास भर नहीं है, बल्कि यह इतिहास, वास्तुकला और सांस्कृतिक विरासत का ऐसा जीवंत दस्तावेज है, जो 125 वर्षों से अधिक समय से अपनी भव्यता के साथ खड़ा है।
यह बात प्रदेश के राज्यपाल ले.जन. गुरमीत सिंह ने बुधवार को नैनीताल के इतिहास, सांस्कृतिक विरासत और ऐतिहासिक राजभवन की निर्माण गाथा पर आधारित प्रो. गिरीश रंजन तिवारी की ओर से लिखित “अतीत से वर्तमान तक : नैनीताल का सफर और गॉथिक राजभवन के निर्माण की अद्भुत गाथा” का राजभवन में विमोचन और सिद्धार्थ माधव द्वारा विकसित एआई हेरिटेज एंड टूरिज्म एप का लोकार्पण करते हुए कही। उन्होंने कहा कि विरासत और नवाचार का समन्वय ही विकसित भारत की आधारशिला है। हमारी ऐतिहासिक धरोहरें हमें अपनी जड़ों से जोड़ती हैं, जबकि आधुनिक तकनीक हमें भविष्य की दिशा दिखाती है।
राज्यपाल ने कहा कि यह पुस्तक और डिजिटल मंच विरासत संरक्षण, सांस्कृतिक जागरूकता तथा उत्तरदायी पर्यटन के क्षेत्र में एक अनुकरणीय उदाहरण सिद्ध होंगे। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी द्वारा दिए गए ‘विकास भी, विरासत भी’ के मंत्र को साकार करने के लिए सांस्कृतिक संरक्षण और तकनीकी नवाचार दोनों को समान महत्व देना आवश्यक है।

 

वरिष्ठ पत्रकार डॉ. गिरीश रंजन तिवारी द्वारा लिखित इस पुस्तक का प्रकाशन उत्तराखंड के राज्यपाल गुरमीत सिंह की प्रेरणा और अनुशंसा पर किया गया है।
पुस्तक विमोचन समारोह में राज्यपाल ने इस कृति को नैनीताल और उत्तराखंड की ऐतिहासिक धरोहर को समझने के लिए एक महत्वपूर्ण दस्तावेज बताते हुए इसकी सराहना की। उन्होंने कहा कि यह पुस्तक केवल इतिहास का संकलन नहीं, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के लिए एक अमूल्य विरासत है। गहन शोध, प्रमाणिक तथ्यों और ऐतिहासिक संदर्भों के आधार पर तैयार की गई यह पुस्तक इतिहास प्रेमियों, शोधार्थियों और विद्यार्थियों के लिए उपयोगी सिद्ध होगी। राज्यपाल ने प्रो. तिवारी और सिद्धार्थ को स्मृति चिन्ह देकर सम्मानित भी किया।

डॉ. तिवारी ने बताया कि राज्यपाल ने उनसे नैनीताल, इसकी ऐतिहासिक धरोहरों और विशेष रूप से राजभवन के इतिहास पर एक विस्तृत पुस्तक लिखने को कहा था जिसके क्रम में यह लेखन किया गया।

समारोह की शुरुआत में
प्रो. तिवारी ने
राज्यपाल को बुके भेंट किया साथ ही पुस्तक के आवरण पृष्ठ पर प्रकाशित प्रसिद्ध चित्रकार सुधीर वर्मा द्वारा तैयार की गई हस्तनिर्मित पेंटिंग भी स्मृति-चिह्न के रूप में भेंट की गई, जिसकी राज्यपाल ने सराहना करते हुए कलाकार की प्रशंसा की। इस अवसर पर राजभवन की वित्त नियंत्रक डॉ. तृप्ति श्रीवास्तव, संयुक्त निदेशक सूचना डॉ. नितिन उपाध्याय, परितोष बंगवाल, एप के निर्माता सिद्धार्थ माधव, प्रकाशक संतोष सिंह, हर्ष सिंह, बार काउंसिल ऑफ इंडिया के को चेयरमैन डीके शर्मा, दीपा शर्मा, विपुल शर्मा, अशोक तिवारी, खुशबू तिवारी, कुसुम तिवारी प्रो. नीरजा टंडन, प्रो. महेंद्र राणा, प्रो. ललित तिवारी, प्रो. संतोष कुमार, कंचन वर्मा, होटल एसोसिएशन के अध्यक्ष दिग्विजय सिंह बिष्ट, कूर्माचल बैंक के अध्यक्ष विनय साह, विशाल आर्य, अंचल पंत, सहित कुमाऊं विविv के वरिष्ठ शिक्षक एवं छात्र-छात्राएं उपस्थित रहे।

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इनसेट
राज्यपाल के गांव के मिस्त्रियों ने किया था राजभवन का निर्माण
नैनीताल। प्रो. तिवारी ने बताया कि
शोध के दौरान पता चला कि राजभवन के निर्माण में पंजाब के रामगढ़िया सिखोंका महत्वपूर्ण योगदान रहा था जो राज्यपाल के ही गांव के थे। ब्रिटिश वास्तुकारों ने तैयार किया, लेकिन इसके निर्माण में भारतीय मजदूरों, शिल्पकारों और स्थानीय कारीगरों की महत्वपूर्ण भूमिका रही कोई भी ब्रिटिश मजदूर नहीं लगा था। सीमित संसाधनों, दुर्गम मार्गों और कठोर मौसम के बीच निर्मित यह भवन आज भी अपनी मूल संरचना और मजबूती के साथ खड़ा है।
उन्होंने कहा कि
स्वयं उन स्थलों का भ्रमण करने के बाद उन्होंने यह महसूस किया कि आमतौर पर नैनीताल राजभवन की तुलना इंग्लैंड के बकिंघम पैलेस से की जाती है, लेकिन वास्तुकला के दृष्टिकोण से यह भवन स्कॉटलैंड के प्रसिद्ध बालमोरल पैलेस से अधिक साम्य रखता है।

राष्ट्रपति को भेंट की पहली प्रति अब पीएम राज्यपालों, मंत्रियों को भेजेंगे

नैनीताल।
राज्यपाल गुरमीत सिंह ने अपने संबोधन में कहा कि पुस्तक में संकलित ऐतिहासिक तथ्य और शोध कार्य अत्यंत मूल्यवान हैं। उन्होंने कहा कि इस पुस्तक की पहली प्रति उन्होंने राष्ट्रपति को भेंट की थी अब प्रधानमंत्री सहित सभी राज्यपालों, मुख्यमंत्रियों और केंद्रीय मंत्रियों को भी इसकी प्रति भेजेंगे
उन्होंने घोषणा की कि इस पुस्तक को उत्तराखंड के विश्वविद्यालयों और महाविद्यालयों में उपलब्ध कराने के प्रयास किए जाएंगे, ताकि विद्यार्थियों को इसका लाभ मिल सके।

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राज्यपाल ने किया पुस्तक का कवर तैयार, लिखी प्रस्तावना

नैनीताल। पुस्तक का कवर पेज राज्यपाल ने स्वयं अपनी रूचि से बनवाया और इसकी प्रस्तावना भी उन्होंने ही लिखी है। पुस्तक के प्रकाशक इंदु प्रकाशन के संतोष सिंह ने बताया कि केवल कवर पेज देखकर उन्हें एक हजार पुस्तकों के अग्रिम आर्डर मिल चुके हैं।
राज्यपाल ने कहा कि इस ऐतिहासिक धरोहर की कहानी केवल अभिलेखों तक सीमित नहीं रहनी चाहिए, बल्कि इसे आने वाली पीढ़ियों तक पहुंचाना आवश्यक है। इसी उद्देश्य से इस पुस्तक की परिकल्पना की गई। उन्होंने पुस्तक के लेखक वरिष्ठ पत्रकार, शिक्षाविद् एवं शोधकर्ता डॉ. गिरीश रंजन तिवारी को इस महत्वपूर्ण कार्य के लिए बधाई देते हुए कहा कि यह पुस्तक केवल राजभवन के निर्माण का इतिहास नहीं, बल्कि नैनीताल की सांस्कृतिक यात्रा, उत्तराखण्ड की विरासत तथा तत्कालीन सामाजिक परिवेश का भी महत्वपूर्ण दस्तावेज है।

तकनीक संस्कृति, इतिहास और समाज के संरक्षण का साधन
नैनीताल। राज्यपाल ने हेरिटेज एप्प के संबंध में कहा कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता के वर्तमान युग में तकनीक को केवल सुविधा का माध्यम नहीं, बल्कि संस्कृति, इतिहास और समाज के संरक्षण का सशक्त साधन बनाया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि यह एप लोक भवन, नैनीताल और उत्तराखण्ड की समृद्ध विरासत को डिजिटल माध्यम से जन-जन तक पहुंचाने का अभिनव प्रयास है।
राज्यपाल ने बताया कि ऐप में हेरिटेज गाइड, स्मार्ट प्लानर और इंटरएक्टिव टाइम कैप्सूल जैसी सुविधाएं उपलब्ध कराई गई हैं, जिनके माध्यम से पर्यटक एवं शोधार्थी ऐतिहासिक जानकारी प्राप्त कर सकेंगे तथा अपनी रुचि के अनुरूप यात्रा अनुभव का लाभ उठा सकेंगे। उन्होंने विशेष रूप से “हिडन जेम्स” फीचर का उल्लेख करते हुए कहा कि इसके माध्यम से स्थानीय नागरिक अपने क्षेत्र के कम ज्ञात किन्तु महत्वपूर्ण सांस्कृतिक, ऐतिहासिक और प्राकृतिक स्थलों की जानकारी साझा कर सकेंगे, जिससे स्थानीय समुदायों और छोटे व्यवसायों को भी लाभ मिलेगा।
आज विमोचित पुस्तक हमें अपने अतीत से जोड़ती है, जबकि एआई एप्प भविष्य की दिशा दिखाता है। दोनों मिलकर ऐसे भारत की तस्वीर प्रस्तुत करते हैं जो अपनी विरासत पर गर्व करता है और नवाचार के साथ आगे बढ़ता है।

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