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नैनीताल । भारत रत्न पंडित गोविन्द बल्लभ पंत जी की 65वीं पुण्यतिथि के अवसर पर मल्लीताल पंत जी मूर्ति पर माल्यार्पण कर उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की गई  ।
इस अवसर मुख्य संयोजक पूरन मेहरा ने कहा पंडित जी को मानवता के प्रति सम्मान,मूल्यों के प्रति निष्ठा,असहायों के प्रति आत्मीयता, सजक राजनीतिज्ञ होने का गौरव प्राप्त है ।
वे स्वतंत्रता प्राप्ति के पहले उस समय के संयुक्त प्रांत के मुख्यमंत्री रहे और स्वतंत्रता प्राप्ति के बाद उत्तर प्रदेश के प्रथम मुख्यमंत्री बने । उसके बाद देश के गृह मंत्री के रूप अपने अंतिम समय तक उस पद पर बने रहे ।  पंत जी ने रौलेट एक्ट को रद्द कराने जिसमें तत्कालीन अंग्रेज़ी सरकार को असाधारण क़ानूनों से लैस करना था । ताकि स्वतंत्रता की माँग करने वाले भारत के लोगों को क़ानून की आड़ में दबाया जा सके और अंग्रेज़ों ने मानो एक तरह से भारतवासियों के लिए न्याय का सिद्धान्त ही ख़त्म करवा दिया ।  पंडित पंत, न केवल इन बुराइयों से होने वाले नुक़सान से लोगों को अवगत कराया व ज़बरदस्त विरोध किया ।  कार्यक्रम में प्रदेश महासचिव त्रिभुवन सिंह फर्त्याल ने पंडित जी को महान स्वतंत्रता सेनानी व राजनीतिज्ञ उत्तराखंड का गौरव बताया ।
 उपभोक्ता फोरम के पूर्व सदस्य राजेन्द्र परगाई ने पण्डित गोविंद बल्लभ पंत के उत्तराखंड के विकास में योगदान का उल्लेख किया । कांग्रेस नगर अध्यक्ष अनुपम कबड़वाल ने पण्डित पन्त जी को श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए उनके व्यक्तित्व व कृतित्व पर विस्तार से जानकारी दी।
  इस मौके पर पूर्व वन क्षेत्राधिकारी हीरा सिंह शाही, अतुल पाल पूर्व अध्यक्ष अनुसूचित जाति मोर्चा, निर्वाण मुखर्जी राष्ट्रीय उपाध्यक्ष बॉक्सिंग फेडरेशन, गोविन्द जोशी, सभासद जितेंद्र (जीनू) पाण्डेय, पीयूष जोशी, प्रदीप कुमार, भगवान सिंह, राज्य आन्दोलनकारी कंचन चन्दोला पूर्व कार्यकारी अध्यक्ष संयुक्त कर्मचारी महासंघ कुमाऊ मंडल विकास निगम आदि मौजूद थे ।
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