नैनीताल । उत्तराखंड क्रांति दल (उक्रांद) नैनीताल द्वारा दल का 47वां स्थापना दिवस राज्य अतिथि सभागार में बेहद गरिमामय ढंग से मनाया गया।

25 जुलाई 1979 को स्थापित हुए इस दल के कार्यक्रम की अध्यक्षता संस्थापक सदस्य अम्बा दत्त बवाड़ी ने की। इस अवसर पर सभागार में उपस्थित पार्टी कार्यकर्ताओं ने राज्य निर्माण में सर्वोच्च शहादत देने वाले शहीदों और दिवंगत संस्थापक सदस्यों के चित्रों पर पुष्पांजलि अर्पित की।
संयोगवश आज ही के दिन अमर स्वतंत्रता सेनानी श्रीदेव सुमन की पुण्यतिथि भी होने के कारण दल ने उनके चित्र पर माल्यार्पण कर उनकी सर्वोच्च शहादत को नमन किया।
कार्यक्रम की शुरुआत इन्दर सिंह नेगी द्वारा प्रसिद्ध जनकवि गिरीश तिवारी “गिरदा” के जनगीत से हुई, जिसके माध्यम से पृथक राज्य आंदोलन में गिरदा के अमूल्य योगदान के प्रति कृतज्ञता व्यक्त की गई।
स्थापना दिवस के मौके पर “उत्तराखंड राज्य की अवधारणा के कितने पास कितने दूर” विषय पर एक महत्वपूर्ण विचार गोष्ठी आयोजित की गई। गोष्ठी में मुख्य वक्ता के रूप में विचार व्यक्त करते हुए पूर्व विधायक डॉ. नारायण सिंह जंतवाल ने सरकार की नीतियों पर तीखा प्रहार किया। उन्होंने कहा कि आज उत्तराखंडियों का उत्तराखंड नहीं बन पाया है, क्योंकि नीतियां दिल्ली से तय होकर थोपी जा रही हैं, जबकि कानून बनाने की असली ताकत हमारी विधानसभा के पास है। उन्होंने कहा कि यही वजह है कि 85 प्रतिशत पर्वतीय क्षेत्र आज भी ठोस योजनाओं से वंचित है और शिक्षा, चिकित्सा व रोजगार के अभाव में पलायन जारी है। मूल निवास, स्थायी राजधानी और सख्त भू-कानून जैसे बुनियादी मुद्दे जस के तस बने हुए हैं। परिसीमन से पहाड़ की राजनीतिक ताकत घटी है और भ्रष्टाचार चरम पर है। उन्होंने हाईकोर्ट के स्थानांतरण का विरोध करते हुए कहा कि यदि कार्यालय शिफ्ट ही करने हैं तो स्थायी राजधानी गैरसैण में किए जाएं। इसके साथ ही उन्होंने दिल्ली में छात्रों के आंदोलन पर हुए दमन की निंदा करते हुए दोषियों को दंडित करने और सरकार से माफी मांगने की मांग की।
गोष्ठी में वरिष्ठ अधिवक्ता प्रकाश चंद्र पांडे, लोकेश वर्मा, चेतन नेगी ने पर्यावरण और बुनियादी सेवाओं की बदहाली पर गहरी चिंता जताई। वहीं डॉ. सुरेश नेगी ने कहा कि हमें स्व-राज्य तो मिल गया, लेकिन अब असली लड़ाई ‘स्व-राज’ की है। उन्होंने पहाड़ के 85 प्रतिशत भू-भाग को पूर्वोत्तर राज्यों की तर्ज पर संवैधानिक सुरक्षा देने की मांग की।
सभा को त्रिभुवन फर्तियाल, सुबोध कुमार और पान सिंह सिजवाली आदि ने भी संबोधित किया, जबकि पूरे कार्यक्रम का सफल संचालन कमलेश चंद्र पांडे द्वारा किया गया। इस ऐतिहासिक अवसर पर राजनीतिक सक्रियता बढ़ाते हुए मनोज साह (नगर अध्यक्ष), मनोज जोशी, पुष्कर बिष्ट, चंद्र प्रकाश साह, सुनील कुमार, प्रगति साह, ध्यान सिंह, कैलाश बहुखंडी, अनिल कुमार और विजय साह ने औपचारिक रूप से दल की सदस्यता ग्रहण की। कार्यक्रम में खीम राज बिष्ट, मदन बगड़वाल, प्रकाश आर्य, श्रीमती लीला बोरा और सज्जन साह सहित भारी संख्या में कार्यकर्ता व गणमान्य लोग उपस्थित रहे।


