देहरादून । उत्तराखंड में लोक सेवकों के वार्षिक स्थानांतरण को लेकर शिक्षा निदेशालय ने एक महत्वपूर्ण स्पष्टीकरण जारी किया है। माध्यमिक शिक्षा उत्तराखंड के निदेशक विनोद प्रसाद सिमल्टी द्वारा कुमाऊँ मण्डल (नैनीताल) और गढ़वाल मण्डल (पौड़ी) के अपर निदेशकों (माध्यमिक शिक्षा) को एक आधिकारिक पत्र भेजा गया है। इस पत्र के माध्यम से ‘उत्तराखंड लोक सेवकों के लिए वार्षिक स्थानांतरण अधिनियम-2017’ के अंतर्गत धारा 17(1)(ख) के तहत अनुरोध के आधार पर होने वाले तबादलों में पारदर्शिता और नियमों का कड़ाई से पालन करने के निर्देश दिए गए हैं।
इस दिशा-निर्देश में मुख्य रूप से धारा 3(घ) के तहत राज्य मेडिकल बोर्ड द्वारा जारी प्रमाण पत्र की वैधता और उसकी समयावधि को लेकर स्थिति स्पष्ट की गई है। शिक्षा निदेशक ने निदेशालय स्तर पर उठ रहे विभिन्न सवालों का जवाब देते हुए कार्मिक एवं सतर्कता अनुभाग-2 देहरादून के 15 जून 2023 के शासनादेश का हवाला दिया है। इस शासनादेश के अनुसार, स्थानांतरण सत्र के आरंभ में कार्मिकों को सक्षम स्तर का नवीनतम प्रमाण पत्र (वर्तमान सत्र हेतु वर्ष 2022 या उसके बाद का) प्रस्तुत करना अनिवार्य होगा। ऐसा इसलिए किया गया है क्योंकि कतिपय (कुछ) रोगों के उपचार के बाद ठीक होने की संभावना रहती है, लेकिन देखने में आया है कि कुछ कार्मिक हर सत्र में एक ही पुराने प्रमाण पत्र का लाभ उठाने की कोशिश कर रहे हैं।
निदेशक विनोद प्रसाद सिमल्टी ने स्पष्ट किया है कि जून 2023 के शासनादेश के बाद इस संबंध में कोई अन्य नया निर्देश जारी नहीं हुआ है, इसलिए पुरानी व्यवस्था ही प्रभावी रहेगी। उन्होंने मण्डल और जनपद स्तर पर स्थानांतरण प्रक्रिया में पूर्ण एकरूपता बनाए रखने के लिए आवश्यक कार्रवाई करने के निर्देश दिए हैं। इस आदेश की प्रतिलिपि समस्त मुख्य शिक्षा अधिकारियों और संबंधित खण्ड शिक्षा अधिकारियों को भी आवश्यक कार्रवाई हेतु प्रेषित कर दी गई है ताकि नियमों के उल्लंघन की कोई गुंजाइश न रहे।
आदेश -:



