नैनीताल । उत्तराखंड हाईकोर्ट ने हल्द्वानी उप जिला चिकित्सालय में संयुक्त निदेशक ग्रेड पर तैनात मेडिकल ऑफिसर डॉ. मोनिका जोशी खर्कवाल की स्थानांतरण याचिका पर सुनवाई करते हुए तबादला आदेश में हस्तक्षेप करने से इनकार कर दिया है।
न्यायमूर्ति मनोज कुमार तिवारी और न्यायमूर्ति पंकज पुरोहित की खंडपीठ ने स्पष्ट किया कि स्थानांतरण सेवा की एक अनिवार्यता है और याचिकाकर्ता पिछले आठ वर्षों से लगातार हल्द्वानी में सेवा दे रही थीं, जिसके चलते उनका तबादला अवैध नहीं माना जा सकता। कोर्ट ने यह भी संज्ञान में लिया कि डॉ. मोनिका का तबादला नैनीताल शहर में किया गया है, और उनके पति (जो कि बाल रोग विशेषज्ञ हैं) का तबादला भी ‘स्पौस पॉलिसी’ के तहत नैनीताल के बी.डी. पांडे जिला अस्पताल में किया गया है।
हालांकि, न्यायालय ने याचिकाकर्ता को राहत देते हुए रिट याचिका को इस शर्त के साथ निस्तारित किया है कि वे 24 घंटे के भीतर ईमेल के माध्यम से संबंधित सचिव को अपना प्रत्यावेदन भेज सकती हैं, जिस पर एक सप्ताह के भीतर कानूनन निर्णय लिया जाएगा।
इसके साथ ही कोर्ट ने आदेश दिया है कि आगामी 10 दिनों तक याचिकाकर्ता की पोस्टिंग के संबंध में यथास्थिति बहाल रहेगी। लेकिन यदि याचिकाकर्ता निर्धारित 24 घंटे के भीतर अपना प्रत्यावेदन देने में विफल रहती हैं, तो वे इस आदेश के तहत मिलने वाले किसी भी संरक्षण या राहत की हकदार नहीं होंगी।


