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नैनीताल । जाने माने कुमाउनी गायक प्रह्लाद मेहरा का बुधवार को दिल दौरा पड़ने से निधन हो गया । दिल का दौरा पड़ने पर परिजन उन्हें हल्द्वानी के एक निजी अस्पताल लाये थे । जहां उन्हें नहीं बचाया जा सका । उनके निधन पर नैनीताल के रंगकर्मियों ने शोक व्यक्त करते हुए दिवंगत आत्मा की शांति प्रार्थना की है ।

वे अपने परिवार के साथ बिन्दुखत्ता में रहते थे । वे करीब 53 वर्ष के थे । उनके पार्थिव शरीर को बिंदुखत्ता ले जाया गया है और गुरुवार को उनका दाह संस्कार होगा ।

मूलतः मुनस्यारी निवासी पहलाद मेहरा स्व. गोपाल बाबू गोस्वामी और गजेंद्र राणा से प्रभावित होकर  कुमाउनी गायन के क्षेत्र में आये।

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साल 1989 में अल्मोड़ा आकाशवाणी में उन्होंने स्वर परीक्षा पास की वर्तमान में प्रहलाद मेहरा अल्मोड़ा आकाशवाणी में ए श्रेणी के गायक हैं। उनके कई हिट कुमाऊंनी गीत हैं ।

 पहाड़ की चेली ले, द्वी रवाटा कभे न खाया… ओ हिमा जाग…का छ तेरो जलेबी को डाब, चंदी बटना दाज्यू, कुर्ती कॉलर मां मेरी मधुली…एजा मेरा दानपुरा आदि सुपर हिट गानों को अपनी आवाज देकर वह उत्तराखंड के लाखों लोगों के दिलों में छा गए।

लोक कलाकार महासंघ के कोषाध्यक्ष व नैनीताल के वरिष्ठ लोककलाकार किशन लाल ने उनके निधन पर दुख व्यक्त करते हुए कहा कि प्रहलाद सिंह मेहरा  का इस तरीके से चले जाना उत्तराखंड की लोक संस्कृति के लिए बहुत बड़ा नुकसान है। जिसकी भरपाई होना संभव नहीं है। उन्होंने लोक संस्कृति में बहुत ज्यादा संघर्ष किया । श्री प्रहलाद मेहरा लोक संस्कृति की फक्कड़ जोगी थे। उनके साथ कई मंच हम लोगों ने साझे किए हैं। हमेशा एक गुरु के रूप में एक अभिभावक के रूप मुझे व्यक्तिगत तौर से भी समझते थे।

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उनके निधन पर लोक कलाकार महासंगठन उत्तराखंड गहरा दुख व्यक्त करता है। महासंगठन के समस्त पदाधिकारियों, सदस्यों, समस्त ग्रुप लीडरों की ओर से भावभीनी  नमन। ईश्वर पुण्य आत्मा को अपने चरणों में स्थान दें और शोककुल परिवार को इस दुख को सहन करने की हिम्मत दे।

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