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नैनीताल ।  उत्तराखंड हाईकोर्ट ने राजकीय औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थानों (आई टी आई) में अनुदेशकों के 370 पदों पर चल रही भर्ती प्रक्रिया में हस्तक्षेप करने से इनकार कर दिया है। न्यायमूर्ति रवींद्र मैथानी की एकल पीठ ने इस संबंध में दायर की गई कई रिट याचिकाओं को खारिज करते हुए स्पष्ट किया कि भर्ती के लिए राष्ट्रीय शिल्प अनुदेशक प्रमाणपत्र (एन सी आई सी/सी आई टी एस) एक अनिवार्य योग्यता बनी रहेगी।
अदालत ने अपने निर्णय में जोर देकर कहा कि भर्ती प्रक्रिया ‘उत्तराखंड राजकीय औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थान (अनुदेशक) सेवा नियमावली, 2003’ के अनुसार संचालित हो रही है। इन नियमों में वर्ष 2022 में संशोधन कर अनुदेशकों के लिए एन सी आई सी प्रमाणपत्र को अनिवार्य शैक्षिक योग्यता घोषित किया गया था।
याचिकाकर्ताओं का तर्क था कि भारत सरकार के प्रशिक्षण महानिदेशालय ने जून 2023 के एक कार्यालय ज्ञापन  के जरिए इस योग्यता में ढील दी थी। हालांकि, अदालत ने स्पष्ट किया कि जब तक राज्य सरकार अपनी सेवा नियमावली में औपचारिक संशोधन नहीं करती, तब तक केंद्र के निर्देश स्वतः लागू नहीं माने जा सकते ।
हाईकोर्ट ने विभिन्न कानूनी उदाहरणों का हवाला देते हुए कहा कि भर्ती के विज्ञापन जारी होने के बाद योग्यता के मानदंडों में बदलाव करना उचित नहीं है। चूंकि विज्ञापन 16 फरवरी 2024 को जारी किया गया था, इसलिए उस समय प्रभावी सेवा नियमों का पालन करना अनिवार्य है ।
उत्तराखंड अधीनस्थ सेवा चयन आयोग ने अदालत में अपना पक्ष रखते हुए कहा कि वे सेवा नियमों के विरुद्ध कोई भी विज्ञापन जारी नहीं कर सकते। आयोग ने तर्क दिया कि विज्ञापन के समय जो नियम अस्तित्व में थे, उन्हीं के आधार पर चयन प्रक्रिया को आगे बढ़ाया जा रहा है।
सुनवाई के दौरान यह तथ्य भी सामने आया कि उत्तराखंड में अनुदेशकों के कुल 1386 स्वीकृत पदों में से केवल 373 पदों पर ही नियमित अनुदेशक कार्य कर रहे हैं। भारी कमी को देखते हुए राज्य सरकार ने आयोग को वर्तमान प्रक्रिया को बिना किसी ढील के जारी रखने का निर्देश दिया था।
अदालत ने उन उम्मीदवारों के हस्तक्षेप आवेदनों को भी खारिज कर दिया जो अनंतिम मेरिट सूची में शामिल थे। कोर्ट का मानना था कि केवल चयन सूची में नाम आने से नियुक्ति का कोई अटूट अधिकार प्राप्त नहीं हो जाता ।
याचिकाकर्ता, जिनके पास विज्ञापन की अंतिम तिथि तक एन सी आई सी प्रमाणपत्र नहीं था, उन्होंने भर्ती में शामिल होने की अनुमति मांगी थी। हालांकि अदालत ने राहत नहीं दी, लेकिन राज्य सरकार ने संकेत दिया है कि भविष्य की रिक्तियों के लिए नियमों में आवश्यक बदलाव किए जा सकते हैं।
इस फैसले के साथ ही अब राज्य में अनुदेशक भर्ती का रास्ता साफ हो गया है। अदालत ने अंत में यह निष्कर्ष निकाला कि अनुच्छेद 309 के तहत बनाई गई वैधानिक नियमावली किसी भी प्रशासनिक आदेश या कार्यकारी निर्देश से ऊपर है।

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