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​नैनीताल । जिला एवं सत्र न्यायाधीश प्रशांत जोशी ने उत्तराखंड पावर कॉर्पोरेशन के संविदा लाइनमैन देवेंद्र कुमार की हत्या और अपहरण के मामले की गंभीरता और अपराध की क्रूरता को देखते हुए विभाग के अवर अभियंता मुख्य आरोपी होशियार सिंह भंडारी पुत्र अनूप सिंह भंडारी, निवासी घासमण्डी बिजलीघर, रामनगर और लाइनमैन विशाल सैनी पुत्र मदन सैनी, निवासी भवानीपुर सलिया गैबुआ, कालाढूंंगी की जमानत अर्जी  खारिज कर दी है। दोनों आरोपियों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता की गंभीर धाराओं और एससी/एस टी एक्ट के तहत मामला दर्ज है।
  अभियोजन की ओर से जिला शासकीय अधिवक्ता (फौजदारी) सुशील कुमार शर्मा ने पुरजोर पैरवी करते हुए आरोपियों को जमानत न देने की दलील रखी थी, जिसे अदालत ने स्वीकार कर लिया।
​मामले के अनुसार, मृतक देवेंद्र कुमार बैलपड़ाव बिजली स्टेशन पर संविदा लाइनमैन के पद पर कार्यरत थे और अपने परिवार के एकमात्र कमाऊ सदस्य थे। मृतक की पत्नी सुमन देवी द्वारा दर्ज कराई गई रिपोर्ट के मुताबिक, देवेंद्र पिछले कुछ दिनों से काफी चिंतित थे क्योंकि उन पर जेई  होशियार सिंह भंडारी, लाइनमैन विशाल सैनी आदि द्वारा कथित रूप से गलत काम करने का भारी दबाव बनाया जा रहा था।  21 मई 2026 को आरोपी होशियार सिंह और विशाल सैनी मृतक के घर पहुंचे और जबरन उनकी माता के फोन से देवेंद्र से बात की। इसके बाद आरोपियों ने भवानीगंज चौराहे (रामनगर) के पास देवेंद्र को घेरा, उनके साथ गाली-गलौज और मारपीट की, तथा उन्हें जबरन एक गाड़ी में डालकर अगवा कर ले गए। घटना के वक्त मृतक के एक रिश्तेदार अशोक कुमार ने उन्हें बचाना चाहा, लेकिन आरोपियों ने इसे ‘आपसी मामला’ बताकर उसे दूर कर दिया, जिसके बाद अशोक ने तुरंत डायल 112 पर पुलिस को सूचित किया।
​अभियोजन पक्ष ने अदालत में दलील दी कि अपहरण के बाद आरोपी देवेंद्र को बैलपड़ाव बिजलीघर ले गए, जहां उनके साथ बेरहमी से मारपीट की गई जिसके कारण उनकी मृत्यु हो गई। इस जघन्य कृत्य को छिपाने के लिए आरोपियों ने मृतक के परिजनों को गुमराह किया और देवेंद्र को रामनगर अस्पताल में भर्ती कराकर छोड़ दिया, जहां डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया।
जिला शासकीय अधिवक्ता फौजदारी सुशील शर्मा ने कोर्ट को बताया कि आरोपी होशियार सिंह भंडारी विद्युत विभाग में अवर अभियंता  के पद पर तैनात है और विशाल सैनी लाइनमैन है, लेकिन इस पूरे घटनाक्रम के बाद भी उन्होंने न तो अस्पताल में मृतक के परिजनों को सच बताया और न ही पुलिस या विभाग के उच्चाधिकारियों को इसकी कोई सूचना दी। अदालत ने दोनों पक्षों की लंबी बहस सुनने के बाद इस हत्याकांड को अत्यंत गंभीर और जघन्य माना तथा आरोपियों की जमानत याचिका को पूरी तरह से खारिज कर दिया।
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