नैनीताल । उत्तराखंड हाईकोर्ट ने पुलिस विभाग में ‘ग्रुप-सी’ के अंतर्गत नागरिक पुलिस, पीएसी और आईआरबी (पुरुष) कांस्टेबल के 2000 पदों पर चल रही भर्ती प्रक्रिया में आयु सीमा में छूट की मांग करने वाली याचिकाओं को खारिज कर दिया है। इन याचिकाओं में 27 अक्टूबर 2024 को यू के एस एस एस सी, द्वारा जारी विज्ञप्ति को चुनौती दी गई थी ।
न्यायमूर्ति मनोज कुमार तिवारी की एकल पीठ ने मामले की सुनवाई करते हुए स्पष्ट किया कि चयन प्रक्रिया पूरी होने के अंतिम चरण में इस प्रकार की राहत प्रदान नहीं की जा सकती। अदालत के इस निर्णय से अब विभाग के लिए भर्ती का परिणाम घोषित करने और चयनित अभ्यर्थियों को नियुक्ति पत्र जारी करने का रास्ता साफ हो गया है।
याचिकाकर्ता चमोली निवासी रोशन सिंह व अन्य का तर्क था कि राज्य गठन के बाद से कांस्टेबल पदों के लिए भर्तियां नियमित रूप से नहीं की गई हैं। उन्होंने बताया कि पिछले 25 वर्षों में केवल तीन बार (2014, 2021 और वर्तमान 2024) ही चयन प्रक्रिया आयोजित की गई है। अभ्यर्थियों ने 04 जुलाई 2007 के सरकारी आदेश का हवाला देते हुए कहा था कि रिक्तियों को हर साल विज्ञापित किया जाना चाहिए था, और विभाग की इसी देरी के कारण वे निर्धारित 22 वर्ष की अधिकतम आयु सीमा को पार कर चुके हैं।
अदालत में सुनवाई के दौरान राज्य सरकार की ओर से दलील दी गई कि याचिकाकर्ताओं ने न तो भर्ती विज्ञापन को चुनौती दी और न ही आयु निर्धारण की कट-ऑफ तिथि को। सरकारी वकील ने जोर देकर कहा कि चयन प्रक्रिया अब समाप्त हो चुकी है और केवल नियुक्ति पत्र जारी करना ही शेष है। ऐसे समय में आयु सीमा में बदलाव करने से पूरी भर्ती प्रक्रिया बाधित होगी, जबकि विभाग में कांस्टेबलों की भारी कमी है।
न्यायालय ने राज्य सरकार के पक्ष को स्वीकार करते हुए कहा कि एक नियोक्ता के रूप में सरकार को सार्वजनिक पदों के लिए आयु सीमा निर्धारित करने का पूर्ण अधिकार है। पीठ ने टिप्पणी की कि 2000 पदों पर चयन एक विशाल कार्य है और विज्ञापन की शर्तों को पूरा न करने वाले उम्मीदवारों के कहने पर इसे रद्द या संशोधित नहीं किया जा सकता। अदालत ने यह भी माना कि सरकारी आदेश केवल अधिकारियों के मार्गदर्शन के लिए होते हैं और उन्हें कानून की तरह लागू नहीं किया जा सकता।
उच्च न्यायालय ने इस बात पर भी ध्यान दिया कि 2027 में हरिद्वार में ‘कुंभ मेला’ आयोजित होने वाला है, जिसके लिए अतिरिक्त पुलिस बल की तत्काल आवश्यकता है। पूर्व में 27 फरवरी 2025 को एक अंतरिम आदेश के माध्यम से भर्ती के परिणाम घोषित करने पर रोक लगा दी गई थी, जिसके कारण चयनित उम्मीदवारों को प्रशिक्षण पर नहीं भेजा जा पा रहा था। प्रशिक्षण में भी लगभग एक वर्ष का समय लगता है, जिसे देखते हुए अदालत ने मामले में तत्काल निर्णय लेना आवश्यक समझा।
कोर्ट ने 27 फरवरी 2025 के स्थगन आदेश को वापस ले लिया और याचिका को निस्तारित कर दिया। न्यायालय ने साफ किया कि याचिकाकर्ताओं ने पात्रता शर्तों को जानते हुए भी समय रहते विज्ञापन को चुनौती नहीं दी, इसलिए अब चयन प्रक्रिया पूरी होने के बाद कोई भी उपयोगी उद्देश्य सिद्ध नहीं होगा। अब पुलिस विभाग नियमानुसार परिणाम घोषित करने और नवनियुक्त सिपाहियों की ट्रेनिंग शुरू करने के लिए स्वतंत्र है।


