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नैनीताल । त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव के सम्बंध में हाईकोर्ट द्वारा 27 जून को जारी आदेश हाईकोर्ट की बेवसाइड में उपलब्ध है ।

 

उत्तराखंड हाईकोर्ट की डिवीजन बेंच ने जिला पंचायत चुनावों को लेकर एक अहम फैसला सुनाते हुए दिनांक 23 जून 2025 को पारित अंतरिम आदेश को रद्द कर दिया है। कोर्ट ने चुनाव प्रक्रिया को वहीं से दोबारा शुरू करने का निर्देश दिया है, जहां से उसे रोका गया था। अब नामांकन की अंतिम तिथि चार दिन के लिए बढ़ा दी गई है।

क्या है मामला:
23 जून को याचिकाकर्ताओं की ओर से यह दलील दी गई थी कि चुनाव में संविधान के अनुच्छेद 243-डी के तहत आरक्षण के प्रावधानों का पालन नहीं किया गया है। इस पर हाईकोर्ट ने चुनाव प्रक्रिया पर अस्थायी रोक लगा दी थी।

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सरकार की दलील:
24 जून को महाधिवक्ता ने कोर्ट में इस रोक को चुनौती देते हुए कहा कि इससे पूरी चुनाव प्रक्रिया ठप हो गई है। 26 जून को राज्य सरकार ने 2019 और 2025 के आरक्षण आंकड़ों से जुड़ा चार्ट कोर्ट के समक्ष प्रस्तुत किया, जिसमें प्रत्येक जिला पंचायत सीट पर आरक्षण की स्थिति और उसकी पुनरावृत्ति का विवरण दिया गया था।

 

कोर्ट की टिप्पणी:
कोर्ट ने कहा कि prima facie (प्रथम दृष्टया) आरक्षण का रोटेशन संविधान के अनुच्छेद 243-डी के अनुरूप प्रतीत होता है। महिलाओं के लिए आरक्षण को 50% की सीमा में रखने की याचिकाकर्ताओं की दलील भी अदालत को प्रथम दृष्टया स्वीकार नहीं हुई।

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निष्कर्ष और आदेश:

अंतरिम आदेश को समाप्त किया गया।

चुनाव प्रक्रिया को फिर से शुरू करने का निर्देश।

नामांकन की अंतिम तिथि चार दिन बढ़ाई गई।

नाम वापसी और स्क्रूटनी की तारीखें भी उसी अनुरूप समायोजित की जाएंगी।

चुनाव आयोग को अनुच्छेद 243-के के तहत आवश्यक कार्यवाही सुनिश्चित करने का निर्देश।

महत्वपूर्ण बात:
कोर्ट ने यह स्पष्ट किया कि यदि आरक्षण का संवैधानिक प्रावधानों के अनुरूप पालन नहीं होता, तो संवैधानिक अदालतें चुनाव रोक सकती हैं, लेकिन इस मामले में आरक्षण की रोटेशन प्रक्रिया संतोषजनक पाई गई है।

 

आदेश के मुख्य अंश-:

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