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सेंट्रल जेल में उम्रकैद की सजा काट रहे एक कैदी की पत्नी ने राजस्थान हाईकोर्ट में गर्भधारण करने को लेकर याचिका दायर की थी। कैदी की पत्नी ने हाई कोर्ट से अपने पति को 15 दिन की पैरोल पर रिहा करने की मांग करते हुए याचिका दायर की।  हाईकोर्ट ने महिला की याचिका को स्वीकार कर जेल में बंद कैदी को सशर्त पैरोल पर रिहा करने का आदेश जारी कर दिया। भीलवाड़ा जिले के रबारियों की ढाणी का रहने वाला नंदलाल 6 फरवरी 2019 से अजमेर जेल में उम्रकैद की सजा काट रहा है। सजा मिलने से कुछ समय पहले ही उसकी शादी हुई थी। लेकिन अपराध के मामले के चलते उसे जेल हो गई। उसके बाद पहली बार उसे पिछले साल मई में 20 दिन की पेरोल दी गई। बाद में कोरोना और अन्य कारणों के चलते करीब दो साल तक पत्नी और परिवार से नंदलाल की मुलाकात संभव नहीं हो सकी। नंदलाल की पत्नी कुछ दिन पहले जेल अफसरों के पास वकील के साथ पहुंची और कहा- वह मां बनना चाहती है, अगर पति को कुछ दिन की पेरोल पर छोड़ दें तो उसका यह अधिकार पूरा हो सकता है। जेल अफसरों ने इसे गंभीरता से नहीं लिया। जब जेल अफसरों की ओर से कोई जवाब नहीं आया तो वो कलेक्टर के पास पहुंची और अपना प्रार्थना पत्र दिया। कलेक्टर ने भी इसे गंभीरता से नहीं लिया। जिसके बाद वह सीधे हाईकोर्ट जा पहुंची और जज के सामने अपना पक्ष रखा। पत्नी ने कहा-पति से अपराध हुआ है, लेकिन उनकी मंशा नहीं थी। जेल और पुलिस के तमाम नियमों का वे सख्ती से पालन कर रहे हैं। प्रोफेशनल अपराधी वे नहीं हैं। इसलिये उन्हें पेरोल पर छोड़ा जाए । ताकि उसका मातृत्व सुख का अधिकार मिल सके । हाईकोर्ट ने याची की प्रार्थना को स्वीकार कर आरोपी को पेरोल पर छोड़ने के आदेश जारी किए हैं ।

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