नैनीताल । उत्तराखण्ड हाईकोर्ट बार एसोसिएशन ने दिल्ली जंतर मंतर में युवाओं पर हुए बर्बर लाठीचार्ज की कड़ी निंदा की है । जबकि कई अन्य संगठनों ने जुलूस प्रदर्शन कर सरकार के खिलाफ जबरदस्त नारेबाजी की ।

बार एसोसिएशन की शुक्रवार को बार सभागार में बार अध्यक्ष डी.सी.एस. रावत की अध्यक्षता में एक आम सभा का आयोजन किया गया। यह बैठक दिल्ली के जंतर-मंतर पर छात्रों के साथ हुई लाठीचार्ज की घटना के विरोध में बुलाई गई थी। सभा में उपस्थित अधिवक्ताओं ने इस घटना की घोर निंदा करते हुए कहा कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में शांतिपूर्ण विरोध-प्रदर्शन करना प्रत्येक नागरिक का संवैधानिक अधिकार है। वक्ताओं ने घटना पर गहरी चिंता व्यक्त करते हुए निष्पक्ष जांच कराने और दोषियों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई करने की मांग की। इस दौरान वरिष्ठ अधिवक्ता डॉ. महेन्द्र सिंह पाल सहित कई वक्ताओं ने देश की शिक्षा व्यवस्था में सुधार करने और युवाओं के भविष्य को सुरक्षित रखने की आवश्यकता पर बल दिया।
सभा के अंत में एसोसिएशन के अध्यक्ष डी.सी.एस. रावत ने सभी युवा शक्तियों का आभार व्यक्त किया और स्पष्ट किया कि हाईकोर्ट बार एसोसिएशन शांतिपूर्ण धरना-प्रदर्शन का पूर्ण समर्थन करती है। इस महत्वपूर्ण कार्यक्रम का संचालन महासचिव सौरव अधिकारी द्वारा किया गया। इस अवसर पर गौरव काण्डपाल, दीप चन्द्र जोशी, कैलाश चन्द्र तिवारी, विक्रम सिंह धपोला, रक्षित जोशी, हर्षित देउपा, अमन जोत सिंह चड्ढा, पूर्वी चौधरी, भुवनेश जोशी, बी० एस० अधिकारी, अनिल कुमार जोशी, योगेश पचोलिया,इंदु शर्मा,मधु नेगी सामंत,दीपा आर्या,दिग्विजय,उन्नति पंत सहित कई अधिवक्तागण उपस्थित रहे।
इधर पेपर लीक के विरोध में आंदोलन कर रहे छात्रों पर हुई पुलिस कार्रवाई के खिलाफ शुक्रवार को नैनीताल विभिन्न संगठनों ने जुलूस प्रदर्शन किया।
छात्र, अधिवक्ता और कई अन्य नागरिक दोपहर में बीएम शाह ओपन एयर थिएटर मल्लीताल में एकत्र हुए और सभा के बाद शांतिपूर्ण मार्च निकालते हुए तल्लीताल गांधी प्रतिमा तक पहुंचे। प्रदर्शनकारियों ने केंद्र सरकार के खिलाफ नारेबाजी करते हुए पेपर लीक पर प्रभावी रोक और शिक्षा व्यवस्था में व्यापक सुधार की मांग की।
वक्ताओं ने कहा कि आंदोलन किसी एक व्यक्ति के इस्तीफे तक सीमित नहीं है, बल्कि देश की पूरी शिक्षा व्यवस्था में सुधार की मांग को लेकर है। लगातार सामने आ रहे पेपर लीक के मामलों से लाखों छात्रों का भविष्य प्रभावित हो रहा है। उन्होंने कहा कि जिन एजेंसियों या कंपनियों पर पहले पेपर लीक के आरोप लग चुके हैं, उन्हें संवेदनशील परीक्षाओं की जिम्मेदारी दोबारा नहीं दी जानी चाहिए।
प्रदर्शनकारियों ने कहा कि पेपर लीक मामलों में दोषियों को समय पर सजा नहीं मिलने से ऐसे अपराधों पर अंकुश नहीं लग पा रहा है। उन्होंने शिक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता और जवाबदेही तय करने की मांग की। वक्ताओं ने कहा कि उत्तराखंड समेत देश के कई राज्यों में पेपर लीक की घटनाएं सामने आ चुकी हैं, इसलिए इसका स्थायी समाधान जरूरी है।
दिल्ली में आंदोलन कर रहे छात्रों पर पुलिस कार्रवाई की आलोचना करते हुए प्रदर्शनकारियों ने आरोप लगाया कि शांतिपूर्ण प्रदर्शन के बावजूद छात्रों के साथ बल प्रयोग किया गया। उन्होंने केंद्र सरकार से हस्तक्षेप की मांग करते हुए केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान से नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए इस्तीफा देने की मांग दोहराई।
इस दौरान राजीव लोचन साह, कैलाश जोशी, प्रभाकर जोशी, डी के जोशी, इदरीश मलिक,निरंजन साह,पी एस सौन, अनुपम कबड़वाल, प्रदीप दुमका, सुभाष जोशी, खुर्शीद, पवन कुमार, दिनेश उपाध्याय, अभिषेक कुमार, दिनेश चंद्र, हिमांशु, शुभम, पीयूष जलाल, रोहित तिवारी, अमन, अवंतिका, रोहित, आशुराज, प्रिया पांडे, मीना बिष्ट, भावेश,त्रिभुवन फर्त्याल,पी के शर्मा, रईस अहमद समेत कई लोग मौजूद थे ।


