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 नैनीताल नगर पालिका को देना है जबाव,
नैनीताल । उत्तराखंड राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण (यूकेएसएलएसए) के सदस्य सचिव प्रदीप मणि त्रिपाठी ने नैनीताल नगर पालिका के अधिशासी अधिकारी को पत्र लिखकर सुखाताल झील की दुर्दशा से अवगत कराया है । साथ ही स्पष्ट किया है कि यदि नगर पालिका सूखाताल की स्वच्छता नहीं कर पा रही है तो राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण को सूचित करे ताकि राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण अपने प्रयासों से सुखाताल की सफाई व रख रखाव की व्यवस्था कर सके ।
 मंगलवार को सालसा के सदस्य सचिव प्रदीप मणि त्रिपाठी ने अपने कार्यालय में पत्रकारों से वार्ता में सुखाताल की बदहाल स्थिति की विस्तृत जानकारी दी । उन्होंने बताया कि उन्होंने कई बार सुखाताल क्षेत्र का भ्रमण किया और हर बार वहां अत्यंत खराब स्थिति देखी ।
 उन्होंने नैनीताल की सुखाताल झील की बदहाली और प्रशासनिक उदासीनता को लेकर  बेहद गंभीर और कड़ा रुख अपनाया गया है।  उच्च न्यायिक सेवा के अधिकारी व सालसा के सदस्य सचिव प्रदीप मणि त्रिपाठी ने कहा है कि कभी नैनीताल की प्राकृतिक धरोहर, पर्यावरणीय संपदा और नगर के गौरव का प्रतीक रही सुखाताल झील आज उपेक्षा, प्रदूषण और प्रशासनिक शिथिलता का शिकार बनकर रह गई है। इस संबंध में नगर पालिका परिषद, नैनीताल के अधिशासी अधिकारी को एक विस्तृत पत्र भेजकर झील की गरिमा को पुनर्स्थापित करने और इसके लिए जिम्मेदार उत्तरदायी अधिकारियों की जवाबदेही सुनिश्चित करने की मांग की गई है।
​ पत्र में कहा है कि झील के भौतिक निरीक्षण के दौरान यहाँ सुरक्षा और स्वच्छता से जुड़ी कई गंभीर कमियां पाई गईं। झील के चारों ओर बने वॉकिंग ट्रैक पर प्लास्टिक की बोतलें, खाद्य सामग्रियों के रैपर और अन्य अजैविक कचरा बिखरा हुआ पाया गया है, जो यहाँ नियमित सफाई और प्रभावी निगरानी के अभाव को दर्शाता है। इसके अतिरिक्त, वॉकिंग ट्रैक पर लगाई गई अधिकांश लाइटें बंद पड़ी हैं, जिससे सूर्यास्त के बाद पूरा क्षेत्र अंधकारमय हो जाता है। इस स्थिति का फायदा उठाकर असामाजिक तत्वों द्वारा वहाँ शराब और अन्य नशीले पदार्थों का सेवन किया जाता है, जिससे स्थानीय परिवारों, महिलाओं और बच्चों में असुरक्षा का माहौल है। साथ ही, क्षेत्र में बड़े पैमाने पर अवैध पार्किंग और खुले में शौच की चिंताजनक घटनाएं भी सामने आई हैं।
​इस पर्यावरणीय संकट में एक और गंभीर पहलू पेयजल की बर्बादी का है। निरीक्षण में पाया गया कि झील के चारों ओर स्थित जलापूर्ति पाइपलाइनों से निरंतर पानी का भारी रिसाव (लीकेज) हो रहा है, जिससे एक तरफ अमूल्य पेयजल व्यर्थ बह रहा है, तो दूसरी तरफ झील का मूल ढांचा प्रभावित हो रहा है। इसके साथ ही, स्थानीय नागरिकों और पर्यटकों को होने वाली असुविधा को देखते हुए यह साफ हो गया है कि जनता के टैक्स के पैसे से निर्मित सार्वजनिक संपत्तियों की देखरेख में घोर लापरवाही बरती जा रही है, जो पूरी तरह से अस्वीकार्य है।
​इन तमाम परिस्थितियों को देखते हुए प्राधिकरण ने स्थानीय प्रशासन को त्वरित और समयबद्ध सुधारात्मक कार्रवाई करने के लिए 10 सूत्रीय कड़े दिशा-निर्देश जारी किए हैं। इसके तहत सुखाताल झील और वॉकिंग ट्रैक की नियमित सफाई, कचरा हटाना, पाइपलाइन के रिसाव को तुरंत ठीक करना, बंद लाइटों को चालू करना और अवैध रूप से खड़े वाहनों को हटाकर पुलिस गश्त बढ़ाने के आदेश दिए गए हैं। प्राधिकरण ने स्पष्ट किया है कि यदि नगर पालिका अपने वैधानिक दायित्वों को निभाने में विफल रहती है, तो जिला विधिक सेवा प्राधिकरण और स्थानीय प्रशासन के सहयोग से इस मामले में कानूनी व दंडात्मक कार्रवाई अमल में लाई जाएगी।

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