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नैनीताल ।  जनपद नैनीताल की समस्त आशा कार्यकर्ताओं ने स्वास्थ्य विभाग और प्रशासन द्वारा बिना किसी पूर्व सूचना और आवश्यक प्रशिक्षण के बीएलओ के साथ सर्वे ड्यूटी लगाए जाने के विरोध में मोर्चा खोल दिया है। इस संबंध में आशा कार्यकर्ताओं के एक प्रतिनिधिमंडल ने मुख्य चिकित्साधिकारी, नैनीताल को एक लिखित ज्ञापन सौंपकर अपनी गंभीर आपत्तियां दर्ज कराई हैं। कार्यकर्ताओं का कहना है कि उन्हें आंगनबाड़ी के माध्यम से अचानक इस नई ड्यूटी की जानकारी मिली है, जो कि पूरी तरह से अनुचित है।
​आशा कार्यकर्ताओं का तर्क है कि वे पहले से ही स्वास्थ्य विभाग की कई अत्यंत महत्वपूर्ण और संवेदनशील योजनाओं के अंतर्गत धरातल पर निरंतर कार्य कर रही हैं, जिसके लिए उन्हें इंसेंटिव दिया जाता है। ऐसे में बिना किसी पूर्व सूचना, परामर्श और बिना कोई तकनीकी प्रशिक्षण दिए उन्हें सीधे नए सर्वे कार्य में झोंक दिया गया है। इसके अलावा, इस अतिरिक्त ड्यूटी के बदले उन्हें क्या प्रोत्साहन राशि या मानदेय दिया जाएगा, विभाग द्वारा इस संबंध में भी कोई स्थिति स्पष्ट नहीं की गई है, जिससे कार्यकर्ताओं में भारी असंतोष है।
​प्रांतीय और जिला स्तर के नेतृत्व में सौंपे गए इस ज्ञापन में आशा कार्यकर्ताओं ने दो टूक चेतावनी दी है कि यदि प्रशासन को उनसे यह सर्वे कार्य करवाना है, तो पहले उन्हें उचित प्रशिक्षण दिया जाए और एक सम्मानजनक मानदेय सुनिश्चित किया जाए। कार्यकर्ताओं ने स्पष्ट किया कि इन शर्तों के पूरा होने के उपरांत ही वे इस ड्यूटी को स्वीकार करेंगी, अन्यथा वे इस कार्य को करने में पूरी तरह असमर्थ हैं।
इस विरोध प्रदर्शन और ज्ञापन सौंपने वालों में प्रदेश अध्यक्षा कमला कुंजवाल, अल्का खाती, भगवती शर्मा, चम्पा जोशी, ममता आर्या, रमा गैड़ा, प्रेमा अधिकारी, प्रभा बिष्ट, नीरु पुजारी, सरिता कुरिया, इंदु बाला, रश्मी राणा, कमला बिष्ट, देवकी रौतेला, हेमा जोशी, दुर्गा टम्टा और मधु दरम्वाल सहित जनपद की कई आशा कार्यकर्ता शामिल रही।

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