खबर शेयर करें 👉
नैनीताल । उत्तराखंड हाईकोर्ट ने नैनीताल जिले की बदहाल सड़कों और पर्यावरण के साथ हो रहे खिलवाड़ पर बेहद सख्त रुख अपनाया है। अवकाशकालीन जज न्यायमूर्ति आलोक महरा की पीठ ने शुक्रवार को सड़कों के किनारे से मलवा हटाने, कूड़े के निस्तारण के लिये 7 दिन का समय दिया है । वर्चुअल माध्यम से कोर्ट में पेश हुए जिलाधिकारी ललित मोहन रयाल ने कोर्ट को आश्वस्त किया है कि सड़कों के गड्ढे भरने व सड़क किनारे जमा मलवे को हटाया जाएगा साथ ही कूड़े का निस्तारण किया जाएगा।
  अनिल यादव द्वारा दायर इस जनहित याचिका ने जिले के पर्वतीय मार्गों पर सुरक्षा मानकों का उल्लंघन कर अवैध डंपिंग होने और कचरा प्रबंधन की विफलताओं को उजागर किया है, जिसे न्यायालय ने गंभीरता से लिया है।
याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता डी.सी.एस. रावत और जय कृष्ण पांडे ने कोर्ट को बताया कि हल्द्वानी-नैनीताल, कालाढूंगी और भवाली-कैंची धाम जैसे व्यस्ततम मार्गों पर निर्माण कार्यों का मलबा जानबूझकर तीखे मोड़ों और ‘ब्लाइंड टर्न्स’ पर फेंका जा रहा है। यह मलबा न केवल यातायात को बाधित कर रहा है, बल्कि मानसून के दौरान फिसलन पैदा कर वाहनों के लिये खतरा बन रहा है। सड़कों पर सुरक्षा दीवारें और क्रैश बैरियर गायब हैं, जिससे स्थानीय निवासियों, स्कूली बच्चों और पर्यटकों की जान हर समय जोखिम में रहती है।
सड़क सुरक्षा के साथ-साथ, याचिका में वनों और पर्यटन स्थलों पर जलाए जा रहे प्लास्टिक कचरे और शराब की बोतलों का मुद्दा भी प्रमुखता से उठाया गया। उन्होंने दलील दी कि यह कृत्य ठोस अपशिष्ट प्रबंधन नियम, 2016 का खुला उल्लंघन है और इससे वन्यजीवों के आवास के साथ-साथ हिमालय की संवेदनशील पारिस्थितिकी को अपूरणीय क्षति पहुँच रही है। प्रशासन की इस चुप्पी को याचिका में नागरिकों के अनुच्छेद 21 (जीवन का अधिकार) का सीधा हनन बताया गया है।
उच्च न्यायालय ने प्रशासनिक उदासीनता पर कड़ी नाराजगी व्यक्त करते हुए जिलाधिकारी, नगर पालिका नैनीताल और नगर निगम हल्द्वानी को स्पष्ट आदेश दिया कि इन राजमार्गों से सारा जमा मलबा और ठोस कचरा तत्काल हटाया जाए। कोर्ट ने साफ किया कि जनसुरक्षा से समझौता कतई बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
न्यायालय के कड़े निर्देश के बाद, जिलाधिकारी नैनीताल ने पीठ को आश्वस्त किया कि प्रशासन युद्धस्तर पर कार्य करेगा। उन्होंने कोर्ट को भरोसा दिलाया कि एक सप्ताह के भीतर चिन्हित सभी मार्गों से निर्माण मलबा हटा दिया जाएगा और कूड़े के वैज्ञानिक निस्तारण की व्यवस्था सुनिश्चित की जाएगी।

You missed

You cannot copy content of this page