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नैनीताल। उत्तराखंड हाईकोर्ट  ने लोक निर्माण विभाग,सिंचाई विभाग व अन्य विभागों के नियमित वर्कचार्ज सेवानिवृत्त कर्मचारियों के पक्ष में एक महत्वपूर्ण अंतरिम आदेश पारित किया है। न्यायमूर्ति सुभाष उपाध्याय की एकल पीठ ने उस सरकारी आदेश के क्रियान्वयन पर रोक लगा दी है, जिसके तहत पुरानी पेंशन योजना  का लाभ ले रहे कर्मचारियों की पेंशन तत्काल प्रभाव से रोकने का निर्देश दिया गया था।
अदालत के इस फैसले से उन बुजुर्ग पेंशनभोगियों को बड़ी राहत मिली है, जिनकी आजीविका पूरी तरह से मासिक पेंशन पर टिकी है। इस मामले में 29 जनवरी को हाईकोर्ट ने रामसिंह सैनी व अन्य की याचिका में 16 जनवरी के आदेश पर रोक लगाई थी । जबकि आज शुक्रवार को विनेश कुमार व अन्य की याचिका में भी यही आदेश पारित हुआ है ।
सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ताओं के अधिवक्ता ने तर्क दिया कि 16 जनवरी 2026 को जारी सरकारी आदेश की धारा 3 ख (v) के माध्यम से पेंशन रोकने का निर्णय लिया गया था। उन्होंने अदालत को बताया कि यह आदेश जारी करने से पहले प्रभावित कर्मचारियों को अपना पक्ष रखने का कोई अवसर नहीं दिया गया और न ही कोई नोटिस दिया गया। बिना किसी पूर्व सूचना के पेंशन बंद करना प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों के विरुद्ध है।
राज्य सरकार की ओर से पेश हुए सरकारी अधिवक्ताओं ने जवाब दाखिल करने के लिए समय की मांग की। अदालत ने मामले की गंभीरता को देखते हुए राज्य सरकार को चार सप्ताह के भीतर अपना जवाबी हलफनामा  पेश करने का निर्देश दिया है। साथ ही, कोर्ट ने स्पष्ट किया कि जब तक मामले की अगली सुनवाई नहीं होती, तब तक याचिकाकर्ताओं की पेंशन पर कोई रोक नहीं लगाई जाएगी और पुरानी व्यवस्था यथावत जारी रहेगी।
इस मामले में कोर्ट ने याचिकाकर्ताओं द्वारा दायर ‘अर्जेन्सी एप्लीकेशन’ और ‘अंतरिम राहत आवेदन’ को स्वीकार करते हुए उनका निस्तारण कर दिया है। अब इस कानूनी लड़ाई का मुख्य आधार यह होगा कि क्या सरकार बिना व्यक्तिगत सुनवाई के एक सामान्य आदेश के जरिए सेवानिवृत्त कर्मचारियों के वित्तीय अधिकारों में कटौती कर सकती है या नहीं।

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