नैनीताल । पी० एम० उषा मेरु के तहत ‘सॉफ्ट कम्पोनेंट इक्विटी एंड इनक्लूसिविटी’ कुमाऊँ विश्वविद्यालय नैनीताल, द्वारा ‘ज्ञानोत्पादन एवं उसके उपभोग में लैंगिक समता एवं समावेशन’ विषय पर एक दिवसीय राष्ट्रीय सेमिनार सोमवार को बुरांश सभागार, हर्मिटेज में आयोजित किया गया।
कार्यक्रम की संयोजक प्रो० चन्द्रकला रावत ने सभी का स्वागत करते हुए अपने वक्तव्य में कहा कि “ज्ञानोत्पादन केवल जानकारी इकट्ठा करना नहीं है, बल्कि अनुसंधान, अनुभव, अध्ययन और उपयोग के माध्यम से नया ज्ञान बनाना, समझना और साझा करने की एक सतत प्रक्रिया है। हमें शिक्षा में समानता और समावेशिता का वातावरण बनाना आवश्यक है, जहाँ जाति, वर्ग, धर्म या लिंग के भेदभाव के बिना सभी को समान अवसर मिलें।” उन्होंने कुलपति कुमाऊँ विश्वविद्यालय प्रो. डी.एस. रावत का इस कार्यक्रम को आयोजित कराने में मार्गदर्शन हेतु आभार व धन्यवाद प्रकट किया।
कार्यक्रम अध्यक्ष प्रो० नीता बोरा शर्मा ने अपने वक्तव्य में कहा कि ‘ज्ञान केवल पुस्तकों तक सीमित नहीं है, बल्कि अनुभव, शोध, विचार और संवाद से निर्मित होता है। उन्होंने भारतीय संविधान में निहित समता एवं समानता संबंधी प्रावधानों का उल्लेख करते हुए समय-समय पर न्यायपालिका द्वारा दिए गए निर्णयों के द्वारा समाज में समता एवं समावेशन स्थापित करने के उदाहरण दिए।
मुख्य वक्ता प्रो. भीमा मनराल द्वारा अपने वक्तव्य में जेंडर इक्विटी एंड इन्क्लूसिविटी की समाज में आवश्यकता व स्वस्थ समाज के निर्माण में यह किस प्रकार सहायक है इसे विस्तारपूर्वक सभी के समक्ष रखा । उन्होंने ज्ञान उत्पादन के विभिन्न स्रोतों पर विस्तारपूर्वक प्रकाश डालते हुए कहा कि स्वस्थ समाज के निर्माण हेतु सभी को ज्ञान उपभोग के तथा व्यवहारिक जीवन में उसके क्रियान्वयन के समान अवसर मिलने बेहद आवश्यक हैं। साथ ही वर्तमान युग में डिजिटल साक्षरता की महत्ता पर भी प्रकाश डाला।
इक्विटी एंड इन्क्लूसिविटी सॉफ्ट कंपोनेंट की सदस्य प्रो. हरिप्रिया पाठक द्वारा सभी का धन्यवाद ज्ञापन किया गया। तदोपरांत सभी प्रतिभागियों को प्रमाण पत्र वितरित किए गए। कार्यक्रम का संचालन सुश्री सृष्टि गंगवार ने किया। इस अवसर पर प्रो. एच.सी.एस. बिष्ट, प्रो. शिरीष कुमार मौर्य, प्रो.जया तिवारी, डॉ. अशोक उप्रेती, डॉ. सरोज शर्मा, सुश्री मेधा नैलवाल, सुश्री निकिता बिष्ट, शिवानी शर्मा, हिमांशु विश्वकर्मा, धीरज, देवेन्द्र कुमार, ईश्वर, दीपांशु, कार्तिकेय, विदुषी, निकिता, अनुश्री सहित अनेक प्राध्यापकगण, शोधार्थी एवं विद्यार्थी उपस्थित रहे।


