खबर शेयर करें 👉

नैनीताल ।  कुछ माह पहले नैनीताल प्रवास के दौरान मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी नैनीताल प्रवास के दौरान फ्लैट मैदान व खिलाड़ियों के लिए कई घोषणाएं कर गए । इन घोषणाओं के अनुपालन का स्थानीय लोगों व खिलाड़ियों को बेसब्री से इंतजार है ।वर्तमान में उनके कट्टर समर्थक मनोज जोशी डी एस ए के महासचिव हैं । जिससे मुख्यमंत्री की घोषणा के पालन की संभावना अधिक बढ़ जाती है ।

दूसरी ओर भाजपा के नगर महामंत्री हरीश राणा ने शुक्रवार को नैनीताल क्लब में पत्रकार वार्ता कर डी एस ए द्वारा लीज समाप्त होने के बावजूद भी नजूल संपत्ति में कब्जे को लेकर गम्भीर सवाल उठाये ।

नैनीताल जिमखाना की जमीन पर अवैध कब्जे का आरोप, खेल सुविधाओं की कमी पर उठे सवाल
नैनीताल । समाजसेवी व भाजपा नगर उपाध्यक्ष हरीश राणा ने नैनीताल क्लब में पत्रकार वार्ता कर नैनीताल जिमखाना और आवास विभाग की नजूल भूमि पर अवैध कब्जे का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि यह संपत्ति शासन की है, इसके बावजूद नगर पालिका नैनीताल और जिमखाना एग्रीमेंट के तहत वहां पार्किंग का निर्माण कर रहा है।
हरीश राणा ने ईद पर जिमखाना परिसर में नमाज को लेकर पैदा हुई विवाद की स्थिति की आलोचना की। उन्होंने जिला प्रशासन से मांग की कि नगर पालिका की ओर से सड़क चौड़ीकरण के नाम पर जो पार्किंग बनाई जा रही है, उससे आज तक हुई वसूली का संज्ञान लिया जाए और कब्जेदार संस्था से वसूली की जाए। उन्होंने यह भी कहा कि सरकारी पैसा खर्च होने के बावजूद खिलाड़ियों को कोई खेल सुविधा नहीं मिल रही है। नैनीताल में बॉक्सिंग रिंग नहीं है, हॉकी टर्फ नहीं है, केवल क्रिकेट ही संचालित हो रहा है। खिलाड़ियों को अन्य खेलों की सुविधाओं की भी सख्त जरूरत है। राणा ने जिला प्रशासन से अनुरोध किया कि सरकार का पैसा बेवजह खर्च होने से रोका जाए और जिमखाना परिसर में सभी खेलों के लिए सुविधाएं विकसित की जाएं ताकि स्थानीय युवाओं को लाभ मिल सके।

ALSO READ:  कांग्रेस नेता अनुपम कबड़वाल ने भी की दोपहिया वाहनों से 100 रुपया लेकब्रिज चुंगी वसूलने का विरोध ।

इन विवादों के बीच पूर्व उपाध्यक्ष व वरिष्ठ पत्रकार प्रयाग पांडे ने अहम टिप्पणी की है ।

 

हंगामा है क्यों बरपा? आलेख –: श्री प्रयाग पांडे,वरिष्ठ पत्रकार,पूर्व उपाध्यक्ष नगर पालिका नैनीताल।

सोशल मीडिया में इन दिनों नैनीताल का खेल का मैदान (फ़्लैट्स) की यकायक चर्चा तेज हो गई है। फ़्लैट्स के स्वामित्व एवं प्रबंधन को लेकर सवाल उठाए जा रहे हैं। वस्तुस्थिति यह है कि जब से नैनीताल में बसासत हुई, यहाँ नगरीकरण हुआ, नगर पालिका कमेटी अस्तित्व में आई, तब से फ़्लैट्स का प्रबंधन एवं नियंत्रण निर्बाध रूप से नगर पालिका के पास ही रहा है। नैनीताल नगर के बसने के प्रारंभिक चरण से ही नगर पालिका फ़्लैट्स का विकास, देखरेख एवं अन्य निर्माण गतिविधियां संचालित करते चली आ रही है। चूंकि फ्लैट्स में टेनिस कोर्ट, स्टेडियम आदि निर्माण कार्यों के लिए वित्तीय संशाधन प्राप्त करने में नगर पालिका को वैधानिक अड़चनें आ रही थीं, इसलिए 1897 में वैधानिक रूप से फ़्लैट्स का प्रबंधन एवं नियंत्रण नगर पालिका कमेटी के हवाले कर दिया गया था।

नॉर्थ वेस्टर्न प्रोविंसेज एंड अवध के तत्कालीन लेफ्टिनेंट गवर्नर सर एंटोनी मैकडॉनल के निर्देशानुसार नगर पालिका कमेटी ने 11 सितंबर,1900 की बैठक में फ़्लैट्स के प्रबंधन के लिए नियम बनाए, जिन्हें ‘रूल फ़ॉर द मैनेजमेंट ऑफ द फ़्लैट्स’ कहा गया। इन्हीं नियमों के अंतर्गत फ़्लैट्स तथा टेनिस कोर्ट के प्रबंधन के लिए जिमखाना कमेटी बनाई गई। निर्णय लिया गया कि जिमखाना कमेटी प्रतिवर्ष नगर पालिका को एक हजार रुपये किराया देगी। यानी नगर पालिका को फ़्लैट्स को किराए पर देने का अधिकार प्राप्त था। यूनाइटेड प्रोविंसेज सरकार के म्युनिसिपल डिपार्टमेंट के 11 जनवरी, 1939 को जारी शासनादेश संख्या 5930/XI- 699 द्वारा फ़्लैट्स मध्ये दो एकड़,दो रोड, दो पोल और 21 वर्ग गज जमीन नगर पालिका के नियंत्रण एवं प्रबंधन में हस्तांतरित कर दी गई थी।

ALSO READ:  अखिल भारतीय नौ सैनिक शिविर में डीएसबी परिसर के कैडेटों का राष्ट्रीय स्तर पर उत्कृष्ट प्रदर्शन, दो स्वर्ण, एक रजत एवं एक कांस्य पदक पर कब्जा किया,

तब से 2025 तक फ़्लैट्स पर नगर पालिका के प्रबंधन एवं नियंत्रण को लेकर कोई सवाल नहीं उठा। 2025 में जब नगर पालिका में निर्वाचित प्रतिनिधि नहीं थे, पालिका प्रशासन के नियंत्रण में थी। प्रशासनिक बोर्ड में एक प्रशासनिक अधिकारी की जिद से फ़्लैट्स को तीस वर्ष की लीज पर खेल विभाग को देने का निर्णय ले लिया गया। प्रशासनिक बोर्ड ने इस संबंध में खेल विभाग के साथ लीज अनुबंध-पत्र भी निष्पादित कर दिया। यह दीगर बात है कि फ़्लैट्स को खेल विभाग को लीज पर दिए जाने वाले निर्णय एवं इस संबंध में निष्पादित अनुबंध की प्रक्रिया एवं इसकी वैधानिकता सवालों के घेरे में है। यक्ष प्रश्न यह है कि जब नगर पालिका का फ़्लैट्स में कोई विधिक अधिकार नहीं था या है, तो खेल विभाग ने नगर पालिका से फ़्लैट्स का तीस साला लीज अनुबंध क्यों किया?

जिस नगर पालिका ने एक वीरान जंगल को अत्याधुनिक सुविधाओं से संपन्न नगर के रूप में विकसित किया, आज वह इतनी निरीह और असहाय हो गई है, यह निश्चित ही गंभीर चिंता का विषय है।

 

You missed

You cannot copy content of this page