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नैनीताल । ‘ऑल इण्डिया लॉयर्स एसोसिएशन फॉर जस्टिस’ के तत्वाधान में आज नैनीताल हाईकोट बार एसोसिएशन के सभागार में पेशावर क्रांति (23 अप्रैल 1930) के महानायक वीर चन्द्र सिंह गढ़वाली को याद करते हुए एक विशेष सभा का आयोजन किया गया।

 

सभा की अध्यक्षता बार एसोसिएशन के पूर्व अध्यक्ष श्री एम.सी. पंत ने की, जबकि संचालन पूर्व अध्यक्ष श्री डी.एस. मेहता द्वारा किया गया। इस दौरान वक्ताओं ने गढ़वाली जी के अदम्य साहस और उनके द्वारा निहत्थे अफगान प्रदर्शनकारियों पर गोली चलाने से इनकार करने की ऐतिहासिक घटना को याद किया।

 

​सभा को संबोधित करते हुए अधिवक्ता नवनीश नेगी ने बताया कि वीर चन्द्र सिंह गढ़वाली, जो उस समय रॉयल गढ़वाल रायफल्स में हवलदार थे, उन्होंने ब्रिटिश हुकूमत के आदेश को ठुकरा कर मानवता की मिसाल पेश की थी। इस वीरता के लिए देश के प्रथम प्रधानमंत्री जवाहर लाल नेहरू ने उन्हें सर्वप्रथम ‘वीर’ की उपाधि से नवाजा था। वरिष्ठ अधिवक्ता कैलाश तिवारी ने जोर देकर कहा कि वीर चन्द्र सिंह गढ़वाली न केवल देश के स्वतंत्रता सेनानी थे, बल्कि वे उत्तराखंड के असली नायक भी हैं, जिन्होंने जीवनपर्यंत किसानों और मजदूरों के हितों की लड़ाई लड़ी।

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​संगोष्ठी में वक्ताओं ने वर्तमान न्याय प्रणाली और सामाजिक संघर्षों में उनकी प्रासंगिकता पर भी चर्चा की। अधिवक्ता त्रिभुवन फत्याल ने कहा कि गढ़वाली जी के बताए रास्तों पर चलकर ही आम जनता के खिलाफ हो रहे अन्याय और उनके अधिकारों की रक्षा की जा सकती है। उन्होंने कहा कि आज के दौर में केवल उन्हें याद करना काफी नहीं है, बल्कि उनके संघर्ष के मूल्यों को आत्मसात करने की आवश्यकता है।

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​सभा में सर्वसम्मति से एक महत्वपूर्ण प्रस्ताव पारित किया गया, जिसमें सरकार और इतिहासकारों से मांग की गई कि इतिहास की पुस्तकों में दर्ज ‘पेशावर कांड’ शब्द को बदलकर सम्मानजनक रूप से ‘पेशावर क्रांति’ दर्ज किया जाए। कार्यक्रम में पूर्व सचिव कमलेश तिवारी, भुवनेश जोशी, विश्वस्थ काण्डपाल, निरंजन साह, अशोक बेनीवाल और अविदित नौलियाल सहित कई वरिष्ठ अधिवक्ता उपस्थित रहे। अंत में संयोजक दुर्गा सिंह मेहता ने सभी का आभार व्यक्त किया।

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