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नैनीताल । शिल्पकार सभा नैनीताल की मासिक बैठक में होमगार्ड एवं नागरिक सुरक्षा उत्तराखंड द्वारा 24 अप्रैल 2026 को जारी भर्ती विज्ञप्ति में रोस्टर नियमों का पालन न किए जाने पर गहरा रोष व्यक्त किया गया। बैठक में वक्ताओं ने कहा कि उक्त विज्ञप्ति के माध्यम से 920 अभ्यर्थियों से आवेदन आमंत्रित किए गए हैं, किंतु आरक्षण एवं रोस्टर व्यवस्था के अनुरूप पदों का निर्धारण नहीं किया गया है।
सभा के अध्यक्ष रमेश चंद्रा ने कहा कि उत्तराखंड राज्य में अनुसूचित जाति वर्ग को 19 प्रतिशत आरक्षण प्राप्त है। इस आधार पर 920 पदों में अनुसूचित जाति वर्ग के लिए लगभग 175 पद आरक्षित होने चाहिए थे, जबकि विज्ञप्ति में पूरे प्रदेश में मात्र 48 पद ही दर्शाए गए हैं। यह अनुसूचित जाति वर्ग के बेरोजगार युवाओं के साथ अन्याय है।
उन्होंने कहा कि एक ओर सरकार “सबका साथ, सबका विकास” का नारा देती है, वहीं दूसरी ओर आरक्षण नीति एवं रोस्टर नियमों की अनदेखी की जा रही है। इससे अनुसूचित जाति वर्ग के युवाओं में निराशा एवं असंतोष व्याप्त है।
बैठक में यह भी कहा गया कि राज्य के 11 जिलों में अनुसूचित जाति वर्ग के लिए शून्य पद दर्शाना अत्यंत गंभीर विषय है। यह न केवल संवैधानिक प्रावधानों की अवहेलना है, बल्कि सामाजिक न्याय की भावना के भी विपरीत है।
सभा के सलाहकार पी.आर. आर्य, मंत्री अनिल गोरखा तथा लेखापरीक्षक संजय कुमार ने भी अपने विचार व्यक्त करते हुए कहा कि सरकार को तत्काल इस भर्ती प्रक्रिया की समीक्षा कर आरक्षण नियमों का पूर्ण पालन सुनिश्चित करना चाहिए।
सभा अध्यक्ष ने चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि विज्ञप्ति जारी हुए एक सप्ताह से अधिक समय बीत चुका है, किंतु सत्ता पक्ष एवं विपक्ष के आरक्षित वर्ग के जनप्रतिनिधियों द्वारा इस विषय पर कोई ठोस प्रतिक्रिया नहीं दी गई है। वर्तमान में उत्तराखंड में 14 विधायक आरक्षित वर्ग से हैं, फिर भी उनका मौन रहना चिंताजनक है।
शिल्पकार सभा नैनीताल ने राज्य सरकार से मांग की है कि भर्ती विज्ञप्ति की तत्काल समीक्षा कर रोस्टर नियमों एवं आरक्षण व्यवस्था के अनुरूप पदों का पुनर्निर्धारण किया जाए, ताकि अनुसूचित जाति वर्ग के युवाओं को न्याय मिल सके।

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