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सर्वत्र इसी मतगणना की चर्चा । अब सबकी निगाहें हाईकोर्ट में 18 अगस्त को होने वाली सुनवाई पर ।

 

नैनीताल । जिला पंचायत नैनीताल के अध्यक्ष व उपाध्यक्ष पद के चुनाव की मतगणना शुक्रवार की सुबह 3 बजे की गई । लेकिन निर्वाचन आयोग ने इन परिणामों को सार्वजनिक नहीं किया है और मतपत्रों की गणना के बाद उन्हें नैनीताल कोषागार के डबल लॉकर में रखा गया है । जिन्हें 18 अगस्त को हाईकोर्ट के समक्ष प्रस्तुत किया जाएगा ।

सुबह हुई मतगणना की जानकारी देते हुए जिलाधिकारी वन्दना ने पत्रकारों को बताया कि उन्होंने मतदान के दिन उपजे हालात के दौरान हाईकोर्ट को बताया था कि वह पुनर्मतदान के लिये चुनाव आयोग को संस्तुति करेंगी । लेकिन 2019 में हाईकोर्ट ने एक याचिका में महत्वपूर्ण निर्णय पारित किया है । जिसमें जिला पंचायत अध्यक्ष व उपाध्यक्ष के चुनाव की मतदान में पुनर्मतगणना का प्रावधान नहीं है और नियमावली के अनुसार मतदान समाप्त होने के तुरंत बाद मतगणना का प्रावधान है ।

जिलाधिकारी के अनुसार इस क्रम में रात्रि में एस एस पी नैनीताल की रिपोर्ट के आधार पर उन्होंने निर्वाचन आयोग से मतगणना को लेकर दिशा निर्देश मांगे और आयोग के दिशा निर्देशों के क्रम में सुबह 3 बजे मतगणना की गई ।

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बताया कि मतगणना में एक पक्ष के एजेंट,आयोग के आब्जर्बर मौजूद थे । मतगणना की वीडियो रिकॉर्डिंग की गई है ।

इधर भाजपा की जिला पंचायत अध्यक्ष पद की प्रत्याशी के समर्थकों ने अपने पेशबुक व अन्य सोशियल मीडिया प्लेटफॉर्म में पार्टी प्रत्याशी के जीत की बधाई दी है । इन समर्थकों के अनुसार भाजपा प्रत्याशी को कुल पड़े 22 मतों में से 12 मत मिले हैं जबकि कांग्रेस प्रत्याशी को 10 मत मिले हैं । मतदान के दिन भी कांग्रेस के 10 जिला पंचायत सदस्य हाईकोर्ट द्वारा नियुक्त सुरक्षा अधिकारी की सुरक्षा में मतदान के लिये गए थे ।

जबकि उपाध्यक्ष पद पर भाजपा के बहादुर नकदली व कांग्रेस की देबकी बिष्ट को बराबर मत मिलने का दावा किया जा रहा है। जिसके बाद लॉटरी के जरिये निकले परिणाम में कांग्रेस प्रत्याशी के विजयी होने का दावा किया जा रहा है ।

हालांकि प्रशासन ने परिणाम घोषित नहीं किया है और मतगणना में मौजूद एजेंट को भी इस सम्बंध में दिशा निर्देश दिए गए हैं ।

जिला पंचायत अध्यक्ष व उपाध्यक्ष के लिये हुए मतदान से पूर्व 5 जिला पंचायत सदस्यों को बलपूर्वक उठाने के बाद उनके मतदान में भाग न ले सकने व एस एस पी नैनीताल की ओर से इन सदस्यों का कथित शपथ पत्र कोर्ट में पेश करना इस पूरी प्रक्रिया की बहस का अहम हिस्सा है ।

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हाईकोर्ट ने अपने मौखिक आदेश में इन सदस्यों की मतदान में भागीदारी कराने को कहा था । लेकिन 14 अगस्त की शाम को एस एस पी ने कोर्ट को बताया कि ये सदस्य नहीं मिले हैं । एस एस पी ने इन सदस्यों की ओर से दिया गया शपथ पत्र कोर्ट में दिया है जिसमें इन सदस्यों की ओर से कहा गया है कि वे अपनी इच्छा से इस चुनाव में हिस्सा नहीं ले रहे हैं । हाईकोर्ट के निर्देश पर इन शपथ पत्रों को हाईकोर्ट के रजिस्ट्रार ज्यूडिशियल की कस्टडी में सुरक्षित रखा गया है । जो इस मामले की सुनवाई में अहम हो सकते हैं ।

 

जबरन उठाये गए इन सदस्यों के परिजनों ने हाईकोर्ट में दिए बयान में कई गम्भीर आरोप लगाए हैं । एक सदस्य के परिजन ने भाजपा के कई प्रमुख नेताओं के नाम इस अपहरण में शामिल होने की जानकारी हाईकोर्ट को दी है ।

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