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गांव में घर के अंदर नहीं होते शौचालय ?
नैनीताल । घर में शौचालय न होने पर ग्राम प्रधान प्रत्याशी का नामांकन रद्द करने के निर्वाचन अधिकारी के फैसले पर हाईकोर्ट रोक लगाते हुए तत्काल याची को चुनाव चिन्ह जारी करने को कहा है । याची के अनुसार उसका शौचालय घर के अंदर न होकर घर के बाहर था । उत्तराखंड के गांवों में अधिकांशतः घर के बाहर ही शौचालय होते हैं ।
 मुख्य न्यायधीश जी नरेंद्र व न्यायमूर्ति आलोक मेहरा की खण्डपीठ ने  टिहरी निवासी  ग्राम प्रधान की प्रत्याशी कुसुम कोठियाल के घर में शौचालय न होने के कारण उनका  नामांकन रद्द करने के खिलाफ दायर याचिका पर सुनवाई की।  खण्डपीठ ने उनका नामांकन रद्द करने के आदेश पर रोक लगाते हुए राज्य चुनाव  आयोग को निर्देश दिए हैं कि उनको तत्काल चुनाव चिह्न जारी करें ।
 आयोग की तरफ से कहा गया कि नामांकन भरने व उनकी जांच हो  चुकी है। नामांकन पत्र के शपथपत्र के मुताबिक उनका नामांकन सही नहीं पाया गया। कमेटी ने उसकी  जांच के बाद नामांकन पत्र को रद्द किया।
इस पर विरोध दर्ज करते हुए याचिकर्ता की तरफ से कहा गया कि यह नियमों के विरुद्ध जाकर निरस्त किया गया है। जरूरी नहीं है कि घर के अंदर ही शौचालय हो? उनका शौचालय घर से डेढ़ सौ मीटर की दूरी पर है। इसलिये गलत आधार पर उनका नामांकन निरस्त किया है।  उनके घर से डेढ़ सौ मीटर की दुरी पर बना शौचालय उनका व्यक्तिगत है, न की सार्वजनिक।  इसलिए उनके नामांकन पत्र को बहाल किया जाय। कोर्ट ने इस तर्क को सही ठहराया है ।

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