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*एक माह में होगा सर्वे, हर सप्ताह चलेगा संयुक्त अभियान, अवैध पार्किंग और अतिक्रमण पर होगी सख्त कार्रवाई*

*वरिष्ठ नागरिकों, महिलाओं और दिव्यांगजनों की सुविधा के लिए प्रशासन सख्त, फुटपाथों की मरम्मत और सुगम्यता बढ़ाने के निर्देश*

हल्द्वानी ।

जिलाधिकारी ललित मोहन रयाल ने अवगत कराया कि संज्ञान में आया है कि जनपद नैनीताल के विभिन्न नगरीय क्षेत्रों में स्थित फुटपाथों पर स्थायी एवं अस्थायी प्रकृति के अतिक्रमण, व्यावसायिक प्रतिष्ठानों का अनधिकृत विस्तार, वेला-फड़, निर्माण सामग्री का भंडारण वाहनों की अवैध पार्किंग, विज्ञापन सामग्री की अनधिकृत स्थापना तथा गड्डों, टूट-फूट एवं अन्य अवरोधों के कारण फुटपाथ पैदल यात्रियों के उपयोग हेतु अनुपयुक्त एवं असुरक्षित हो गए हैं।

जिसके परिणामस्वरूप नागरिकों, विशेषकर वरिष्ठ नागरिकों, महिलाओं, बच्चों एवं दिव्यांगजनों को मुख्य सड़क पर चलने के लिए विवश होना पड़ता है, जिससे दुर्घटनाओं की सम्भावना बढ़ जाती है।

उन्होंने अवगत कराया कि माननीय सर्वोच्च न्यायालय द्वारा समय-समय पर पारित निर्णयों में यह प्रतिपादित किया गया है कि सार्वजनिक सड़कों एवं फुटपाथों का प्राथमिक उद्देश्य आमजन के आवागमन की सुविधा सुनिश्चित करना है तथा राज्य एवं स्थानीय निकायों का यह संवैधानिक दायित्व है कि वे नागरिकों के सुरक्षित एवं निर्बाध आवागमन के अधिकार का संरक्षण करें।
विशेष रूप से  सर्वोच्च न्यायालय द्वारा सौदान सिंह एवं अन्य बनाम New Delhi Municipal Committee एवं अन्य (AIR 1989 SC 1988) में यह प्रतिपादित किया गया कि फुटपाथों एवं सार्वजनिक मार्गों का मूल उद्देश्य आमजन के आवागमन की सुविधा है तथा किसी भी गतिविधि के कारण पैदल यात्रियों के अधिकार बाधित नहीं होने चाहिए।
Municipal Corporation of Greater Mumbai बनाम Kohinoor CTNL Infrastructure
2 Co. Pvt. Ltd. सहित विभिन्न वादों में सार्वजनिक मागों को अतिक्रमणमुक्त रखने की जिम्मेदारी स्थानीय
प्रशासन एवं निकायों की मानी गई है।
माननीय उच्च न्यायालय, उत्तराखण्ड द्वारा भी समय-समय पर सार्वजनिक स्थलों एवं मार्गो पर अतिक्रमण हटाने तथा नागरिक सुविधाओं को प्राथमिकता देने संबंधी निर्देश पारित किए गए हैं, जिनका अनुपालन सुनिश्चित किया जाना आवश्यक है।

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भारतीय संविधान के अनुच्छेद 21 के अंतर्गत जीवन एवं गरिमापूर्ण जीवन के अधिकार में सुरक्षित एवं सुगम आवागमन का अधिकार निहित है।

उक्त के मद्देनजर जिलाधिकारी ललित मोहन रयाल द्वारा आदेश जारी करते हुए जनहित में तत्काल प्रभाव से कार्यवाही के निर्देश दिए है।

जिलाधिकारी ने आदेश में
नगर आयुक्त,नगर मजिस्ट्रेट हल्द्वानी सहित समस्त उप जिलाधिकारियों, अधिशासी अभियन्ता/अधिशासी अधिकारियों को अपने-अपने क्षेत्राधिकार में संबंधित नगर निकाय, लोक निर्माण विभाग तथा पुलिस विभाग के अधिकारियों के साथ संयुक्त टीम गठित कर एक माह के भीतर फुटपाथों का व्यापक सर्वेक्षण कराएंगे।

अतिक्रमण का वर्गीकरण

उन्होंने निर्देश देते हुए कहा कि सर्वेक्षण के दौरान अतिक्रमण को वर्गीकरण व श्रेणियों में पृथक करते हुए उसका विवरण तैयार कर उपलब्ध कराया जाय।
उन्होंने कहा कि स्थायी अतिक्रमण,अस्थायी अतिक्रमण,व्यावसायिक विस्तार,अवैध पार्किंग, निर्माण सामग्री का भंडारण,
गड्ढे एवं क्षतिग्रस्त फुटपाथ,
दिव्यांगजन हेतु अवरोध के संबंध में पूर्ण विवरण उपलब्ध कराएं।

जिलाधिकारी ने संबंधित विभागों के अधिकारियों को निर्देश दिए कि वह अतिक्रमणकर्ताओं को संबंधित अधिनियमों एवं उपविधियों के अंतर्गत नोटिस जारी करेंगे तथा निर्धारित अवधि में अतिक्रमण न हटाने पर बलपूर्वक निष्कासन की कार्रवाई भी करेंगे।

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जारी आदेशानुसार जिलाधिकारी ने विशेष प्रवर्तन अभियान चलाने के संबंध में नगर आयुक्त, नगर मजिस्ट्रेट हल्द्वानी व सभी उपजिलाधिकारियों,
अधिशासी अभियन्ता, अधिशासी अधिकारी को अपने क्षेत्र में प्रति सप्ताह न्यूनतम एक संयुक्त अभियान संचालित करने के निर्देश देते हुए कहा कि इस अभियान में नगर निकाय, पुलिस एवं संबंधित विभागों की सहभागिता सुनिश्चित की जाए।

जिलाधिकारी द्वारा जारी आदेशानुसार फुटपाथों की मरम्मत के संबंध में लोक निर्माण विभाग एवं संबंधित नगर निकाय को अपने नियंत्रणाधीन फुटपाथों की जांच कर गड्डों, धंसाव, टूट-फूट एवं क्षतिग्रस्त हिस्सों का समयबद्ध मरम्मत कार्य प्राथमिकता के आधार पर पूर्ण करने के निर्देश दिए हैं।

उन्होंने आदेश में स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि दिव्यांगजन अधिकार अधिनियम, 2016 की भावना के अनुरूप आवश्यकतानुसार रैम्प टैक्टाइल पाथ एवं अन्य सुगम्यता सुविधाएं विकसित की जाएंगी।
साथ ही अवैध पार्किंग पर रोक भी रोक लगाने हेतु निर्देश दिए हैं कि फुटपाथों का उपयोग किसी भी दशा में वाहन पार्किंग हेतु नहीं किया जाएगा। उल्लंघन की स्थिति में मोटर वाहन अधिनियम के अंतर्गत पुलिस एवं परिवहन विभाग द्वारा आवश्यक कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी।

जिलाधिकारी ने जारी आदेश में नोडल अधिकारी नामित करने हेतु निर्देश दिए कि प्रत्येक नगर निकाय एक नोडल अधिकारी नामित करेगा, जो नागरिक शिकायतों का निस्तारण कर पाक्षिक प्रगति रिपोर्ट उपलब्ध कराएगा।

जिलाधिकारी ने कहा कि इस हेतु उत्तरदायित्व निर्धारण किया जाएगा, उन्होंने कहा है कि निर्देशों के अनुपालन में शिथिलता, उदासीनता अथवा लापरवाही पाए जाने पर संबंधित अधिकारी/कर्मचारी के विरुद्ध प्रचलित सेवा नियमों के अंतर्गत उत्तरदायित्व निर्धारित करते हुए अनुशासनात्मक कार्यवाही की जाएगी।

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