नैनीताल। उत्तराखंड हाईकोर्ट द्वारा राजकीय इण्टर कॉलेजों में कार्यरत् प्रवक्ताओं के चयन वेतनमान के पुर्ननिर्धारण करने के शासन के 18 दिसम्बर के आदेश पर अग्रिम आदेशों तक रोक लगा दी हैं।
सुशील तिवारी, धीरेन्द्र मिश्र, विनोद पैन्यूली, शंकर बोरा एवं अन्य प्रवक्ताओं द्वारा उच्च न्यायालय में याचिकायें दाखिल की गयी जिनमें उनके द्वारा “सरकारी सेवक वेतन नियमावली प्रथम संसोधन 2025 एवं वित्त सचिव द्वारा चयन वेतनमान का पुर्ननिर्धारण करने के संबंध में जारी आदेश 18 दिसम्बर 2025 को चुनौती दी गयी।
याचिकाकर्ताओं के अधिवक्ता ललित सामंत के अनुसार प्रवक्ताओं एवं सहायक अध्यापक एल.टी.ग्रेड को 2026 की सरकारी सेवक वेतन नियमावली 2016 के अनुसार चयन वेतनमान व प्रोन्नत वेतन वेतनमान देते समय एक इंक्रीमेंट देय है परन्तु राज्य सरकार द्वारा उक्त नियमावली में संसोधन करते हुए सरकारी सेवक वेतन नियमावली प्रथम संसोधन 2025 का प्राख्यापन करते हुए इसे 01 जनवरी 2016 से लागू कर दिया गया है । जिसके अनुसार अब चयन/प्रोन्नत वेतनमान के समय प्रदत्त एक इंकीमेंट को समाप्त कर दिया है साथ ही वित्त सचिव द्वारा 18 दिसम्बर 2025 को आदेश जारी करते हुए चयन/प्रोन्नत वेतनमान का पुर्ननिर्धारण, संसोधित नियमावली 2025 के अनुसार करने के लिये आदेश जारी किया गया। याचिकाकर्ताओं द्वारा याचिका में कहा गया है कि राज्य सरकार द्वारा उक्त संसोधन केवल शैक्षिक संवर्ग के कर्मचारियों पर लागू किया गया है, उनके द्वारा यह भी कहा गया कि राज्य सरकार 2016 की वेतन नियमावली के अनुसार चयन/प्रोन्नत वेतनमान में देय एक इंक्रीमेंट को भूतलक्षी प्रभाव से समाप्त नहीं कर सकती, राज्य सरकार की यह कार्यवाही संविधान के अनुच्छेद 14,16 एवं मा० सर्वोच्च न्यायालय द्वारा पारित आदेशों का उल्लंघन है।
मामले की सुनवाई करते हुए न्यायमूर्ति रविन्द्र मैठानी एवं न्यायमूर्ति आलोक मेहरा द्वारा याचिका को स्वीकार करते हुए वित्त सचिव द्वारा जारी चयन वेतनमान के पुर्ननिर्धारण करने के आदेश पर अग्रिम आदेशों तक रोक लगा दीं साथ ही राज्य सरकार को चार सप्ताह का समय प्रतिशपथ पत्र दाखिल करने के निर्देश दिये। मामले की अगली सुनवाई माह अप्रैल में नियत की गई है।


