नैनीताल। जिला एवं सत्र न्यायाधीश, नैनीताल प्रशांत जोशी की अदालत ने एक युवती से दुराचार करने के आरोपी नरेश पाण्डे द्वारा दायर अग्रिम जमानत प्रार्थना पत्र को सुनवाई के लिए कानूनी रूप से स्वीकार्य (संधारणीय) माना है।
मामला थाना मल्लीताल में दर्ज अपराध संख्या 19/2026 से जुड़ा है, जिसमें आरोपी पर भारतीय न्याय संहिता, 2023 की धारा 351(2) और धारा 69 के तहत मुकदमा दर्ज किया गया है। पीड़िता ने आरोपी पर उसकी 17 वर्ष की उम्र से भविष्य में शादी करने का झांसा देकर लैंगिक शोषण करने का आरोप लगाया है।
सुनवाई के दौरान दोनों पक्षों के बीच कानूनी पक्ष पर विस्तृत बहस हुई। राज्य सरकार की ओर से जिला शासकीय अधिवक्ता (फौजदारी) सुशील कुमार शर्मा ने तर्क दिया कि दण्ड प्रक्रिया संहिता (उत्तराखण्ड संशोधन) विधेयक 2019 के प्रावधानों के तहत यह याचिका विचारणीय नहीं है। वहीं, आरोपी के वकील संजय सुयाल और वीसी के माध्यम से जुड़े पंकज कुलौरा ने दलील दी कि वर्तमान मामला भारतीय न्याय संहिता की धारा 64, 65 या 70 के अंतर्गत नहीं आता है, और न ही इस मामले में पोक्सो एक्ट की धाराएं लगाई गई हैं, इसलिए अग्रिम जमानत याचिका पर सुनवाई की जा सकती है।
न्यायालय ने दोनों पक्षों के तर्कों और कानूनी धाराओं का गहनता से अनुशीलन करने के बाद यह निष्कर्ष निकाला कि आरोपी पर वर्तमान में जो धाराएं लगाई गई हैं, उनके मद्देनजर भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता, 2023 की धारा 482(4) या उत्तराखण्ड संशोधन अधिनियम के तहत अग्रिम जमानत पर कोई कानूनी रोक प्रभावी नहीं होती है। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि वर्तमान चरण में केवल जमानत याचिका की स्वीकार्यता पर विचार किया जा रहा है, न कि अपराध की विस्तृत विवेचना पर। इस आधार पर अदालत ने याचिका को विधितः संधारणीय माना है।
सत्र न्यायालय ने आदेश जारी करते हुए नरेश पाण्डे की अग्रिम जमानत प्रार्थना पत्र को आधिकारिक रजिस्टर में दर्ज करने का निर्देश दिया है। इसके साथ ही, अदालत ने राज्य सरकार को इस संबंध में नोटिस जारी कर संबंधित थाने से विस्तृत आख्या (रिपोर्ट) तलब की है। कोर्ट ने पुलिस प्रशासन से प्रार्थी/अभियुक्त का यदि कोई आपराधिक इतिहास हो, तो उसकी जानकारी भी मांगी है। इस मामले में अगली सुनवाई और आपत्ति दाखिल करने के लिए 26 मई 2026 की तिथि निर्धारित की गई है।


