अधिमास 2026 शुरू होने का दिन*
16 मई 2026, शनिवार से शुरू होकर 15 जून 2026, सोमवार तक रहेगा । 16 मई को वट सावित्री (अमावस्या) है और उसी दिन से मल मास शुरू हो जाएगा ।
इस बार ज्येष्ठ माह में अधिकमास का संयोग बन रहा है। इसी वजह से 2026 में ज्येष्ठ महीना करीब 58-60 दिन का होगा ।
*अधिमास क्या है और क्यों आता है ।
हिंदू पंचांग में 12 महीने होते हैं, पर हर 3 साल में एक अतिरिक्त महीना जुड़ जाता है। इसे ही अधिकमास, मलमास या पुरुषोत्तम मास कहते हैं।
सौर वर्ष 365 दिन का और चंद्र वर्ष 354 दिन का होता है। हर साल 11 दिन का अंतर आता है। 32 महीने 16 दिन में ये अंतर पूरा एक महीना बन जाता है। इसी अंतर को ठीक करने के लिए पंचांग में एक अतिरिक्त चंद्र मास जोड़ दिया जाता है।
पौराणिक कथा के अनुसार सभी महीनों के अपने देवता थे, पर अधिकमास का कोई स्वामी नहीं था। लोग इसे “मलमास” कहकर तिरस्कार करते थे। दुखी होकर ये भगवान विष्णु के पास गया। विष्णु इसे श्रीकृष्ण के पास गोलोक ले गए। श्रीकृष्ण ने इसे अपना नाम दिया और कहा – आज से ये “पुरुषोत्तम मास” कहलाएगा।
भगवान विष्णु का एक नाम ‘पुरुषोत्तम’ भी है, इसलिए इस महीने के अधिपति स्वयं विष्णु माने गए।
स्कंद पुराण के अनुसार इस महीने में किया गया दान, पूजा, व्रत, जप-तप 100 गुना फल देता है। एक दिन की पूजा सामान्य दिनों के 100 दिन की पूजा के बराबर मानी गई है।
ये महीना भगवान विष्णु और श्रीकृष्ण की भक्ति के लिए सबसे उत्तम है।
दान-पुण्य, गीता पाठ, तुलसी पूजा, दीपदान के लिए अत्यंत शुभ।
*अधिकमास में क्या करें*
– *पूजा-पाठ*: रोजाना गीता पाठ, रामायण पाठ, श्रीमद्भागवत कथा, विष्णु सहस्त्रनाम।
– *दान*: अन्न-जल दान, प्याऊ लगवाना, पानी से भरा मटका दान करना, मालपुआ दान, तिल दान।
– *तुलसी पूजा*: तुलसी के पास दीप जलाना और अधिकमास कथा सुनना।
– *व्रत*: पहले दिन व्रत रखना विशेष शुभ, निर्जला एकादशी, गंगा दशहरा, वट सावित्री जैसे व्रत।
*अधिकमास में क्या न करें*
शादी-विवाह, गृह प्रवेश, मुंडन, नामकरण जैसे मांगलिक कार्य वर्जित हैं।
माना जाता है कि इस समय शुभ कार्यों का पूरा फल नहीं मिलता।
साथ ही जल की बर्बादी, दिन में सोना, क्रोध, बैंगन, लहसुन, मांसाहार, मदिरा से बचें। नया घर बनाना या बड़े बच्चों का विवाह भी न करें।
*2026 में खास संयोग*
करीब 8 साल बाद ऐसा संयोग है जब ज्येष्ठ में पुरुषोत्तम मास रहेगा। 2026 में हिंदू नव वर्ष 2083 में 12 की जगह 13 महीने होंगे।
16 मई से 15 जून तक मांगलिक कार्य बंद रहेंगे।
*अधिमास में नवविवाहिता मायके क्यों जाती हैं*
अधिमास यानी मलमास या पुरुषोत्तम मास को हिंदू धर्म में अशुभ माना जाता है। इसी वजह से नवविवाहिता को मायके भेजने की परंपरा है। इसके पीछे 3 मुख्य कारण हैं:
1. *अधिमास को शुभ काम के लिए वर्जित माना गया है*
अधिमास में कोई भी मांगलिक कार्य नहीं होते। विवाह, गृह प्रवेश, मुंडन आदि सब वर्जित हैं। मान्यता है कि इस महीने में किए गए काम का फल नहीं मिलता। नवविवाहिता का ससुराल में रहना भी गृहस्थ जीवन की शुरुआत माना जाता है। इसलिए उसे मायके भेज दिया जाता है ताकि दांपत्य जीवन पर अशुभ प्रभाव न पड़े।
2. *संतान संबंधी मान्यता*
सबसे बड़ी वजह ये है। कहा जाता है कि अधिमास में पति-पत्नी का साथ रहना और संबंध बनाना वर्जित है। मान्यता है कि इस दौरान गर्भधारण से होने वाली संतान शारीरिक या मानसिक रूप से कमजोर हो सकती है। उसे जीवनभर कष्ट झेलने पड़ सकते हैं। नवविवाहिता को मायके भेजकर पति-पत्नी को अलग कर दिया जाता है ताकि अनजाने में भी ये नियम न टूटे।
3. *व्रत-नियम और संयम का महीना*
अधिमास को भगवान विष्णु का महीना कहते हैं। ये जप, तप, दान और संयम का महीना है। नवविवाहिता अगर ससुराल में रहेगी तो नए रिश्ते, नई जिम्मेदारी में वो व्रत-नियम अच्छे से नहीं कर पाएगी। मायके में रहकर वो आराम से पूजा-पाठ, व्रत कर लेती है।
*व्यावहारिक पक्ष भी है*
पहले के समय में 3 साल में एक बार अधिमास आता था। नवविवाहिता को मायके भेजने का मतलब था कि शादी के बाद उसे माता-पिता से मिलने का मौका मिल जाए। ससुराल की नई जिम्मेदारियों से थोड़ा ब्रेक भी मिल जाता था।
*ध्यान देने वाली बात*: ये सब लोक मान्यता और परंपरा है। शास्त्रों में नवविवाहिता को मायके भेजना अनिवार्य नहीं लिखा। कई जगह ये परंपरा नहीं भी मानी जाती। आजकल लोग अपनी सुविधा से फैसला लेते हैं।


