*विषकुंभ योग में मनाया जाएगा इस बार अपरा एकादशी व्रत-:*
ज्येष्ठ मास के कृष्ण पक्ष की एकादशी को अपरा एकादशी नाम से जाना जाता है। इस बार अपरा एकादशी व्रत दिनांक 13 मई 2026 दिन बुधवार को मनाया जाएगा।
*अपरा एकादशी व्रत कथा-:*
इस कथा के अनुसार नंद नंदन भगवान श्री कृष्ण धर्मराज युधिष्ठिर से इस कथा का वर्णन करते हैं। धर्मराज युधिष्ठिर कहते हैं की हे भगवान! ज्येष्ठ मास के कृष्ण पक्ष की एकादशी का क्या नाम है? तथा इसका क्या महत्व है? सो आप विस्तार पूर्वक बताइए। तब नंद नंदन भगवान श्री कृष्ण कहने लगे की हे राजन! यह एकादशी अचला एकादशी या अपरा एकादशी दो नामों से जानी जाती है। क्योंकि यह अपार धन देने वाली है। जो मनुष्य इस व्रत को करते हैं वह संसार में प्रसिद्ध हो जाते हैं। इस दिन भगवान त्रिविक्रम की पूजा की जाती है। अपरा एकादशी के व्रत के प्रभाव से ब्रह्म हत्या, भूत पिशाच योनि, दूसरे की निंदा आदि सभी पाप दूर हो जाते हैं। इस व्रत के करने से पर स्त्री गमन, झूठी गवाही देना, झूठ बोलना आदि आदि सभी पाप नष्ट हो जाते हैं। जो क्षत्रिय युद्ध से भाग जाएं वे नरक गामी होते हैं, परंतु अपरा एकादशी का व्रत करने से वह भी स्वर्ग को प्राप्त होते हैं। जो शिष्य गुरु से शिक्षा ग्रहण करते हैं, फिर उनकी निंदा करते हैं वह भी अवश्य नरक में पड़ते हैं, मगर अपना एकादशी व्रत करने से वे भी पाप से मुक्त हो जाते हैं। जो फल तीनों पुष्कर में कार्तिक पूर्णिमा को स्नान करने से या गंगा तट पर पितरों को पिंडदान करने से प्राप्त होता है, वही फल अपरा एकादशी का व्रत करने से प्राप्त होता है। मकर के सूर्य में प्रयागराज में स्नान से, शिवरात्रि को व्रत करने से, सिंह राशि के बृहस्पति में गोमती नदी के स्नान से, कुंभ में केदारनाथ के दर्शन या बद्रीनाथ के दर्शन करने से, सूर्य ग्रहण में कुरुक्षेत्र में स्नान से, स्वर्ण दान करने से अथवा अर्ध प्रसूता गोदान से जो फल प्राप्त होता है, वही फल अपरा एकादशी व्रत करने से प्राप्त होता है। यह व्रत पाप रूपी वृक्ष को काटने के लिए कुल्हाड़ी है। पाप रूपी अंधकार को मिटाने के लिए सूर्य के समान है। मृगों को मारने के लिए सिंह के समान है। अतः मनुष्य को पापों से डरते हुए इस व्रत को अवश्य करना चाहिए। अपरा एकादशी का व्रत तथा भगवान का पूजन करने से मनुष्य सब पापों से छूटकर विष्णु लोक को जाता है।
*शुभ मुहूर्त-:*
इस बार दिनांक 13 मई 2026 दिन बुधवार को अपरा एकादशी व्रत मनाया जाएगा। इस दिन यदि एकादशी तिथि की बात करें तो 20 घड़ी 15 पल अर्थात दोपहर 1:30 तक एकादशी तिथि रहेगी। यदि नक्षत्र की बात करें तो उत्तरा भाद्रपद नामक नक्षत्र 47 घड़ी 12 पल अर्थात मध्य रात्रि 12:17 तक रहेगा। इस दिन विषकुंभ नामक योग 38 घड़ी 47 पल अर्थात रात्रि 8:55 तक रहेगा। बालव नामक करण 20 घड़ी 15 पल अर्थात दोपहर 1:30 तक है। सबसे महत्वपूर्ण यदि इस दिन के चंद्रमा की स्थिति को जानें तो इस दिन चंद्र देव पूर्ण रूप से मीन राशि में विराजमान रहेंगे।
*पूजा विधि-:*
अपरा एकादशी व्रत के दिन प्रातः ब्रह्म मुहूर्त में उठकर शौच आदि से निवृत होकर किसी नदी या जल स्रोत में स्नान करें यदि संभव न हो तो स्नान के जल में गंगाजल मिलाकर स्नान करें। तदुपरांत स्वच्छ वस्त्र धारण कर तुलसी वृंदावन के समीप एक चौकी में पीला वस्त्र बिछाकर उस पर श्री हरि भगवान विष्णु एवं माता लक्ष्मी की प्रतिमा स्थापित करें। उन्हें शुद्ध जल से स्नान कराएं, फिर पंचामृत स्नान कराएं, पुनः शुद्ध जल से स्नान कराएं। रोली कुमकुम चढ़ाएं अक्षत के स्थान पर जौं का प्रयोग करें। ध्यान रहे उस दिन घर में कोई भी चावल का प्रयोग ना करें। तदुपरांत अपरा एकादशी व्रत कथा किसी ब्राह्मण देव के श्री मुख से श्रवण करें अथवा स्वयं पढ़ें। अंत में आरती के पश्चात तीन बार प्रदक्षिणा करें।
*आलेख-: ज्योतिषाचार्य पंडित प्रकाश जोशी गेठिया नैनीताल।*


