नैनीताल ।
माता जिया रानी, महिला अध्ययन केंद्र में आज के यु आई आई सी, की टीम द्वारा पारंपरिक कला ‘पिछौड़ा’ बनाने पर एक विशेष प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया गया।
इस कार्यशाला में KUIIC टीम की प्रो. गीता तिवारी और डॉ. पेनी जोशी के मार्गदर्शन में छात्र-छात्राओं को पिछौड़ा बनाने की बारीकियाँ सिखाई गईं।
कार्यक्रम में 60 से अधिक छात्र- छात्राओं ने उत्साहपूर्वक भाग लिया और पारंपरिक डिज़ाइन, रंग संयोजन तथा बनाने की तकनीक को व्यावहारिक रूप से जाना।
डॉ किरन तिवारी ने बताया कि पिछौड़ा कुमाऊँ की सांस्कृतिक पहचान का महत्वपूर्ण हिस्सा है और इसे संरक्षित करना समय की आवश्यकता है।
प्रोफेसर नीता बोरा शर्मा माता जिया रानी, महिला अध्ययन केंद्र की निदेशक हैं, जिनके संरक्षण में रंग -वाली पिछौड़ा की सफल प्रशिक्षण का कार्य भी विगत वर्ष से किरन तिवारी और उनकी टीम के द्वारा सफलतापूर्वक संचालित किया जा रहा है ।
इस अवसर पर राकेश, सचिन, सरिता और निकिता भी उपस्थित रहे।
सभी ने प्रतिभागियों के प्रयासों की सराहना करते हुए ऐसे प्रशिक्षण कार्यक्रमों को निरंतर आयोजित करने पर जोर दिया।
कार्यक्रम का उद्देश्य युवाओं को पारंपरिक लोक कला से जोड़ना और उन्हें स्वरोजगार के नए अवसरों के प्रति प्रेरित करना रहा।


