नैनीताल । अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश द्वितीय नैनीताल कुलदीप शर्मा की अदालत ने 1 फरवरी 2017 की रात्रि धारी में एक शासकीय वाहन जलाने व धारी क्षेत्र में प्रतिबंधित संगठन भाकपा (माओवादी) के पोस्टर चिपकाने व दीवारों में माओवादी नारे लिखने के आरोपी खीम सिंह बोरा व भाष्कर पांडे को दोषमुक्त करार दिया है ।
अभियोजन पक्ष के अनुसार 1 फरवरी 2017 की रात धारी तहसील में एक शासकीय वाहन को जला दिया गया था साथ ही इस इलाके में माओवादी नारे लिखे गए । इसमें मामले में अल्मोड़ा से गिरफ्तार किए गए भाष्कर पांडे उर्फ भुवन निवासी अगरतोला तहसील भनोली ने पुलिस को बताया कि यह घटना उन्होंने अपने साथी खीमसिंह बोरा उर्फ मैत्रेय उर्फ प्रकाश,उर्फ राजन उर्फ विजय पहरू,उर्फ प्रभाकर निवासी पल्यूड़ा सोमेश्वर व दो अन्य की मदद से की । पुलिस ने दूसरे आरोपी खीमसिंह बोरा को 17 जुलाई 2019 को बरेली से गिरफ्तार किया था ।
इस मामले की शुरुआती सुनवाई न्यायिक मजिस्ट्रेट धारी की अदालत में हुई । जो 1 जुलाई 2022 को सेशन कोर्ट में स्थान्तरित हुआ । मामले की विवेचना सी ओ भूपेंद्र सिंह धौनी ने की जबकि मामले के मुख्य गवाह धारी के तत्कालीन तहसीलदार राजेन्द्र प्रसाद व पटवारी हेम चंद जोशी थे ।
आरोपियों के खिलाफ लोक सम्पत्ति क्षति निवारण अधिनियम, सहित माओवादी गतिविधियों के आरोप में मुकदमा दर्ज था । लेकिन इस मामले में शासकीय वाहन जलाने के साक्ष्य व प्रतिबंधित संगठन माओवाद से सम्बंधित साहित्य,पर्चे,पम्पलेट आदि आरोपियों से बरामद नहीं हुए । इसके अलावा जांच अधिकारी व मुख्य गवाहों के बयान भी विरोधाभासी थे । इस आधार पर कोर्ट ने दोनों आरोपियों को सरकारी वाहन जलाने व माओवादी घटनाओं में लिप्त होने के आरोपों से दोषमुक्त कर दिया है ।
इस मामले में आरोपियों की ओर से अधिवक्ता सुभाष जोशी व अभियोजन पक्ष की ओर से सहायक जिला शासकीय अधिवक्ता फौजदारी राम सिंह रौतेला ने पैरवी की ।


