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*भुवन चंद्र खंडूड़ी: सेना से मुख्यमंत्री तक का सफर*

 

देहरादून । पूर्व मुख्यमंत्री मेजर जनरल(सेवानिवृत्त) भुवन चंद्र चंद्र खंडूड़ी का मंगलवार की सुबह निधन हो गया । उनकी पुत्री व विधान सभाध्यक्ष ऋतु खंडूड़ी ने सोशल मीडिया में इस आशय की सूचना जारी की है । मेजर जनरल खंडूड़ी लंबे समय से बीमार थे ।

मेजर जनरल (सेवानिवृत्त) भुवन चंद्र खंडूड़ी उत्तराखंड के वरिष्ठ भाजपा नेता और दो बार राज्य के मुख्यमंत्री रहे हैं। उनका जन्म 1 अक्टूबर 1934 को देहरादून में हुआ था। पिता जय बल्लभ खंडूरी पत्रकार और माता दुर्गा देवी सामाजिक कार्यकर्ता थीं। उन्होंने मिलिट्री इंजीनियरिंग कॉलेज, पुणे से बी.ई. (सिविल) की डिग्री ली और 1954 में सेना में लेफ्टिनेंट के तौर पर भर्ती हुए। 39 साल की सराहनीय सेवा के बाद 1990 में मेजर जनरल पद से रिटायर हुए। सेना में रहते हुए 1982 में राष्ट्रपति द्वारा उन्हें ‘अति विशिष्ट सेना मेडल’ से सम्मानित किया गया। अटल बिहारी वाजपेयी उन्हें 1990 के दौर में राजनीति में लाए थे।

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*राजनीतिक उपलब्धियां और मुख्यमंत्री कार्यकाल*
खंडूड़ी ने 2007 से 2009 और फिर 2011-2012 तक उत्तराखंड के मुख्यमंत्री के रूप में सेवा दी। वह 16वीं लोकसभा में गढ़वाल संसदीय क्षेत्र से सांसद भी रहे। अटल सरकार में वह भूतल परिवहन मंत्री रहे, उनके कार्यकाल में ही प्रधानमंत्री ग्रामीण सड़क योजना शुरू हुई थी। मुख्यमंत्री रहते उन्होंने “भ्रष्टाचार मुक्त शासन” का नारा दिया जो आगे चलकर काफी प्रभावी रहा। 2012 में ‘खंडूड़ी है जरूरी’ नारे के बावजूद वह कोटद्वार विधानसभा चुनाव हार गए और भाजपा सत्ता में लौटने से चूक गई ।

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90 वर्ष से अधिक आयु के खंडूड़ी हृदय संबंधी समस्याओं से पीड़ित थे। जनवरी 2025 में उनके ब्रेन में समस्या के चलते देहरादून के सीएमआई अस्पताल में सफल ब्रेन सर्जरी हुई, जिसे डॉ. महेश कुड़ियाल की टीम ने किया। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने अस्पताल पहुंचकर उनका हाल जाना। खंडूड़ी की बेटी ऋतु भूषण खंडूड़ी वर्तमान में विधानसभा स्पीकर हैं और बेटे मनीष खंडूड़ी 2019 में कांग्रेस में शामिल हुए थे। सामाजिक कार्यों में उन्होंने 2013 की केदारनाथ आपदा में प्रभावित देवली भाणी गांव को गोद लिया था, जहां 57 लोगों की मौत हुई थी।

 

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