नैनीताल। देवभूमि उत्तराखण्ड की सुप्रसिद्ध साहित्यिक पत्रिका ‘पंखुड़ी’ द्वारा साहित्य सृजन एवं समाज सेवा के क्षेत्र में उत्कृष्ट योगदान देने वाले साहित्यकारों एवं समाजसेवियों को समय-समय पर सम्मानित किया जाता है। इसी क्रम में इस वर्ष डॉ. कुसुम शर्मा को उनके उत्कृष्ट साहित्यिक लेखन, शिक्षा तथा समाज सेवा के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान के लिए “पंखुड़ी शब्द शिल्पी” एवं “पंखुड़ी साहित्य रत्न” पुरस्कारों से सम्मानित किया गया।
डॉ. कुसुम शर्मा शिक्षा, साहित्य और सामाजिक सरोकारों से लंबे समय से जुड़ी हुई हैं। उनकी प्रकाशित पुस्तकों में ‘महाप्रभु महाराज जी: श्री नीब करौरी बाबा पावन कथामृत’, ‘भक्ति माँ मौनी माई’, ‘दिव्य मौन साधना’ तथा ‘Right Way to Write’ प्रमुख हैं। इसके अतिरिक्त उन्होंने ‘अलौकिक मौन साधना’ पुस्तक तथा ‘भक्तिधारा’ पत्रिका का सफल संपादन भी किया है।
डॉ. शर्मा आकाशवाणी अल्मोड़ा में नैमित्तिक उद्घोषिका के रूप में अपनी सेवाएँ दे चुकी हैं। साथ ही आकाशवाणी के विभिन्न केंद्रों से उनकी स्वरचित रचनाओं का नियमित प्रसारण होता रहा है। साहित्यिक लेखन के साथ-साथ वे विभिन्न वैज्ञानिक शोध एवं विज्ञान विषयक पत्र-पत्रिकाओं में भी निरंतर लेखन करती रही हैं।
वर्तमान में डॉ. कुसुम शर्मा सेंट मेरीज़ कॉन्वेंट कॉलेज, नैनीताल में शिक्षिका के रूप में कार्यरत हैं तथा शिक्षा, साहित्य और समाज सेवा के माध्यम से समाज को निरंतर प्रेरित कर रही हैं।
इस सम्मान के माध्यम से संस्था ने साहित्य, शिक्षा एवं समाज सेवा के प्रति उनके समर्पण, सृजनशीलता तथा प्रेरणादायी योगदान का अभिनंदन किया। इस अवसर पर पंखुड़ी के प्रधान संपादक श्री श्याम सिंह कुटोला, संपादक श्री विजय बत्रा तथा पंखुड़ी परिवार के सभी सदस्यों एवं शुभचिंतकों ने डॉ. कुसुम शर्मा को हार्दिक बधाई देते हुए उनके उज्ज्वल भविष्य की मंगलकामनाएँ व्यक्त कीं।


