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नैनीताल । उत्तराखंड हाईकोर्ट ने नैनीताल नगरपालिका द्वारा लेकब्रिज चुंगी वसूलने के लिए जारी टेंडर प्रक्रिया के कुछ शर्तों को चुनौती देती याचिका पर सुनवाई की।

 

 

मामले की सुनवाई के बाद वरिष्ठ न्यायमूर्ति मनोज कुमार तिवारी और न्यायमूर्ति सिद्धार्थ साह की खण्डपीठ ने नगर पालिका नैनीताल की तरफ से दिए गए शपथपत्र के आधार पर याचिका को निस्तारित कर दिया है। कोर्ट में नगर पालिका ने शपथ पत्र देकर कहा है कि टेंडर प्रक्रिया में प्रतिभाग करने वाले ठेकेदार या फर्म को इस कार्य को करने के लिए पर्वतीय राज्य में टोल टैक्स वसूलने का तीन वर्ष का अनुभव या एक वर्ष में दो करोड़ रुपये का कार्य करने का अनुभव की शर्तें रखी थी ।

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लेकिन अब नगर पालिका ने इन शर्तों में संशोधन के एक वर्ष में दो करोड़ रुपये से अधिक का कार्य करने की हटा दी है। उसकी जगह  मामले के अनुसार मैसर्स अरुण कोहली ए शोल प्रोप्राईटरशिप फर्म के द्वारा याचिका दायर कर कहा है कि नगर पालिका परिषद नैनीताल टोल टैक्स वसूलने के लिए टेंडर निकाला गया है। टेंडर में यह शर्त रखी गयी है कि टेंडर प्रक्रिया में वही फर्म या ठेकेदार प्रतिभाग कर सकता है ।

 

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जिसको पर्वतीय राज्यो में इस कार्य को करने का तीन वर्ष का अनुभव हो या जिसके पास यह कार्य करने का एक वर्ष में दो करोड़ रुपये का कार्य करने का अनुभव   हो। याचिका में यह भी कहा गया है कि नैनीताल के अलावा कहीं टोल टैक्स नहीं है। इसलिए यह शर्त  गलत है। इसके लिए उनके पास यह अनुभव या सर्टिफिकेट नहीं है। वहीं दूसरी शर्त यह है कि एक वर्ष में दो करोड़ रुपये का यही कार्य किया हुआ होना चाहिए। जो गलत है। इसलिए इस पर रोक लगाई जाय।

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