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नैनीताल । उत्तराखंड उच्च न्यायालय ने रामनगर क्षेत्र के ग्राम पापड़ी में निर्माणाधीन एक विवादित स्टोन क्रशर इकाई पर कड़ा रुख अपनाते हुए उसके निर्माण और संचालन पर तत्काल प्रभाव से रोक लगा दी है।

 

न्यायमूर्ति मनोज कुमार तिवारी व न्यायमूर्ति सुभाष उपाध्याय की खंडपीठ ने याचिकाकर्ता सतनाम सिंह द्वारा दायर जनहित याचिका  पर सुनवाई करते हुए यह आदेश पारित किया। कोर्ट ने मामले की गंभीरता को देखते हुए स्पष्ट किया है कि आगामी आदेशों तक साइट पर कोई भी नया कार्य नहीं किया जाएगा।

2. नियमों की अनदेखी का आरोप: याचिकाकर्ता के अनुसार, जिस भूमि पर स्टोन क्रशर का निर्माण किया जा रहा है, वह राज्य सरकार द्वारा घोषित ‘फ्रूट बेल्ट’ (फलों की पट्टी) के अंतर्गत आती है। नियमानुसार, कृषि प्रधान और फल पट्टी वाले क्षेत्रों में ऐसी भारी औद्योगिक इकाइयों की स्थापना वर्जित है। याचिका में आरोप लगाया गया है कि प्रशासन ने इन बुनियादी नियमों को ताक पर रखकर निजी कंपनी को अनापत्ति प्रमाण पत्र जारी कर दिया।

 

3. प्राकृतिक संसाधनों से छेड़छाड़: याचिका में एक गंभीर तथ्य यह उजागर किया गया है कि प्रतिवादियों ने स्टोन क्रशर स्थल पर सिंचाई विभाग की 4 मीटर चौड़ी सरकारी ‘गूल’ (नहर) और लगभग 14 मीटर चौड़े प्राकृतिक बरसाती नाले को अवैध रूप से पाट दिया है। इस अतिक्रमण के कारण न केवल स्थानीय किसानों की सिंचाई व्यवस्था ठप हो गई है, बल्कि मानसून के दौरान पूरे गांव में बाढ़ आने का खतरा पैदा हो गया है।

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4. भ्रामक रिपोर्ट और दूरी के मानक: याचिकाकर्ता ने कोर्ट को बताया कि खनन विभाग और प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के अधिकारियों ने निजी कंपनी को फायदा पहुँचाने के उद्देश्य से स्थल निरीक्षण की भ्रामक रिपोर्ट तैयार की। इस रिपोर्ट में प्रस्तावित स्टोन क्रशर से पास के सरकारी प्राथमिक विद्यालय, मंदिर और पवित्र आश्रम की वास्तविक दूरी को गलत तरीके से दर्शाया गया है, ताकि वे मानकों के दायरे में आ सकें।
5. जनसुविधाओं का हनन: निर्माण कार्य के कारण गांव के बच्चों के स्कूल जाने का मुख्य रास्ता भी बाधित हो गया है। ग्रामीणों ने वर्ष 2018 से ही इस परियोजना का विरोध किया था और कई बार जिलाधिकारी नैनीताल को ज्ञापन सौंपे थे, लेकिन उनकी शिकायतों पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई। अंततः ग्रामीणों को न्याय के लिए उच्च न्यायालय की शरण लेनी पड़ी।

6. मामले के प्रमुख पक्ष: इस कानूनी लड़ाई में कई महत्वपूर्ण पक्ष शामिल हैं। याचिकाकर्ता  सतनाम सिंह की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता ए.एस. रावत और अधिवक्ता गौरव पालीवाल पैरवी कर रहे हैं। प्रतिवादियों की सूची में उत्तराखंड शासन, जिलाधिकारी नैनीताल, निदेशक खनन, और जिला खान अधिकारी शामिल हैं। इसके अलावा, मुख्य रूप से निजी प्रतिवादी मैसर्स पी फाउल स्मार्ट इंफ्रास्ट्रक्चर प्राइवेट लिमिटेड और इसके साझीदार विजय पाल, ईश्वर लाल एवं नीरज अग्रवाल को नोटिस जारी किया गया है।

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7- कोर्ट का कड़ा निर्देश: आज की सुनवाई के दौरान माननीय न्यायालय ने प्रतिवादियों को स्पष्ट निर्देश दिए कि वे साइट पर “यथास्थिति”  बनाए रखें। कोर्ट ने सभी निजी प्रतिवादियों को कारण बताओ नोटिस जारी कर पूछा है कि क्यों न उनकी इकाई की अनुमति को रद्द कर दिया जाए। न्यायालय ने यह भी संकेत दिया कि यदि अधिकारियों की मिलीभगत पाई गई, तो उनके खिलाफ भी सख्त कार्रवाई की जाएगी।

 

8. भविष्य की कार्यवाही: इस आदेश के बाद क्षेत्र के पर्यावरण प्रेमियों और ग्रामीणों में खुशी की लहर है। अब सभी पक्षों को अपना जवाब न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत करना होगा। इस मामले की अगली सुनवाई जल्द ही होगी, जिसमें कोर्ट सरकारी दस्तावेजों और याचिकाकर्ता द्वारा प्रस्तुत किए गए सबूतों (फोटोग्राफ्स और मानचित्र) का सूक्ष्म परीक्षण करेगा। फिलहाल, स्टोन क्रशर का काम पूरी तरह से ठप रहेगा।

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