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नैनीताल । उत्तराखंड हाईकोर्ट  ने एक फ्रांसीसी महिला रॉयरे निकोल के पक्ष में एक महत्वपूर्ण निर्णय सुनाते हुए उनके पासपोर्ट को बिना शर्त  रिलीज करने का आदेश दिया है। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि चूंकि याचिकाकर्ता को पहले ही बरी किया जा चुका है और उनकी दोषमुक्ति की पुष्टि भी हो चुकी है, इसलिए उन पर किसी भी प्रकार का प्रतिबंध लगाना उचित नहीं है।
मामले के अनुसार 60 वर्षीय रॉयरे निकोल, जो वर्तमान में अल्मोड़ा जिले के दीनापानी क्षेत्र में रह रही थीं, विशेष सत्र न्यायालय बागेश्वर ने (राज्य बनाम रॉयरे निकोल और अन्य) में 30 सितंबर 2025 को सत्र न्यायालय ने बरी कर दिया था। इसके बाद, जब उन्होंने पुलिस हिरासत से अपना पासपोर्ट वापस मांगा, तो निचली अदालत ने 16 सितंबर 2025 को पासपोर्ट रिलीज करने के लिए कुछ शर्तें रख दी थी।
विशेष सत्र न्यायाधीश, बागेश्वर द्वारा लगाई गई शर्तों के अनुसार, निकोल को 30,000 रुपये का निजी मुचलका भरना था और एक वचन पत्र देना था कि वह अपील की अवधि तक बिना अनुमति देश नहीं छोड़ेंगी। याचिकाकर्ता ने इन्हीं शर्तों को उच्च न्यायालय में चुनौती दी थी। सुनवाई के दौरान न्यायमूर्ति रवींद्र मैथानी और न्यायमूर्ति आलोक महरा की खंडपीठ ने पाया कि राज्य सरकार द्वारा दायर अपील पहले ही खारिज की जा चुकी है, अतः अब इन शर्तों का कोई आधार नहीं रह गया है।
उच्च न्यायालय ने अपने आदेश में संशोधन करते हुए कहा कि याचिकाकर्ता को अब किसी भी प्रकार का वचन पत्र  देने की आवश्यकता नहीं है। कोर्ट ने कड़े शब्दों में कहा कि “वह जहां चाहें वहां जाने के लिए स्वतंत्र हैं”। इसी के साथ कोर्ट ने याचिका को निस्तारित करते हुए याचिकाकर्ता को बिना किसी बाधा के यात्रा करने की अनुमति दे दी है।

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